वार – मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए मुस्लिम और अरब देशों से एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य गठबंधन बनाने की अपील की है, जिसमें अमेरिका और इजरायल की कोई भूमिका न हो। तेहरान की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब क्षेत्र में जंग अपने पांचवें सप्ताह में पहुंच चुकी है और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।ईरान के खात्म अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफघारी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि अब समय आ गया है कि मिडिल ईस्ट के देश अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालें। उन्होंने “हजारों किलोमीटर दूर बैठी ताकतों” पर निशाना साधते हुए अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि इन देशों ने हमेशा क्षेत्र का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी ने इस इलाके को आखिर क्या दिया।ईरान ने प्रस्ताव रखा है कि पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक “रीजनल सिक्योरिटी और मिलिट्री यूनियन” बनाई जाए, जिसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा, बाहरी हस्तक्षेप को रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना होगा। खास बात यह है कि इस सुरक्षा ढांचे को इस्लाम और कुरान की मूल भावना पर आधारित करने की बात कही गई है, यानी धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को इसकी नींव बनाया जाएगा।तेहरान ने अपने बयान में 1967 और 1973 के अरब-इजरायल युद्धों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अरब देशों में एकजुटता की कमी के कारण पराजय हुई थी। इसलिए अब मुस्लिम देशों को मिलकर अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।विशेषज्ञों के अनुसार ईरान का यह प्रस्ताव सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। हालिया संघर्ष में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है, खासकर उन देशों में जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।ईरान की कोशिश खुद को इस्लामिक दुनिया के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने की भी मानी जा रही है। हालांकि खाड़ी देशों के अमेरिका के साथ मजबूत सैन्य और आर्थिक संबंधों को देखते हुए यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस प्रस्ताव पर कितना समर्थन देंगे।फिलहाल इतना तय है कि ईरान अब केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय हो गया है। यदि ऐसा कोई गठबंधन बनता है, तो मिडिल ईस्ट की राजनीति और शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भगत सिंह : ‘विद्वान-क्रांतिकारी’ की विरासत और छात्र राजनीति की प्रासंगिकता मध्य प्रदेश में बिजली महंगी: 1 अप्रैल से 4.80% बढ़ेंगी दरें, नए टैरिफ लागू