इंदौर। प्रदीप चौधरी। इंदौर नगर निगम के चर्चित नामांतरण घोटाले ने केवल अनियमितताओं का मामला नहीं उठाया है, बल्कि ई-गवर्नेंस प्रणाली की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने स्वीकार किया है कि ई-नगरपालिका पोर्टल में ओटीपी जैसी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी और अधिकारियों की लॉगिन आईडी का उपयोग कर नामांतरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। मामले की तकनीकी जांच के लिए दो आईटी विशेषज्ञों को भी जांच दल में शामिल किया गया है। आयुक्त ने कहा कि जांच केवल सतही स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस किसी की भी संलिप्तता सामने आएगी, उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।इस मामले ने नगर निगम की डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लाखों नागरिकों की संपत्तियों से जुड़ी ऑनलाइन व्यवस्था में यदि पर्याप्त सुरक्षा तंत्र नहीं था, तो यह भविष्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन का कहना है कि अब तकनीकी खामियों को दूर करने और सिस्टम को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है।शहर की नजर अब केवल जांच पर नहीं, बल्कि उसके परिणामों पर टिकी है। यदि इस प्रकरण के जरिए जवाबदेही तय होती है और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाया जाता है, तो यह मामला प्रशासनिक सुधार की मिसाल बन सकता है। वहीं, यदि कार्रवाई सीमित दायरे में सिमट गई, तो यह घोटाला जनता के भरोसे पर गहरी चोट के रूप में याद किया जाएगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, 5 हजार सब्सक्राइबर वाले अवैध IPTV नेटवर्क का भंडाफोड़ भोपाल में 19 पटवारियों के कार्यक्षेत्र बदले, कलेक्टर ने जारी किए आदेश