घटना का विवरण आयरलैंड के वाटरफोर्ड शहर के किलबैरी इलाके में 4 अगस्त 2025 की शाम को एक 6 साल की भारतीय मूल की बच्ची, निया नवीन (नाम बदला हुआ), पर नस्लीय हमला हुआ। बच्ची अपने घर के बाहर दोस्तों के साथ खेल रही थी, जब 12 से 14 साल के पांच लड़कों और एक 8 साल की लड़की के समूह ने उसे घेर लिया। हमलावरों ने बच्ची को “डर्टी इंडियन” और “गो बैक टू इंडिया” जैसे नस्लीय अपशब्द कहे। इसके बाद उन्होंने बच्ची के चेहरे पर मुक्के मारे, उसके बाल खींचे, गर्दन पर वार किया और साइकिल के पहिए से उसके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया। इस घटना ने बच्ची को शारीरिक और मानसिक रूप से आघात पहुंचाया, जिसके कारण वह अब घर के बाहर खेलने से डरती है। बच्ची की मां, अनुपा अच्युतन, जो पेशे से नर्स हैं और पिछले 8 साल से आयरलैंड में रह रही हैं, ने बताया कि वह अपने 10 महीने के बेटे को दूध पिलाने के लिए कुछ पलों के लिए घर के अंदर गई थीं। इसी दौरान यह हमला हुआ। बच्ची रोती हुई घर लौटी और डर के कारण बोल नहीं पा रही थी। उसकी एक सहेली ने मां को घटना की जानकारी दी। अनुपा ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी को ऐसी क्रूरता का सामना करना पड़ेगा। हम आयरलैंड को अपना घर मानते थे, लेकिन अब हम सुरक्षित महसूस नहीं करते।” पुलिस की कार्रवाई आयरलैंड की पुलिस, जिसे ‘गार्डा’ (An Garda Síochána) के नाम से जाना जाता है, ने इस घटना की शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है और इसे संभावित नस्लीय घृणा अपराध (हेट क्राइम) के रूप में जांच रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी हमलावर की गिरफ्तारी की खबर सामने नहीं आई है। बच्ची की मां ने पुलिस से यह अनुरोध किया है कि हमलावर बच्चों को सजा देने के बजाय उन्हें काउंसलिंग और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहती कि इन बच्चों को सजा मिले। मैं चाहती हूं कि उन्हें सही दिशा दिखाई जाए ताकि वे भविष्य में ऐसा न करें।” यह दृष्टिकोण उनकी उदारता और सामाजिक सुधार की भावना को दर्शाता है। पुलिस ने यह भी स्वीकार किया कि आयरलैंड में भारतीय मूल के लोगों पर नस्लीय हमले बढ़ रहे हैं। डबलिन और इसके आसपास के इलाकों, जैसे टालाघट और क्लोंडाल्किन, में हाल के महीनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। गार्डा ने कहा कि वे इन मामलों को गंभीरता से ले रहे हैं और हमलावरों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया डबलिन में भारतीय दूतावास ने आयरलैंड में भारतीय नागरिकों पर बढ़ते हमलों को देखते हुए एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीय समुदाय को सुनसान और अंधेरे इलाकों में अकेले जाने से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, आपातकालीन स्थिति के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (08994 23734) और ईमेल (cons.dublin@mea.gov.in) भी प्रदान किया गया है। दूतावास ने यह भी कहा कि वे आयरलैंड सरकार के साथ मिलकर भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। दूतावास ने हाल की घटनाओं, विशेष रूप से 19 जुलाई को डबलिन के टालाघट में एक 40 वर्षीय भारतीय व्यक्ति पर हुए हमले और अब इस बच्ची पर हमले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने आयरलैंड में भारतीय नागरिकों से सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने का आग्रह किया है। नेताओं और संगठनों की प्रतिक्रिया इस घटना पर आयरलैंड के स्थानीय नेताओं और राजनेताओं की प्रतिक्रिया सीमित रही है। हालांकि, आयरलैंड की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस घटना की निंदा की है और इसे नस्लीय हिंसा का हिस्सा बताया है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि नस्लवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं और भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाएं। इमिग्रेंट काउंसिल ऑफ आयरलैंड की सीईओ टेरेसा बुचकोव्स्का ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आयरिश पुलिस को नस्लीय घृणा अपराधों की जांच और रिपोर्टिंग के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण की कमी है, जिसके कारण ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई में देरी होती है। भारत सरकार और भारतीय दूतावास ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। दूतावास ने आयरलैंड सरकार से हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ संपर्क में है। सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ आयरलैंड में नस्लवाद की जड़ें ऐतिहासिक और सामाजिक कारकों से जुड़ी हैं। इतिहासकार ब्रायन फैनिंग के अनुसार, 20वीं सदी की शुरुआत में आयरलैंड में राष्ट्रवाद के उदय के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों, जैसे यहूदियों और आयरिश ट्रैवलर्स, के खिलाफ भेदभाव आम था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आयरलैंड की तटस्थता और तत्कालीन नेता एमोन डी वलेरा की कुछ नीतियों ने भी नस्लीय भेदभाव की धारणाओं को बढ़ावा दिया। हाल के दशकों में, आयरलैंड में आर्थिक समृद्धि के कारण आप्रवासियों की संख्या बढ़ी है, जिसमें भारतीय, चीनी और अफ्रीकी मूल के लोग शामिल हैं। हालांकि, इस विविधता के साथ-साथ नस्लीय तनाव भी बढ़ा है। भारतीय समुदाय की चिंताएँ आयरलैंड में भारतीय समुदाय, जो लगभग 10,000 छात्रों और पेशेवरों, विशेष रूप से आईटी और स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है, अब डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है। इस घटना ने न केवल बच्ची के परिवार, बल्कि पूरे भारतीय समुदाय को झकझोर दिया है। बच्ची की मां ने कहा, “मैं आयरिश नागरिक बनकर खुश थी, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं यहां की नहीं हूं।” यह बयान आयरलैंड में भारतीयों के बीच बढ़ती असुरक्षा की भावना को दर्शाता है। सुझाव यह घटना आयरलैंड में नस्लवाद और घृणा अपराधों की गंभीर समस्या को उजागर करती है। इसे रोकने के कदम उठाए जाने चाहिए: पुलिस प्रशिक्षण: आयरिश पुलिस को नस्लीय घृणा अपराधों की जांच और रोकथाम के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। जागरूकता अभियान: स्कूलों और समुदायों में नस्लवाद विरोधी शिक्षा और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाए जाएं। कानूनी कार्रवाई: नस्लीय हिंसा के मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। समुदाय सहायता: भारतीय समुदाय के लिए विशेष सहायता केंद्र और हेल्पलाइन स्थापित की जाएं ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें। इस घटना ने आयरलैंड में नस्लवाद की गहरी जड़ों को उजागर किया है, और यह समय है कि स्थानीय सरकार और समाज इस समस्या का सामना करने के लिए एकजुट हो। भारतीय दूतावास और आयरलैंड सरकार को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय समुदाय सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी सके। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन प्रेरणा जनकल्याण समिति के तत्वाधान में निकाली गई विशाल कावड़ यात्रा बड़नगर पुलिस ने चोरी के बकरे को किया बरामद, ऑटो चालक विनोद बाली गिरफ्तार