इंदौर। अंकुल प्रताप सिंह, बघेल, बेबाक कलम । एक समय स्वच्छता और शांति के लिए मशहूर इंदौर अब छोटी-छोटी बातों पर चाकूबाजी की घटनाओं से जूझ रहा है। वर्ष 2025-2026 के दौरान शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चाकूबाजी के दर्जनों मामले सामने आए, जिनमें कई मामलों में मौत भी हुई। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परदेशीपुरा, आजाद नगर, चंदन नगर, विजयनगर, तिलक नगर, सांयोगिता गंज, द्वारकापुरी और एमआईजी थाना क्षेत्र जैसे इलाकों में बार-बार ऐसी घटनाएं हुईं। आंकड़े और वास्तविकता2025-26 में इंदौर पुलिस की आधिकारिक समग्र रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन थानों में दर्ज मामलों और मीडिया खबरों से साफ है कि चाकूबाजी की घटनाएं कई दर्जन तक पहुंच गई हैं। कई बार एक ही रात या सप्ताह में दो-तीन घटनाएं दर्ज हुईं। दिसंबर 2025, आजाद नगर: शराब दुकान के पास मामूली विवाद में एक युवक की चाकू से हत्या। तीन नाबालिग (15-16 वर्ष) आरोपी, उनमें से दो गिरफ्तार। आरोपी नशे के आदि बताए गए। – जुलाई 2025, चंदन नगर: आठवीं क्लास के छात्र पर चाकू से हमला, अस्पताल में मौत। नवंबर 2025, एमआईजी थाना क्षेत्र: देवउठनी ग्यारस की रात पुरानी रंजिश में 17 वर्षीय नाबालिग अमन की चाकू से हत्या। फरवरी 2026, द्वारकापुरी: घूरकर देखने के विवाद में दो पक्षों में चाकूबाजी, दो घायल। पांच नाबालिग और दो बालिग शामिल। अप्रैल 2025: रोड रेज में एक युवक की हत्या में सात नाबालिग समेत नौ आरोपी गिरफ्तार। अप्रैल 2026 : में एक पिता को उसके 8 साल के बच्चे के सामने चाकू से हत्या की, कारण सिर्फ बाइक का स्टैण्ड टक्कर. इंदौर हत्याकांड: 6 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपियों के नाम आए सामनेइंदौर। हीरा नगर थाना क्षेत्र में बेटे के सामने पिता की हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपियों में आशीष राजपूत, आकाश और विवेक (साथियों सहित) के नाम सामने आए हैं।पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी आशीष और आकाश घटना के बाद फरार होकर सागर के पास ग्राम बिनाका में अपने रिश्तेदार के यहां छिप गए थे, जहां से पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार किया। मामले में कुल 6 आरोपी हैं, जिनमें 3 वयस्क और 3 नाबालिग शामिल बताए जा रहे हैं।जांच में यह भी सामने आया है कि सभी आरोपी नशे के आदी हैं और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। इन घटनाओं में नाबालिगों की भागीदारी सबसे चिंताजनक है। कई मामलों में 2 से 7 नाबालिग शामिल पाए गए। पुलिस ने बार-बार 2-4 नाबालिगों को गिरफ्तार किया है। नशे का घातक सायाअधिकांश आरोपी 16 से 22 वर्ष के युवा हैं, जिनमें 60% से ज्यादा नशे के आदि बताए जा रहे हैं। ब्राउन शुगर, सिंथेटिक ड्रग्स, शराब और नई नशीली चीजें आसानी से उपलब्ध हैं। नशे की लत पहले छोटी चोरियां, फिर हिंसक अपराध और चाकूबाजी तक ले जाती है। कई गिरफ्तार युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता नशे ने प्रभावित कर दी होती है। घर-परिवार की कमजोरी और शिक्षा की कमी इस चक्र को और मजबूत करती है। किन बातों पर हो रही चाकूबाजी?ज्यादातर घटनाएं बेहद मामूली कारणों से शुरू होती हैं: घूरकर देखना या रास्ता रोकना गाड़ी टकराना (रोड रेज) शराब दुकान या जश्न के दौरान कहासुनी पुरानी रंजिश या प्रेम संबंध सोशल मीडिया पर इगो क्लैश या इलाके में दबदबा बनाने की होड़ इस्तेमाल होने वाले चाकू साधारण किचन वाले नहीं, बल्कि बेहद तेज धार वाले, मेडिकल टूल्स जैसी शार्पनेस वाले और आसानी से छिपाए जा सकने वाले होते हैं। हमला इतना तेज होता है कि बचाव का मौका ही नहीं मिलता। ‘दुर्लभ कश्यप’ सिंड्रोम का प्रभावकई नाबालिग और युवा सोशल मीडिया पर गैंगस्टर इमेज बनाने की कोशिश करते हैं। उज्जैन के दिवंगत गैंगस्टर दुर्लभ कश्यप को अपना रोल मॉडल मानने वाले युवा भी सामने आए हैं। वे डर पैदा करने, दबदबा बनाने और आसान पैसे की लालच में जुर्म की दुनिया में कदम रखते हैं। लेकिन अपराध की राह का अंत हमेशा दर्दनाक होता है – जैसा दुर्लभ कश्यप के साथ हुआ। शहर की बदलती तस्वीरइंदौर अब केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बाहर से आने वालों के लिए भी असुरक्षित महसूस हो रहा है। लोग कहते हैं – “पहले ऐसा नहीं था। अब छोटी-सी बात पर चाकू निकल आता है। डर का माहौल बन गया है।” पुलिस की कोशिशेंइंदौर पुलिस लगातार नशा विरोधी अभियान, बदमाशों की धरपकड़, संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग और 24 घंटे के अंदर कार्रवाई कर रही है। फिर भी नशे पर पूर्ण अंकुश नहीं लग पा रहा। बाजार में नए-नए नशीले पदार्थ आ रहे हैं और सोशल मीडिया का ग्लैमर युवाओं को प्रभावित कर रहा है। चेतावनी का समयअगर इस ट्रेंड पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई तो इंसान का जीवन मुर्गी जैसा बन जाएगा – हर छोटी बात पर खूनी संघर्ष। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने, नाबालिगों पर विशेष निगरानी, सख्त कानून लागू करने, परिवार-समाज की जिम्मेदारी बढ़ाने और शिक्षा-रोजगार के अवसर पैदा करने की सख्त जरूरत है। इंदौर – फिर से जागो!नशा और चाकू दोनों बदनाम हैं। पूरा शहर प्रभावित है, लेकिन सबसे ज्यादा नाबालिग और युवा पीढ़ी। सवाल हर इंदौरी से है – क्या हम अपने शहर को फिर से सुरक्षित और शांत बना पाएंगे? View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस में एसीपी रैंकिंग जारी: मल्हारगंज टॉप, संयोगितागंज सबसे पीछे बड़नगर में नशामुक्ति अभियान के तहत तीसरी बड़ी कार्रवाई, 1 किलो से अधिक गांजा के साथ आरोपी गिरफ्तार