भोपाल: ऐशबाग के 90 डिग्री वाले ओवरब्रिज का री-डिजाइन, सुरक्षा के लिए बढ़ेगी तीन फीट चौड़ाई

भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का 90 डिग्री का खतरनाक मोड़, जो उद्घाटन से पहले ही विवादों में घिर गया था, अब री-डिजाइन किया जाएगा। रेलवे ने इसके लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराने की सहमति दी है, जिससे ब्रिज की रेलिंग तोड़कर मोड़ को और घुमावदार बनाया जाएगा। इस बदलाव से पुल की चौड़ाई तीन फीट बढ़कर लगभग 11.5 मीटर हो जाएगी, जिससे वाहनों को मोड़ने के लिए अधिक जगह मिलेगी और टी-शेप मोड़ पर दुर्घटना की आशंका कम होगी।

18 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 648 मीटर लंबा और 8.5 मीटर चौड़ा ब्रिज महामाई का बाग, पुष्पा नगर और स्टेशन क्षेत्र को नए भोपाल से जोड़ता है। सोशल मीडिया पर इसकी डिजाइन को लेकर तीखी आलोचना और मीम्स वायरल होने के बाद, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि यह मोड़, खासकर रात और बारिश में, हादसों का कारण बन सकता है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) और रेलवे के बीच समन्वय के बाद, फुटपाथ को भी तोड़कर नया डिजाइन तैयार किया जाएगा, जिसमें हल्के और मजबूत मटेरियल का उपयोग होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए ₹5 करोड़ का अतिरिक्त फंड मंजूर किया गया है, और निर्माण कार्य 19 जून 2025 से शुरू होने की संभावना है। इससे ऐशबाग क्षेत्र के लगभग तीन लाख लोगों को सुरक्षित आवाजाही में राहत मिलेगी।

सुझाव और विशेषज्ञ की राय: सिटी प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ ने सुझाव दिया कि मोड़ को गोलाई देने के लिए पांच फीट का कर्व दिया जा सकता है, साथ ही ब्रेकर, बड़े दर्पण और स्ट्रीट लाइट्स लगाकर सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।

यह कदम न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि भोपाल के इस महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित और आधुनिक बनाने में भी मदद करेगा।

भोपाल: वन विहार में किंग कोबरा की रहस्यमयी मौत, जांच शुरू

भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में कर्नाटक के पिलिकुला बायोलॉजिकल पार्क से अप्रैल 2025 में लाए गए दो नर किंग कोबरा में से एक की मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि करीब 2:00 बजे विशेष बाड़े में मृत्यु हो गई। पांच वर्षीय इस कोबरा की मौत ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। मृत कोबरा की लंबाई 9.5 फीट थी, जबकि दूसरा 10.5 फीट लंबा कोबरा स्वस्थ है और इसे हाल ही में इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में स्थानांतरित किया गया था।

मौत से पहले की स्थिति: वन विहार के पशु चिकित्सकों के अनुसार, मृत कोबरा (नाम: नागार्जुन) की गतिविधियां मंगलवार शाम तक सामान्य थीं, लेकिन पिछले तीन दिनों से वह भोजन नहीं कर रहा था। उसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी, फिर भी मृत्यु के सटीक कारणों का पता नहीं चल सका है।

जांच के आदेश: मौत की खबर फैलने के बाद वन विहार प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है, लेकिन अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। जबलपुर से पशु चिकित्सकों की एक टीम पोस्टमॉर्टम के लिए बुलाई गई है, जिसमें मंगलुरु के विशेषज्ञ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे। कुछ स्रोतों के अनुसार, किंग कोबरा की प्रजाति संरक्षण के लिए कर्नाटक से लाए गए इन सांपों के प्रबंधन में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ हो सकता है, जिसकी जांच की मांग उठ रही है।

परियोजना का उद्देश्य: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, किंग कोबरा को मध्य प्रदेश के जंगलों में पुनः स्थापित करने के लिए वन विहार में ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए कर्नाटक से दो नर कोबरा लाए गए थे, जिनके बदले मध्य प्रदेश ने दो बाघ दिए थे। यह परियोजना सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए शुरू की गई थी।

विवाद और आलोचना: वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने इस मौत को लापरवाही का परिणाम बताया है और CZA प्रोटोकॉल के उल्लंघन की जांच की मांग की है। पर्यटकों ने भी वन विहार में सर्प उद्यान के रखरखाव और कर्मचारियों की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं, जिससे पहले भी किंग कोबरा के दर्शन न होने की शिकायतें मिली थीं।

आगे की कार्रवाई: मृत कोबरा का पोस्टमॉर्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। जांच के नतीजे आने के बाद ही मौत के कारणों और प्रबंधन में संभावित खामियों का खुलासा हो सकेगा। इस बीच, वन विहार में बचे दूसरे कोबरा की निगरानी बढ़ा दी गई है।

यह घटना मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक झटका है, और विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कड़े प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण की जरूरत है।

भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक, भोपाल में गुरुवार-शुक्रवार तक पहुंचने की संभावना

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 16 जून 2025 को दस्तक दे दी है, जो सामान्य तारीख 15 जून से एक दिन देर से हुआ। बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर के रास्ते मानसून ने प्रदेश में प्रवेश किया, और अब तक इंदौर, देवास, भोपाल सहित 15 शहरों में पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में मानसून प्रदेश के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में सक्रिय हो सकता है, और गुरुवार-शुक्रवार (19-20 जून) तक भोपाल में इसकी धमाकेदार एंट्री होने की संभावना है।

मौसमी सिस्टम और बारिश का अनुमान: प्रदेश में चार मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं, जिनमें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र, गुजरात के पास साइक्लोनिक सर्कुलेशन और झारखंड तक फैली द्रोणिका शामिल हैं। इनके प्रभाव से अगले हफ्ते भर में पूरे मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने 104-106% बारिश का अनुमान जताया है, यानी औसत 38-39 इंच पानी गिर सकता है, खासकर जबलपुर-शहडोल संभाग में।

वर्तमान स्थिति और अलर्ट: मंगलवार को भोपाल, धार, राजगढ़, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और सतना में अच्छी बारिश दर्ज की गई। झाबुआ, उज्जैन, मंदसौर और मंडला में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी है, जबकि भोपाल, इंदौर, देवास सहित 35 जिलों में तेज हवाओं (40-60 किमी/घंटा) और बिजली गिरने की चेतावनी है। विदिशा में 68 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक है।

प्रभाव और राहत: मानसून की शुरुआत ने गर्मी और उमस से राहत दी है। भोपाल में तापमान 37.5 डिग्री, इंदौर में 34.6 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मानसून सबसे आखिर में पहुंचेगा। गुरुवार, 19 जून को बारिश का दायरा और बढ़ेगा, जिससे पूरे प्रदेश में वर्षा का प्रभाव दिखेगा।

यह मानसून मध्य प्रदेश के लिए सामान्य से बेहतर बारिश लेकर आएगा, जिससे किसानों और आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है।

भोपाल: बिजली कंपनियों के अफसरों पर ऊर्जा मंत्री की सख्ती, गैर-जिम्मेदार होंगे रिप्लेस

मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंगलवार, 17 जून 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिजली ट्रिपिंग और मेंटीनेंस कार्यों की समीक्षा के दौरान बिजली कंपनियों के अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिम्मेदारी से काम नहीं करने वाले अधिकारियों को तत्काल रिप्लेस किया जाए और उनके स्थान पर सक्षम जूनियर अधिकारियों को पदस्थ किया जाए। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं के फोन नहीं उठाने के कारण पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 15 अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने का फैसला लिया गया।

समीक्षा में सख्त निर्देश:

  • क्षेत्रीय भ्रमण और निरीक्षण: मंत्री तोमर ने अधिकारियों को क्षेत्र का नियमित भ्रमण करने और टूर प्रोग्राम की जानकारी पहले से भेजने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों, ट्रिपिंग और मेंटीनेंस की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा।
  • शिकायतों का त्वरित निराकरण: जिन शिकायतों का समाधान 3 से 4 घंटे में हुआ, उनके कारणों की विस्तृत जानकारी मांगी गई। साथ ही, मेंटीनेंस का समय 4 घंटे से कम करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा।
  • मेंटीनेंस के लिए फंड: अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मण्डलोई ने बताया कि तीनों बिजली कंपनियों को मेंटीनेंस के लिए 15-15 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनका उपयोग ट्रिपिंग कम करने के लिए बेहतर ढंग से करने के निर्देश दिए गए।
  • कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार: बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाओं पर तुरंत संज्ञान लेने को कहा गया।

इंदौर की स्थिति पर विशेष ध्यान: समीक्षा के दौरान इंदौर में बार-बार ट्रिपिंग की शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए मंत्री ने बिजली कंपनियों के एमडी को मैनपावर और उपकरणों की कमी दूर करने के निर्देश दिए। साथ ही, रहवासी संघों और जन-प्रतिनिधियों से लगातार संपर्क में रहने और विद्युत अवरोध के सही कारणों को जनता तक पहुंचाने को कहा।

कॉल सेंटर की व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री ने अपने कार्यालय में तीन महीने के लिए अस्थाई कॉल सेंटर (0755-4344299) शुरू किया है, जहां उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि पहले बिजली कंपनी के मुख्य कॉल सेंटर 1912 पर शिकायत दर्ज करें और उसका क्रमांक साझा करें।

जमीनी कार्रवाई: मंत्री तोमर ने हाल ही में ग्वालियर में विद्युत केंद्रों का औचक निरीक्षण किया, जहां ट्रांसफार्मर से बिजली चोरी पकड़ी गई और उपभोक्ताओं से वैध कनेक्शन लेने की अपील की गई। भोपाल में भी कोटरा नेहरू नगर और भदभदा के 33/11 केवी उपकेंद्रों का निरीक्षण कर लापरवाही पर एक कनिष्ठ अभियंता की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश दिए गए।

विपक्ष का तंज: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बिजली कटौती और विभागीय भ्रष्टाचार को लेकर मंत्री तोमर पर निशाना साधा, दावा किया कि बिजली बिल बढ़ रहे हैं और आपूर्ति कम हो रही है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जल्द खुलासे की बात कही।

यह सख्ती बिजली व्यवस्था में सुधार और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे और कर्मचारी प्रशिक्षण पर और ध्यान देना होगा।

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