कमिश्नर कार्यालय के सामने 6वे दिन आमरण अनशन जारी।

रीवा/ रीवा जिले के त्योंथर डिवीजन और मऊगंज क्षेत्र में मीटर रीडिंग का करोड़ो का घोटाला सामने आया है जहा पर बिजली विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के साठगांठ से निर्दोष आउटसोर्स कर्मचारियो को बलि का बकरा बनाया गया है और इन कर्मचारियों को बिना किसी ठोस कारण के निष्कासित कर दिया गया। जबकि असली गुनहगार अब भी मलाईदार कुर्सियों पर विराजमान हैं।

पूरी कहानी में जो दस्तावेजों और विभागीय पत्रों से जानकारी सामने आई है वह चौंकाने वाली है ग्रामीण क्षेत्रों में जिन ठेकेदारों को मीटर लगाने का काम सौंपा गया था उन्होंने विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर भारी भ्रष्टाचार करते हुए मीटर ही नही लगाए।  लेकिन दक्षता ऐप के जरिए रीडिंग की खानापूर्ति कर दी गई।

कुछ जगहों पर ‘डेमो मीटर’ लगाकर फोटो खींची गई और उन्हीं से रीडिंग दर्ज करवाई गई। जिन मीटरों की रीडिंग की गई है उनका सर्विस क्रमांक और IVRS नंबर एक जैसा ही पाया गया है जो तकनीकी रूप से संभव ही नहीं।

या तो मीटर कभी लगाए ही नहीं गए या फिर किसी एक मीटर से कई उपभोक्ताओं की रीडिंग दर्ज की गई।
जब यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और प्रबंधक पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर ने स्थिति का संज्ञान लिया तब मीटरों की स्पष्ट फोटो न होने का बहाना बनाकर नीचे के स्तर के आउटसोर्स कर्मचारियों को बलि का बकरा बना दिया गया।

सबसे चौकाने वाली बात ये है इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा न तो ठेकेदारों से जवाब मांगा गया न ही उन अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की गई जिन्होंने इस भ्रष्टाचार की निगरानी की है। कुल मिलाकर पूरा विभाग अपने अधिकारियों और ठेकेदारों को बचाने मे लगा हुआ है।
लेकिन निष्कासित निर्दोष आउट सोर्स कर्मचारी अपनी न्याय की लड़ाई के लिए लड़ रहे है अब लड़ाई आरपार की हो गयी है।

जिन्होंने जिला कलेक्टर और कमिश्नर को आवेदन कर कमिश्नर कार्यालय रीवा के सामने 1 मई मजदूर दिवस के दिन से आमरण अनशन में बैठे हुए है वही हमेशा की तरह गरीबो,असहायों के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंजबिहारी तिवारी ने न्याय दिलाने हेतु उनके साथ आमरण अनशन में बैठ गए है।
इस संवंध में कुंज बिहारी तिवारी ने बताया कि इस प्रकरण की शिकायत अपर सचिव, ऊर्जा विभाग भोपाल को आवेदन दिया है और अपर सचिव ने प्रबंधक जबलपुर को कार्यवाही हेतु पत्र लिखा है इसके बाद प्रबंधक जबलपुर ने भी मुख्य अभियंता रीवा को निर्देशित किया है लेकिन यह कार्यवाही भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।

एक और जांच प्रतिवेदन डी त्यौंथर और डी मऊगंज से मंगाया गया जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 3% मीटर ही लगे हैं यहीं से एक और घोटाले की परत खुलती है मेंटेनेंस का काम भी ठेके पर होने के बावजूद मीटर रीडरों से कराया गया जो कि नियमों के खिलाफ है।

13 फरवरी को एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर 15 दिनों में रिपोर्ट देने की बात कही गई लेकिन वह भी महज़ एक औपचारिकता निकली।
वही अनशनकारियों का कहना है कि अब पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है  मरते दम तक न्याय की लड़ाई लड़ने की शपथ ले चुके हैं।

सवाल यही की है कि क्या विभागीय अधिकारी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करेंगे या फिर निर्दोष आउटसोर्स को ही बली चढ़ा दी जाएगी ?

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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