प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के कथित मनमाने इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मुकदमों के आधार पर किसी व्यक्ति को ‘गुंडा’ घोषित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ऐसे मामलों में कानून के दुरुपयोग से व्यक्ति और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को होने वाली क्षति पर भी चिंता जताई। मामला गाजियाबाद निवासी अभिषेक त्यागी से जुड़ा है। उनके खिलाफ दो आपराधिक मामलों के आधार पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद के आदेश में उन्हें छह महीने तक प्रत्येक दूसरे और चौथे शनिवार को थाने में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। बाद में मेरठ मंडल के आयुक्त ने भी उनकी अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने दोनों आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि दोनों मुकदमों के बीच करीब तीन वर्ष का अंतर था। ऐसे में केवल इन मामलों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि गुंडा एक्ट का इस्तेमाल स्पष्ट मामलों में और कानून के उद्देश्य के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने नौकरशाही द्वारा ऐसे आदेश जारी किए जाने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि यदि अवैध एवं मनमाने तरीके से अधिकारों का प्रयोग जारी रहा तो दंडात्मक हर्जाना लगाया जा सकता है। मामले में कोर्ट ने अभिषेक त्यागी को हुए कष्ट के लिए ₹50 हजार हर्जाना देने का आदेश दिया और राज्य सरकार को संबंधित अधिकारियों के वेतन से राशि वसूलने की स्वतंत्रता दी। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी में प्रशासनिक अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल सावधानी और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप करने का संदेश दिया गया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मध्य प्रदेश में दवा-दारू से लेकर पानी तक व्यवस्था पर सवाल, कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने सरकार को घेरा इंदौर में एमडी ड्रग्स के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, इलेक्ट्रिक ऑटो भी जब्त