भोपाल, प्रदीप चौधरी : मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली क्षेत्र में अदानी ग्रुप के कोल ब्लॉक से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए सदन का ध्यान आकर्षित किया। इस मुद्दे पर विपक्ष ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की, जिस पर हंगामा बढ़ने के बाद विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में कहा कि अदानी ग्रुप के धिरौली कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। कलेक्टर की आधिकारिक सूची के अनुसार इस परियोजना से कुल 12,998 परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें अधिकांश आदिवासी समुदाय के हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों को पूर्ण और उचित मुआवजा नहीं दिया गया है तथा मुआवजा वितरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं।सिंघार ने आगे कहा कि यह परियोजना आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने पर्यावरणीय नियमों, वन संरक्षण अधिनियम और पेसा कानून के कथित उल्लंघन का भी जिक्र किया तथा मांग की कि इसकी निष्पक्ष जांच के लिए JPC का गठन किया जाए।विपक्ष के इस रुख पर सदन में तीखी बहस हुई। सरकार पक्ष ने आरोपों का खंडन किया, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा। JPC गठन की मांग ठुकराए जाने पर कांग्रेस सहित विपक्षी विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।यह मामला पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में है, जहां धिरौली कोल ब्लॉक के लिए बड़े पैमाने पर वृक्ष कटाई और आदिवासी विस्थापन के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इसे बार-बार राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है, जिसमें पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का दावा किया गया है।विपक्ष का कहना है कि प्रभावित परिवारों को उनका हक दिलाने और अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है, जबकि सरकार परियोजना को विकास परियोजना बताकर इसका बचाव करती रही है। इस घटना से विधानसभा में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन गलगोटिया प्रकरण: भारत की भद्द पिटने का जिम्मेदार कौन? कूनो के चीतों की ‘शाही’ खुराक: एक साल में 1.27 करोड़ का बकरी मटन खा गए, रोजाना 35 हजार का खर्च; विधानसभा में सरकार का खुलासा