छतरपुर। जिले को कृषि-औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। खजुराहो के समीप 30 से 35 एकड़ भूमि पर करीब 310 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत कृषि प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में सिंगापुर की कंपनी निवेश के साथ तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेगी। परियोजना के लिए शासन द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है।सिंगापुर निवासी भारतवंशी उद्योगपति सुरेश अग्रवाल ने बताया कि संयंत्र में तीन आधुनिक इकाइयां एक साथ संचालित होंगी। इसमें 8 मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता वाला जैवभार पेलेट प्लांट कृषि अवशेष से प्रतिवर्ष 64 हजार मीट्रिक टन पेलेट तैयार करेगा। इसके अलावा 1.2 मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता की निर्जलित आलू चूरा इकाई तथा 2 मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता की फ्रेंच फ्राइज उत्पादन इकाई स्थापित की जाएगी।उन्होंने बताया कि तीनों इकाइयां एक-दूसरे की ऊर्जा और अपशिष्ट का उपयोग करेंगी, जिससे उत्पादन लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आएगी। परियोजना के पूर्ण होने पर करीब 2,500 लोगों को प्रत्यक्ष तथा 10 हजार से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही सालाना 211 से 310 करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।परियोजना का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्रीय किसानों को मिलने की उम्मीद है। मध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन होता है। अनुबंध खेती और कृषि अवशेष की खरीद के माध्यम से किसानों की आय में 20 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।सुरेश अग्रवाल ने बताया कि संयंत्र ‘शून्य अपशिष्ट मॉडल’ पर आधारित होगा। आलू के छिलके और कटाई से निकलने वाले अवशेषों का उपयोग जैवभार संयंत्र में ईंधन के रूप में किया जाएगा। इसी ऊर्जा से आलू चूरा और फ्रेंच फ्राइज को सुखाने की प्रक्रिया पूरी होगी। इससे प्रतिवर्ष लगभग 32 हजार मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी तथा पराली जलाने जैसी समस्या पर भी नियंत्रण मिलेगा।उन्होंने बताया कि छतरपुर-खजुराहो क्षेत्र को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां भूमि, पानी, बिजली और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही मध्यप्रदेश औद्योगिक नीति-2021 एवं कृषि निर्यात नीति के तहत एकल खिड़की मंजूरी और वित्तीय प्रोत्साहन मिलने की संभावना भी है। भूमि आवंटन के बाद आवश्यक मंजूरियां मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।इस परियोजना से न केवल छतरपुर बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को कृषि प्रसंस्करण एवं निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। उद्योग के आने से सहायक उद्योगों के विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन पीटीसी इंदौर में नवागत पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह ने संभाला पदभार मध्यप्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल, पंचायत विभाग में अधिकारियों के तबादले