जबलपुर। स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर उपचार न मिलने पर मरीज की जान तक जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक आने पर हर मिनट मस्तिष्क की लगभग 19 लाख कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। ऐसे में शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत इलाज बेहद जरूरी है।स्ट्रोक अवेयरनेस मंथ के अवसर पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनुपम साहनी ने लोगों से जागरूक रहने और B.E. F.A.S.T. फॉर्मूले को याद रखने की अपील की है, ताकि समय रहते मरीज को उपचार मिल सके।B.E. F.A.S.T. फॉर्मूला क्या है?B – Balance (संतुलन)अचानक चलने में परेशानी होना या शरीर का संतुलन बिगड़ जाना।E – Eyes (आंखें)एक या दोनों आंखों से अचानक धुंधला दिखना या नजर कम होना।F – Face Drooping (चेहरा लटकना)मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा या नीचे लटका दिखाई देना।A – Arm Weakness (बाजू में कमजोरी)दोनों हाथ उठाने पर एक हाथ का नीचे गिर जाना या कमजोरी महसूस होना।S – Speech Difficulty (बोलने में परेशानी)आवाज लड़खड़ाना या स्पष्ट रूप से बोलने में कठिनाई होना।T – Time to Call (तुरंत मदद लें)इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।डॉ. साहनी ने बताया कि स्ट्रोक के इलाज में शुरुआती कुछ घंटे ‘गोल्डन ऑवर’ माने जाते हैं। इस दौरान सही उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है और गंभीर नुकसान से भी बचाव संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार या अंधविश्वास में समय न गंवाएं।विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही स्ट्रोक से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। समय पर सही कदम उठाकर किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।डॉ. अनुपम साहनीन्यूरोलॉजिस्ट, बेस्ट सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, जबलपुरसंपर्क : 7999702984 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन ईदुल अजहा से पहले इंदौर में पुलिस का फ्लैग मार्च, शांति का दिया संदेश गांधी मेडिकल कॉलेज में जातिगत प्रताड़ना के आरोप, एससी आयोग में शिकायत