2014 से 2026 तक महंगाई का सफर: रसोई से लेकर परिवार के बजट तक बढ़ता बोझ
रामस्वरूप मंत्री
महासचिव, समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश

महंगाई केवल आंकड़ों का विषय नहीं है। महंगाई उस परिवार की चिंता है, जो महीने की शुरुआत में राशन की सूची बनाता है और महीने के अंत में यह सोचने को मजबूर हो जाता है कि अगले महीने खर्च कैसे चलेगा। आज जब हम 2014 में मोदी जी के सत्तारूड होने से से  लेकर 2025 और फिर अगस्त 2026 तक रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के दामों को देखते हैं, तो तस्वीर साफ दिखाई देती है कि आम आदमी की रसोई का खर्च लगातार बढ़ा है।

2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद से देश के आम नागरिक के जीवन पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। महंगाई ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है, वहीं रोजगार के अवसरों में कमी और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं और मध्यमवर्ग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री, रसोई गैस और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों का जीवन लगातार कठिन होता जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2014 में अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतों में चावल करीब ₹27.08 किलो, गेहूं ₹20.81, आटा ₹22.94, अरहर दाल ₹69.92, चीनी ₹36.12, सरसों तेल ₹97.38 और सोया तेल ₹85.46 किलो था।

आज, 24 अगस्त 2026 के उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों में चावल ₹46.05, गेहूं ₹31.46, आटा ₹37.30, अरहर दाल ₹123.93, चीनी ₹63.05, सरसों तेल ₹200.20 और सोया तेल ₹165.02 किलो पहुंच चुके हैं।

जरूरी वस्तुओं के दामों की तुलना
वस्तु 2014 2025 2026 2014 से 2026 बढ़ोतरी
चावल ₹27.08 ₹41.63 ₹46.05 करीब 70%
गेहूं ₹20.81 ₹31.69 ₹31.46 करीब 51%
आटा ₹22.94 ₹37.07 ₹37.30 करीब 63%
चना दाल ₹47.96 ₹85.80 ₹87.46 करीब 82%
अरहर दाल ₹69.92 ₹114.80 ₹123.93 करीब 77%
उड़द दाल ₹66.78 ₹113.55 ₹122.36 करीब 83%
मूंग दाल ₹87.76 ₹109.32 ₹112.17 करीब 28%
मसूर दाल ₹63.04 ₹87.76 ₹90.50 करीब 44%
चीनी ₹36.12 ₹45.87 ₹63.05 करीब 75%
सरसों तेल ₹97.38 ₹188.59 ₹200.20 करीब 106%
सोया तेल ₹85.46 ₹147.29 ₹165.02 करीब 93%
मूंगफली तेल ₹121.61 ₹187.31 ₹207.91 करीब 71%
पाम तेल ₹71.56 ₹131.47 ₹149.22 करीब 109%
गुड़ ₹39.12 ₹55.69 ₹65.81 करीब 68%
नमक ₹14.24 — ₹22.19 करीब 56%
2014 के आंकड़े सरकारी संसदीय रिकॉर्ड में दर्ज अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतों से लिए गए हैं, जबकि 2025 और 2026 के आंकड़े उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी तंत्र से हैं। वस्तुओं की गुणवत्ता/किस्म और बाजार केंद्र अलग होने के कारण वास्तविक स्थानीय कीमतें इन औसत दरों से अलग हो सकती हैं।

सबसे ज्यादा असर खाद्य तेल पर
महंगाई की सबसे बड़ी तस्वीर खाद्य तेल में दिखाई देती है। 2014 में सरसों तेल की औसत कीमत करीब ₹97.38 किलो थी, जो अगस्त 2026 में ₹200.20 तक पहुंच गई है। यानी कीमत लगभग दोगुने से भी अधिक हो गई।

सोया तेल भी करीब ₹85.46 से बढ़कर ₹165.02 और पाम तेल ₹71.56 से बढ़कर ₹149.22 हो गया है। यह वृद्धि केवल रसोई के एक सामान की कीमत नहीं बढ़ाती, बल्कि घर में बनने वाली लगभग हर सब्जी और भोजन की लागत पर असर डालती है।

चीनी की कीमत में भी तेज उछाल
2014 में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब ₹36.12 किलो था। 2025 में यह करीब ₹45.87 था, लेकिन अगस्त 2026 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह ₹63.05 किलो तक पहुंच गया है। यानी पिछले एक साल में ही इसमें लगभग 37 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती है।

हाल की रिपोर्टों में भी चीनी, प्याज, खाद्य तेल और दालों की कीमतों में तेजी की ओर ध्यान दिलाया गया है।

दाल आम आदमी की थाली से दूर
दाल भारतीय परिवार के भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन अरहर, उड़द और चना जैसी दालों की कीमतें बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर सीधा असर पड़ता है।

अरहर दाल 2014 के करीब ₹70 से बढ़कर आज लगभग ₹124 किलो हो गई है। उड़द दाल भी लगभग ₹67 से बढ़कर ₹122 किलो और चना दाल करीब ₹48 से बढ़कर ₹87 किलो तक पहुंच गई है।

इसका अर्थ यह है कि जिस परिवार के राशन बजट में दाल के लिए पहले जितनी रकम निर्धारित थी, उसी मात्रा की दाल खरीदने के लिए आज उसे काफी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

एक साल में भी राहत नहीं
महंगाई की चिंता केवल 2014 और 2026 के बीच की तुलना से नहीं समझी जा सकती। पिछले एक साल के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं।

24 अगस्त 2025 से 24 अगस्त 2026 के बीच सरकारी आंकड़ों में चीनी करीब ₹45.87 से ₹63.05, अरहर दाल ₹114.80 से ₹123.93, सरसों तेल ₹188.59 से ₹200.20, सोया तेल ₹147.29 से ₹165.02 और सूरजमुखी तेल ₹160.60 से ₹191.65 हुआ है।

इसका मतलब है कि महंगाई का दबाव खत्म नहीं हुआ है। कुछ वस्तुओं के दाम घटते-बढ़ते रहते हैं, लेकिन परिवार की कुल रसोई लागत पर लगातार दबाव बना हुआ है।

केवल वेतन बढ़ना पर्याप्त नहीं
सरकारें जब विकास और आय बढ़ने की बात करती हैं तो यह देखना भी जरूरी है कि आम आदमी की वास्तविक क्रय शक्ति कितनी बढ़ी है।

यदि किसी कर्मचारी की आय बढ़ती है, लेकिन उसी अवधि में भोजन, तेल, दाल, दूध, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन और किराये का खर्च उससे अधिक गति से बढ़ता है, तो उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती।

आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि आम परिवार की आय और आवश्यक खर्च के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है।

समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश का स्पष्ट मत है कि महंगाई को केवल बाजार की ताकतों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर प्रभावी निगरानी करनी चाहिए, जमाखोरी और कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत करना चाहिए।

किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले और उपभोक्ता को उचित कीमत पर खाद्य सामग्री मिले—नीति ऐसी होनी चाहिए कि किसान और उपभोक्ता दोनों सुरक्षित रहें। बिचौलियों और अनियंत्रित मुनाफाखोरी का बोझ आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।

सरकार को खाद्य तेलों में आयात पर अत्यधिक निर्भरता कम करने, दलहन उत्पादन बढ़ाने और घरेलू कृषि उत्पादन को मजबूत करने की दीर्घकालीन नीति बनानी होगी। खाद्य तेलों में भारत की आयात निर्भरता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण आर्थिक चुनौती रही है।

महंगाई पर जवाबदेही जरूरी
2014 से आज तक के आंकड़े यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि आम आदमी की रसोई का बजट कितना बढ़ गया है। सरसों तेल, सोया तेल और पाम तेल जैसी वस्तुओं में कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, जबकि चीनी, चावल, आटा और कई दालों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है।

महंगाई को केवल प्रतिशत के आंकड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी है।

समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें महंगाई पर ठोस और तत्काल कदम उठाएं। राशन की कीमतें नियंत्रित हों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली का दायरा और गुणवत्ता बढ़े, किसानों को लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य मिले और उपभोक्ताओं को राहत मिले।

आज जरूरत इस बात की है कि सरकार महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने, आम नागरिक की आय बढ़ाने और परिवारों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए। जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि सस्ती रसोई, पर्याप्त रोजगार और सम्मानजनक जीवन की वास्तविक गारंटी चाहिए।

जनता को भाषण नहीं, सस्ती रसोई और सम्मानजनक जीवन चाहिए। यही महंगाई के खिलाफ वास्तविक नीति की कसौटी होनी चाहिए।

— रामस्वरूप मंत्री
महासचिव, समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश
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