भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं, दूषित पानी और अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के आदिवासी विभाग के चेयरमैन विक्रांत भूरिया ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदेश में सामने आई विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। भूरिया ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने इंदौर में अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत, छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत, सतना में रक्त चढ़ाने से जुड़े कथित एचआईवी संक्रमण, बालाघाट में बच्चों की मौत तथा रीवा के अस्पतालों में सामने आए कथित लापरवाही के मामलों का जिक्र किया।रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय से हाल ही में सामने आए एक मामले में एक मरीज को कथित तौर पर मृत घोषित कर मुर्दाघर भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की खबर सामने आई थी। परिजनों द्वारा मरीज में सांस चलने की बात सामने आने के बाद दोबारा उपचार शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई।भूरिया ने रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा की मौत के मामले का भी उल्लेख किया। इस प्रकरण में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद संबंधित महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की गई है और 16 सितंबर 2026 को उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी होने की रिपोर्ट सामने आई है।बालाघाट के बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला भी चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अगस्त 2026 में सात बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में स्थानीय संगठन की ओर से 35 बच्चों की मौत का दावा किया गया। इन आंकड़ों में अंतर होने के कारण मृतकों की संख्या को लेकर आधिकारिक स्थिति और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं।छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला भी सामने आया था। मध्य प्रदेश विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार 4 सितंबर 2025 से संबंधित अवधि में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से प्रदेश में 24 बच्चों की मौत दर्ज हुई थी।सागर के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन से हुई मौतों को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 10 सितंबर तक प्रशासन ने 16 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की थी, जबकि कांग्रेस नेताओं की ओर से इससे कहीं अधिक मौतों के दावे किए गए। मामले में न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं।कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने इन घटनाओं को आधार बनाते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय की जांच शुरू, PHQ के निर्देश पर पुलिस ने संभाली जांच एक-दो मुकदमों के आधार पर गुंडा एक्ट लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, ₹50 हजार हर्जाना देने का आदेश