इंदौर/फॉलो-अप न्यूज़ आर्टिकल… Kind Regards,Dr. James Pal मध्यप्रदेश में 26 अप्रैल से 10 मई तक चलाए जा रहे हेलमेट चेकिंग विशेष अभियान ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर पूरे प्रदेश में दोपहिया चालकों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है—बिना हेलमेट पकड़े जाने पर न सिर्फ चालान बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई की जा रही है।प्रशासन का तर्क स्पष्ट है—बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 50% मौतें दोपहिया चालकों की होती हैं, जिनमें अधिकतर ने हेलमेट नहीं पहना होता। ऐसे में सख्ती को जरूरी बताया जा रहा है।लेकिन इसी सख्ती के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ आम नागरिकों की है?जुर्माने की सूची लंबी, लेकिन जवाबदेही कहाँ?जहां एक ओर बिना हेलमेट, नो-पार्किंग, नो-एंट्री, मोबाइल उपयोग, बीमा और प्रदूषण जैसे नियमों पर हजारों रुपये के जुर्माने तय हैं, वहीं शहर की मूलभूत समस्याओं पर कोई स्पष्ट जवाबदेही नजर नहीं आती।खराब ट्रैफिक सिग्नल — जिम्मेदार कौन?सड़कों पर गड्ढे — जवाबदेही किसकी?अतिक्रमित फुटपाथ — कार्रवाई क्यों नहीं?स्ट्रीट लाइट्स का अभाव — कौन देखेगा?खुले मेनहोल और खुदी सड़कें — जिम्मेदार कौन?आवारा पशु और कचरे से भरी सड़कें — किसकी निगरानी?इन मुद्दों पर नागरिकों में गहरा असंतोष है।जनता में बढ़ता आक्रोशशहरवासियों का कहना है कि प्रशासन का फोकस केवल चालान वसूली तक सीमित होता जा रहा है। इंदौर जैसे शहर में, जहां कई क्षेत्रों में यातायात धीमा और भीड़भाड़ वाला है, वहां हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।कई नागरिकों का मानना है कि बायपास और रिंग रोड जैसे हाई-स्पीड क्षेत्रों में हेलमेट बेहद जरूरी है, लेकिन अंदरूनी सड़कों पर इसे राजस्व वसूली के रूप में देखा जा रहा है।अतिक्रमण पर ‘सेटिंग’ का आरोपसबसे बड़ा मुद्दा फुटपाथ और सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण है। शहर के कई हिस्सों में फुटपाथों पर ठेले, दुकानें और अस्थायी ढांचे खुलेआम चल रहे हैं, जिससे पैदल चलना और ट्रैफिक दोनों प्रभावित होते हैं।नागरिकों का आरोप है कि इन अतिक्रमणों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि नियमों का पालन करने वाले आम नागरिकों पर सख्ती दिखाई जाती है।प्रशासन का पक्षपुलिस और प्रशासन का कहना है कि सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हेलमेट अभियान का उद्देश्य केवल लोगों की जान बचाना है, न कि राजस्व बढ़ाना। साथ ही, जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग नियमों को समझें और अपनाएं।मूल सवाल बना हुआ है..?सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है—लेकिन जब सिस्टम की खामियां बनी रहें और केवल नागरिकों पर कार्रवाई हो, तो संतुलन बिगड़ता नजर आता है।क्या आने वाले समय में प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उतनी ही सख्ती दिखाएगा जितनी जनता से अपेक्षा की जा रही है? यही सवाल आज इंदौर ही नहीं, पूरे प्रदेश में गूंज रहा है। View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जूनी इंदौर पुलिस की बड़ी सफलता: शातिर वाहन चोर गिरफ्तार, 4 चोरी की गाड़ियां बरामद मध्यप्रदेश विधानसभा में गूंजा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना