नई दिल्ली, 15 मार्च 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों की जांच प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि पुलिस चार्जशीट दाखिल करने के बाद अपनी मर्जी से आगे की जांच (Further Investigation) शुरू नहीं कर सकती। इसके लिए संबंधित अदालत से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। न्यायमूर्ति की पीठ ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(8) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193(9) का हवाला देते हुए कहा कि आगे की जांच शुरू करने से पहले पुलिस को अदालत के समक्ष ठोस कारण बताना होगा। इसमें यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि मामले में कौन से नए तथ्य या साक्ष्य सामने आए हैं और क्यों आगे की जांच आवश्यक है। अदालत इस आधार पर ही अनुमति देगी या अस्वीकार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जोर दिया कि बिना न्यायिक निगरानी के आगे की जांच शुरू करने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अभियुक्तों के मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है। कोर्ट का मानना है कि जांच एजेंसियों पर अदालत की निगरानी रखना जरूरी है ताकि जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। यह फैसला उन सभी मामलों पर लागू होगा जहां चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और पुलिस बाद में नए साक्ष्य या तथ्यों के आधार पर आगे की जांच करना चाहती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से पुलिस की मनमानी पर लगाम लगेगी और न्याय व्यवस्था और मजबूत होगी।फैसले का स्वागत करते हुए कई वकीलों और मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि इससे अभियुक्तों को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा। अब सभी पुलिस और जांच एजेंसियों को इस नए दिशानिर्देश का सख्ती से पालन करना View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर: प्रेमानंद महाराज के प्रभाव में घर छोड़कर लापता हुआ 15 वर्षीय किशोर गुप्तकाशी से सुरक्षित बरामद इंदौर पुलिस की सफलता से शहर में राहत की सांस