नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026 नये वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगाई के हल्के उछाल और दूध की बढ़ती कीमतों के साथ हुई है। फरवरी 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जनवरी के 2.74 प्रतिशत से काफी बढ़ोतरी है। यह 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। खाद्य महंगाई 3.47 प्रतिशत तक चढ़ गई। सब्जियों में कुछ राहत के बावजूद दूध, रेस्टोरेंट और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें उपभोक्ताओं को परेशान कर रही हैं। दूध के रेट में उछाल: आमजन पर नया झटकादूध की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। मदर डेयरी और अमूल जैसी कंपनियों ने उत्पादन लागत (चारा, ईंधन और गर्मी के प्रभाव) बढ़ने के कारण ₹2 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की। कई राज्यों में ताजा दूध के दाम भी ₹2-3 प्रति लीटर ऊपर चढ़ गए हैं। किसानों को थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह रोजमर्रा की महंगाई का सबसे बड़ा बोझ साबित हो रहा है। बैंकिंग सेक्टर में आज बड़ा बदलाव1 अप्रैल से नये वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ कई बैंक शाखाएं वार्षिक खाता बंदी के कारण बंद हैं। हालांकि ATM, UPI और नेट बैंकिंग सामान्य रहेंगी। महत्वपूर्ण बदलाव: UPI और कार्ड पेमेंट पर 2FA (दो-तरफा प्रमाणीकरण) अनिवार्य। कुछ बैंकों में ATM निकासी पर अतिरिक्त चार्ज (₹23 प्रति ट्रांजेक्शन)। FASTag वार्षिक पास की कीमत ₹3,075 हो गई। कुछ बैंकों (जैसे PNB) में डेबिट कार्ड पर दैनिक निकासी सीमा घटाई गई। नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू, TDS फॉर्म अपडेट। ये बदलाव रोजमर्रा की बैंकिंग को प्रभावित करेंगे। View this post on Instagram बिजनेस और अर्थव्यवस्था: मजबूत रफ्तारव्यवसायिक मोर्चे पर अच्छी खबर है। FY26 के लिए GDP ग्रोथ 7.4-7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मैन्युफैक्चरिंग, खपत और निर्यात मजबूत हैं। गोल्डमैन सैक्स ने 2026 में 6.9 प्रतिशत ग्रोथ का पूर्वानुमान लगाया है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। रोजगार में सुधार, लेकिन महंगाई के साथ इनकम बढ़ी?फरवरी 2026 में बेरोजगारी दर घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई (जनवरी में 5 प्रतिशत)। शहरी-ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार भागीदारी स्थिर है। छोटे व्यवसायों ने लाखों नौकरियां दी हैं। हालांकि महंगाई (3.21%) के मुकाबले रियल वेतन वृद्धि सीमित है। नियमित नौकरियों में वेतन महंगाई के साथ पूरी तरह नहीं बढ़ पा रहा, जबकि कैजुअल कामगारों की स्थिति बेहतर हुई है। युवाओं और मध्यम वर्ग पर अभी भी दबाव है। निष्कर्ष क्यानये वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगाई के उछाल, दूध की बढ़ती कीमतों और बैंकिंग नियमों के बदलाव के साथ हुई है। अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव और रोजगार वृद्धि से उम्मीद है, लेकिन आम उपभोक्ता को खाद्य महंगाई से राहत का इंतजार है। सरकार और RBI अब मार्च के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन घर के बाहर खेल रहे बच्चे पर चढ़ी कार, CCTV में कैद घटना तथ्य छुपाने पर हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता पर 1 लाख का जुर्माना