इंदौर : प्रदीप चौधरी। दो गंभीर मामले दर्ज, फिर भी नौकरी कैसे? वेरिफिकेशन की लापरवाही या साठगांठ? विवेक जयसवाल (पिता : राजेश जयसवाल) इंदौर। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव (MY) हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्डों के इंचार्ज पद पर तैनात विवेक जयसवाल के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब उनके पुलिस रिकॉर्ड सामने आए। सवाल उठ रहा है कि इतने संवेदनशील पद पर अपराधी को बिना पुलिस वेरिफिकेशन के कैसे रखा गया? क्या अस्पताल प्रशासन अंधा है या कोई साठगांठ चल रही है? विवेक जयसवाल (पिता : राजेश जयसवाल) के दो अलग-अलग पुलिस रिकॉर्ड कुछ इस प्रकार हैं :आबकारी अधिनियम का मामलाअपराध संख्या : 989/2018पंजीकरण तिथि : 17 सितंबर 2018, दोपहर 2:48 बजेधारा : मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2)थाना : भवांगंगा, इंदौर अर्बनउम्र उस समय : 24 वर्षपता : 426, गोविंद कॉलोनी, भवांगंगा, इंदौरआयुष अधिनियम का मामलाअपराध संख्या : 798/2014पंजीकरण तिथि : 8 अक्टूबर 2014, शाम 6:10 बजेधारा : आयुष अधिनियम 1959 की धारा 25थाना : एरोड्रोम, इंदौर अर्बनउम्र उस समय : 22 वर्षपता : 426, गोविंद कॉलोनी, इंदौर दोनों मामलों में पता लगभग एक ही है और पिता का नाम भी समान। यानी एक ही व्यक्ति। MY हॉस्पिटल जैसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जहां हजारों मरीज, डॉक्टर और स्टाफ आते-जाते हैं, वहां सुरक्षा इंचार्ज का पद संभालने वाला व्यक्ति खुद दो आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। सुरक्षा इंचार्ज का काम सिर्फ गार्डों को कमांड करना नहीं है, बल्कि अस्पताल की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी है। ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कैसे किया जा सकता है? सरकारी नौकरी या संवेदनशील पदों पर पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है। क्या MY हॉस्पिटल प्रशासन ने यह वेरिफिकेशन कराया था? अगर नहीं, तो यह लापरवाही किस स्तर की है? और अगर कराया था तो भी अपराधी को कैसे नियुक्त किया गया? क्या अस्पताल अधीक्षक को इसकी जानकारी नहीं थी?स्थानीय नागरिकों और अस्पताल स्टाफ में इस खुलासे से गुस्सा है। एक व्यक्ति ने कहा, “इतने बड़े अस्पताल में अपराधी सुरक्षा इंचार्ज बनकर घूम रहा है, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या भरोसा?” अब देखना यह है कि MY हॉस्पिटल प्रशासन और इंदौर पुलिस इस मामले में क्या कार्यवाही करती है। क्या विवेक जयसवाल को तुरंत हटाया जाएगा? क्या वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया की जांच होगी? और क्या साठगांठ के आरोपों की भी जांच होगी?यह मामला न सिर्फ MY हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे इंदौर में सरकारी अस्पतालों में नियुक्तियों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।अब प्रशासन और पुलिस की बारी है — कार्रवाई हो या फिर यह भी दबा दिया जाए? View this post on Instagram View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन नीतीश की विदाई या जदयू का सफाया जनजातीय अंचल के विकास के लिए स्वास्थ्य जागरूकता और आधुनिक कृषि को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक -राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल