नई दिल्ली / भोपाल:सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुयन ने देश में लगातार सिकुड़ते असहमति के अधिकार (Right to Dissent) और अभिव्यक्ति की आजादी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शनिवार को नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU), भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारों और असहमति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने अदालतों के मौजूदा कामकाज और ज़मानत देने की शर्तों पर भी बेहद अहम और तीखी टिप्पणियां कीं। जस्टिस उज्ज्वल भुयन के भाषण की प्रमुख बातें: छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और विरोध का अधिकार: “अपने कैंपस में विरोध करने वाले स्टूडेंट्स को गिरफ़्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30-30, 40-40 दिन तक ज़मानत नहीं मिलती। उन्हें निलंबित कर दिया जाता है और फिर उन्हें अदालत जाना पड़ता है, जिसमें काफी समय लगता है।” ज़मानत की शर्तों पर अदालतों को नसीहत:“अब अदालतें ज़मानत देते समय ऐसी शर्तें लगा रही हैं, जो व्यावहारिक रूप से व्यक्ति की असहमति जताने की आज़ादी पर रोक लगा देती हैं।” पर्यावरण और वैध गतिविधियों को अपराध बनाना:“दुर्भाग्य से अब वैध गतिविधियों को भी अपराध बना दिया जाता है। पर्यावरण के बिगड़ते हालात एक सच्चाई हैं और उसके ख़िलाफ़ अपनी पीड़ा ज़ाहिर करने वाले लोगों को ऐसे खदेड़ा जाता है, जैसे वे अपराधी हों।” गैर-जरूरी गिरफ्तारियों पर उदाहरण:“मुझे पूरा यक़ीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। गंगा नदी पर चिकन खाने से रोकने वाला कोई क़ानून नहीं है। सिर्फ़ इसी वजह से उन्हें गिरफ़्तार किया गया और उन्हें तीन महीने जेल में रहना पड़ा।” क्यों चर्चा में है यह बयान? जस्टिस भुयन की ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और अदालतों द्वारा ज़मानत देने की प्रक्रियाओं को लेकर बहस जारी है। सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान जज द्वारा छात्रों के अधिकारों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और अदालती शर्तों पर बेबाक राय रखना कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अन्नपूर्णा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 11 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ दो तस्कर गिरफ्तार प्लास्टर का खेल या पुलिस का मेल? वायरल वीडियो ने हीरानगर पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल