– पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विशेष अदालत के आदेश में गंभीर प्रक्रियात्मक कमियां पाई गईं – हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया: जांच प्रक्रिया में कानून के दायरे से बाहर जाकर आदेश जारी किया गया ग्वालियर। प्रदीप चौधरी। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी और तत्कालीन DIG राजेश सिंह चंदेल, तत्कालीन SP और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक शिकायत में विशेष न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने चार अलग-अलग याचिकाओं (MCRC नंबर 23019/2026, 23024/2026, 24578/2026 और 26742/2026) पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। क्या था मामला? थाना थाटीपुर, ग्वालियर में दर्ज एक नौकरी घोटाले के मामले (अपराध क्रमांक 787/2023) में आरोपी अनूप राणा नामक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जांच अधिकारी अजय सिंह सिकरवार और अन्य पुलिस कर्मियों ने उन्हें झूठे मामलों और एनकाउंटर की धमकी देकर 5.80 लाख रुपये और अन्य राशियां वसूली थीं। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप था कि वरिष्ठ अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया और थाने की CCTV फुटेज को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायालय (MPDVPK अधिनियम) ने 11 मई 2026 को DIG राजेश सिंह चंदेल, सुरेंद्र नाथ सिंह यादव, अजय सिंह सिकरवार और संतोष वर्मा के खिलाफ IPC की धारा 392 (डकैती/लूट), 201 (साक्ष्य मिटाना), 120-B (आपराधिक षड्यंत्र) और MPDVPK अधिनियम की धाराओं में संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत की शुरुआती प्रक्रिया (Cr.P.C. की धारा 200/202) के तहत विशेष न्यायालय का दायरा केवल यह देखना होता है कि मामला आगे बढ़ाने लायक है या नहीं। न्यायालय इस स्तर पर ‘मिनी-ट्रायल’ (गहन विचार-विमर्श या अंतिम निष्कर्ष) नहीं चला सकता। प्रक्रियात्मक त्रुटि (BNSS 2023 का पालन नहीं): अदालत ने पाया कि नए कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023’ की धारा 223 के तहत लोक सेवकों के खिलाफ कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर और विभागीय रिपोर्ट की आवश्यकता होती है, जिसका पालन नहीं किया गया। CCTV फुटेज पर निष्कर्ष: महज CCTV फुटेज उपलब्ध न होने के आधार पर आपराधिक षड्यंत्र या साक्ष्य मिटाने का सीधा निष्कर्ष निकालना कानूनी रूप से सही नहीं है। आदेश हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय, ग्वालियर द्वारा पारित 11 मई 2026 के संज्ञान आदेश और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों/समन को पूरी तरह रद्द कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि मूल अपराध (थाटीपुर थाना मामला क्रमांक 787/2023) में चल रही स्वतंत्र कानूनी कार्रवाई इस आदेश से प्रभावित नहीं होगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा का बड़ा एक्शन, जिला संगठन तत्काल प्रभाव से भंग वीर सपूत को सलाम या सियासत को प्रणाम? मेजर हमजा आरिफ की अंतिम विदाई पर नेताओं की चुप्पी ने खड़े किए सवाल