इंदौर। डॉ. जेम्स पाल। सराफा क्षेत्र स्थित गोपाल मंदिर शॉपिंग हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में एक व्यापारी के साथ कथित मारपीट, धमकी और वसूली के आरोपों के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद बड़ी संख्या में व्यापारी सराफा थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। व्यापारियों के कई घंटे थाने में मौजूद रहने के बाद रात करीब 1 बजे FIR दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।मामले में मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस को घटना की सूचना और शिकायत किस समय मिली तथा FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में कितना समय लगा। व्यापारियों का कहना है कि गंभीर शिकायत के बाद उन्हें कार्रवाई के लिए घंटों थाने में बैठना पड़ा। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में पुलिस की ओर से कार्रवाई की समय-सीमा और प्रक्रिया का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।कथित ₹5 हजार मासिक वसूली का आरोप भी जांच के दायरे मेंव्यापारियों की ओर से कुछ लोगों पर दुकानदारों से प्रतिमाह 5 हजार रुपये की कथित वसूली मांगने के आरोप भी लगाए गए हैं। फिलहाल यह आरोप जांच का विषय है। यदि अन्य व्यापारियों से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं तो पुलिस के लिए यह जांच करना महत्वपूर्ण होगा कि मामला केवल एक विवाद तक सीमित है या इसके पीछे किसी संगठित दबाव अथवा वसूली का नेटवर्क भी है।CCTV और अन्य साक्ष्यों की जांच की मांगमामले में घटना से संबंधित CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। व्यापारियों की ओर से पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित करने और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी नजरफुटपाथ पर कथित अतिक्रमण और दुकानें लगाए जाने का मुद्दा भी विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस के साथ नगर निगम और यातायात पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। व्यापारियों का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और यातायात से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान आवश्यक है।सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि किसी आरोपी को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं है, लेकिन यदि पुलिस कार्रवाई में देरी हुई है तो उसका तथ्यात्मक परीक्षण भी जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा कर व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।उन्होंने कहा कि सराफा जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में किसी व्यापारी को FIR के लिए लंबे समय तक थाने में बैठने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। यदि कार्रवाई में देरी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई की है तो उसकी समय-सीमा और प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।व्यापारियों की मांग है कि Addl. DCP Zone-4 स्तर पर पूरे घटनाक्रम की समयबद्ध समीक्षा कर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही कथित वसूली के आरोपों की स्वतंत्र जांच और क्षेत्र में व्यापारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित की जाए। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बिवासर में भव्य कलश यात्रा में करीब 3 हजार माताओं-बहनों ने लिया भाग