सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक परिहार की सेवा समाप्त, दो से अधिक संतान नियम पर फिर छिड़ी बहसभोपाल/सिंगरौली। मध्यप्रदेश में दो से अधिक संतान वाले शासकीय कर्मचारियों से जुड़े नियमों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में प्रस्तावित प्रतिबंध को निरस्त करने की घोषणा के महज 48 घंटे बाद सिंगरौली में पदस्थ उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान होने के आधार पर शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।जानकारी के अनुसार, अशोक परिहार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था। शिकायत की जांच के लिए गठित समिति ने दस्तावेजों की जांच के बाद आरोपों की पुष्टि की। रिपोर्ट के आधार पर मामला पंजीयन विभाग और महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय भोपाल भेजा गया।जांच पूरी होने के बाद महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए अशोक परिहार की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई वर्तमान में प्रभावी नियमों के आधार पर की गई है।जांच के दौरान अशोक परिहार ने विभाग को दिए जवाब में कहा कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारी द्वारा सेवा नियमों की जानकारी नहीं होने का दावा मान्य नहीं माना जा सकता।इस कार्रवाई को लेकर विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस मसौदा प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले अभ्यर्थियों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव शामिल था। मुख्यमंत्री ने उक्त ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा था।हालांकि पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अभी तक इस विषय में कोई नई अधिसूचना या संशोधित नियम लागू नहीं हुए हैं। जब तक शासन की ओर से औपचारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक विभागों को वर्तमान नियमों का पालन करना होगा। इसी आधार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है।गौरतलब है कि 10 मार्च 2000 की अधिसूचना के अनुसार जिन व्यक्तियों की दो से अधिक जीवित संतान हैं और जिनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वे शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माने जाते। जांच में पाया गया कि अशोक परिहार की तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा और विभागीय कार्रवाई के बीच उत्पन्न विरोधाभास के कारण मामला आगे कानूनी रूप ले सकता है। अशोक परिहार के पास विभागीय अपील और हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का विकल्प मौजूद है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस नियम को लेकर आगे क्या फैसला लेती है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस की छापेमारी से बंगाल की राजनीति गरमाई ‘बिल में छुपे सपोलों को पकड़ने में समर्थ है हमारी पुलिस’: सीएम मोहन यादव