लोकतंत्र में असहमति भी देशभक्ति है, लेकिन क्या सत्ता और विपक्ष दोनों इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं?नई दिल्ली। अंकुल प्रताप सिंह, बघेल…लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय लोगों के हितों की आवाज़ बन चुके सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर अनशन पर हैं। उनका आंदोलन केवल लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या देश में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलनों को पर्याप्त गंभीरता से सुना जा रहा है।यदि कोई व्यक्ति बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक भूख हड़ताल पर बैठा है, तो यह केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। ऐसे आंदोलनों पर सरकार का संवाद और समाज का ध्यान दोनों अपेक्षित होते हैं।देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे अनेक गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। स्वाभाविक है कि आम नागरिक इन विषयों पर जवाबदेही की अपेक्षा करता है। लोकतंत्र की सफलता इसी में है कि सरकार जनता के सवालों का उत्तर दे और रचनात्मक संवाद बनाए रखे।यह भी विचारणीय है कि केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष की भी लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति जिम्मेदारी होती है। यदि कोई जन आंदोलन राष्ट्रीय महत्व का बन रहा है, तो सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को उससे संवाद स्थापित करना चाहिए। लोकतंत्र में जनहित के मुद्दे दलगत राजनीति से ऊपर होने चाहिए।सोनम वांगचुक का आंदोलन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज भी शांतिपूर्ण आंदोलन सत्ता और समाज का ध्यान आकर्षित करने का प्रभावी माध्यम हैं, या वे शोर-शराबे और राजनीतिक विमर्श के बीच दबते जा रहे हैं।लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि जनता की आवाज़ सुनने, संवाद करने और संवेदनशीलता से निर्णय लेने की संस्कृति से मजबूत होता है। इसलिए आवश्यक है कि ऐसे आंदोलनों को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के दृष्टिकोण से देखा जाए। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बालाघाट में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान का शुभारंभ, 15 से 30 जुलाई तक चलेगा जनजागरूकता अभियान 7 वर्ष की मासूम बच्चियों को हबस का शिकार बनाने वाले आरोपी को न्यायालय से मिली ऐतिहासिक सजा