फुटपाथ और सड़कों पर कब्जों के खिलाफ आज से निगम-पुलिस की बड़ी मुहिम जोन-6 में भवन अधिकारी की कथित मेहरबानी पर सवाल, महीनों से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहींइंदौर। शहर में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मालवा मिल से पाटनीपुरा की ओर जाने वाले मार्ग पर जोन-6 के वार्ड क्रमांक 27 में फुटपाथ पर कथित रूप से बीम-कॉलम खड़े कर ज्वैलर्स की दुकान को शोरूम का रूप दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शिकायत के बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि विशाल ज्वैलर्स के संचालक द्वारा फुटपाथ की जगह पर निर्माण किए जाने से आसपास के व्यापारियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले की शिकायत नगर निगम के भवन अधिकारी आशीष राठौर से किए जाने के बावजूद कई महीने गुजर गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।गरीबों के ठेले पर हथौड़ा, पक्के निर्माण पर खामोशी क्यों?नगर निगम का अतिक्रमण हटाने वाला अमला सड़क और फुटपाथ पर दुकानदारों के बोर्ड, सामान और अस्थायी अतिक्रमण हटाने में सक्रिय नजर आता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब फुटपाथ पर रखा एक बोर्ड भी निगम की नजर से नहीं बचता, तो कथित तौर पर बीम-कॉलम खड़े कर किया गया पक्का निर्माण आखिर कार्रवाई से कैसे बच गया?स्थानीय लोगों का आरोप है कि छोटे दुकानदारों और गरीबों के अस्थायी अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई करने वाला निगम बड़े और पक्के निर्माण के मामले में आखिर क्यों खामोश है? क्या नियम कार्रवाई करने वाले की हैसियत देखकर बदल जाते हैं?‘सेटिंग’ के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरताशिकायतकर्ताओं ने नगर निगम के भवन परमिशन विभाग के कुछ जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कथित मिलीभगत और संरक्षण के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी को कई बार सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और फोन पर हर बार कोई न कोई बहाना बना दिया जाता है।वहीं, दुकान संचालक का कहना है कि निर्माण फुटपाथ पर नहीं, बल्कि उसकी निजी संपत्ति पर किया गया है। ऐसे में अब असली सवाल यह है कि निर्माण वास्तव में निजी भूमि की सीमा में है या निगम की सार्वजनिक जमीन/फुटपाथ पर—इसका स्पष्ट निर्धारण नगर निगम के रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण से ही हो सकता है।निगमायुक्त से जांच और कार्रवाई की मांगमामले को लेकर स्थानीय लोगों ने अब निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और अपर आयुक्त प्रखर सिंह से शिकायत करने का निर्णय लिया है। लोगों की मांग है कि मौके का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए, भवन निर्माण की अनुमति और भूमि स्वामित्व की जांच की जाए तथा यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो जिम्मेदारों और निर्माणकर्ता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।सवाल सीधा है—अगर फुटपाथ सार्वजनिक उपयोग के लिए है तो उस पर पक्का निर्माण किसकी अनुमति से हुआ? और यदि निर्माण निजी भूमि पर है तो निगम के रिकॉर्ड में उसकी स्थिति क्या है? फुटपाथ और सड़कों पर कब्जों के खिलाफ आज से निगम-पुलिस की बड़ी मुहिमपांच थाना क्षेत्रों में चलेगा संयुक्त अभियान, राजमोहल्ला से राजबाड़ा, खजराना ब्रिज, एमजी रोड और अन्य प्रमुख इलाकों में होगी कार्रवाईइंदौर। शहर की सड़कों और फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर नगर निगम और पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर ली है। शहर में फुटपाथ और सड़क पर कब्जा कर कारोबार करने वालों के खिलाफ आज से विशेष संयुक्त अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के तहत प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों से अतिक्रमण हटाने के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने पर जोर रहेगा।अभियान के लिए शहर के पांच थाना क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। राजमोहल्ला से राजबाड़ा, खजराना ब्रिज, एमजी रोड, रिगल सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निगम और पुलिस की टीमें कार्रवाई करेंगी। सड़क और फुटपाथ घेरकर दुकान लगाने, सामान रखने तथा यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण को हटाया जाएगा।सड़क पर दुकान, फुटपाथ पर कब्जा… अब चलेगा डंडाशहर में लंबे समय से फुटपाथों पर दुकानदारों द्वारा सामान फैलाने और सड़क तक दुकानें लगाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे पैदल चलने वालों के लिए रास्ता बाधित होने के साथ ही यातायात पर भी असर पड़ता है। कई प्रमुख बाजारों में पार्किंग और अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो जाती हैं।निगम और पुलिस के संयुक्त अभियान से अब ऐसे कब्जाधारियों पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अभियान के दौरान सड़क और फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए लगातार निगरानी भी की जाएगी।एक तरफ कार्रवाई, दूसरी तरफ सवाल भीशहर में अतिक्रमण हटाने की मुहिम नई नहीं है। निगम का रिमूवल अमला समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन कार्रवाई के कुछ समय बाद ही कई स्थानों पर फिर कब्जे हो जाते हैं। ऐसे में इस बार सबसे बड़ी चुनौती अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा न होने देना होगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि फुटपाथ वास्तव में पैदल राहगीरों के लिए हैं, लेकिन दुकानों के विस्तार और अस्थायी बाजारों के कारण इनका उपयोग मुश्किल होता जा रहा है। यदि निगम और पुलिस अभियान को बिना भेदभाव और लगातार जारी रखते हैं तो शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार हो सकता है।अब देखना होगा अभियान कितना असरदार रहता हैनिगम और पुलिस के संयुक्त अभियान की असली परीक्षा कार्रवाई के बाद होगी। सवाल यह है कि क्या केवल सामान जब्त करने और अतिक्रमण हटाने तक कार्रवाई सीमित रहेगी या बार-बार कब्जा करने वालों पर स्थायी और प्रभावी कार्रवाई भी होगी। शहरवासियों की नजर अब इस अभियान पर टिकी है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन संगठन की मजबूती और सामाजिक न्याय को लेकर युवा कांग्रेस की बैठक, अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन अब्या प्रोडक्शन ने किया लक्ष्मीकांत प्यारेलाल थीम पर स्पेशल सिंगिंग शो का भव्य आयोजन