इंदौर। युवाओं में नशे की लत और उससे जुड़ी अपराध प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए इंदौर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘वर्दी से जागी नई उम्मीद’ के तहत नशा-प्रभावित युवाओं एवं नाबालिगों के लिए विशेष जागरूकता और काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 50 युवाओं ने नशा छोड़कर स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का संकल्प लिया।पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर संतोष कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जोन-03 पुलिस द्वारा 22 अगस्त को रीगल स्क्वेयर स्थित कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को नशामुक्ति, उपचार और पुनर्वास की जानकारी देना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-03 ओमप्रकाश ने की। इस दौरान सहायक पुलिस आयुक्त संयोगितागंज नीति राजेश दंडोतिया, थाना प्रभारी संयोगितागंज केपी सिंह यादव, थाना प्रभारी पलासिया सुरेंद्र रघुवंशी और थाना प्रभारी छोटी ग्वालटोली संजू कामले सहित पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की मनोवैज्ञानिक डॉ. निवृत्ति मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। मनोवैज्ञानिकों ने युवाओं से व्यक्तिगत संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा और नशामुक्त जीवन, पुनर्वास तथा सामाजिक जीवन में वापसी को लेकर परामर्श दिया।क्लिनिकल साइकोलॉजी के विद्यार्थियों ने नशे और सामाजिक बुराइयों के दुष्परिणामों पर आधारित स्किट प्रस्तुत की। इसके अलावा ‘मत सुनो’, ‘आनंद’ और ‘पसंद’ नामक लघु फिल्मों का प्रदर्शन कर युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।काउंसलिंग के दौरान गलत संगति, परिवार में नशे का वातावरण, आर्थिक एवं पारिवारिक समस्याएं, सामाजिक परिवेश, अभिभावकों का पर्याप्त ध्यान न मिलना, जिज्ञासा और उद्देश्यहीनता जैसे कारणों पर चर्चा की गई। युवाओं को सकारात्मक सोच, अच्छे मित्रों की संगति, परिवार से संवाद तथा शिक्षा और रोजगार के माध्यम से जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया गया।निःशुल्क काउंसलिंग और उपचार की सुविधाइंदौर पुलिस के अनुसार ‘वर्दी से जागी नई उम्मीद’ अभियान का उद्देश्य केवल नशे से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को संवेदनशीलता के साथ समझना और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है। अभियान के तहत नशा छोड़ने के इच्छुक युवाओं को निःशुल्क काउंसलिंग, नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की जानकारी तथा आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।कार्यक्रम में युवाओं को संदेश दिया गया कि जीवन की एक गलती भविष्य का अंत नहीं है। परिवार का सहयोग, सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर नई शुरुआत की जा सकती है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रील बनाना पड़ा भारी, सड़क पर लेटकर वीडियो बनाने वाली युवती पर केस पलासिया चौराहे पर ‘गोरिल्ला’ ने संभाली ट्रैफिक की कमान, अनोखे अंदाज में समझाया सड़क सुरक्षा का महत्व
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