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दुर्घटनाओं के आंकड़े: शहरी इलाके में बिना हेलमेट सबसे ज्यादा खतरा

एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर की एक हालिया स्टडी (अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024) के अनुसार, शहर में सड़क दुर्घटनाओं में 300 मौतें हुईं, जिनमें से 198 दोपहिया वाहन चालक थे। इनमें से 164 चालक बिना हेलमेट के थे, जबकि केवल 34 ने हेलमेट पहना था। यह स्टडी शहर के शहरी इलाकों पर केंद्रित है, जहां दोपहिया वाहनों की संख्या करीब 10 लाख है और 70% से ज्यादा चालक हेलमेट नहीं पहनते। जनवरी से जून 2025 के आंकड़ों में भी दोपहिया चालकों की मौतों में 50% और घायलों में 70% हिस्सा बिना हेलमेट वालों का था।

हाईवे पर स्थिति और भी गंभीर है। मध्य प्रदेश में 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर जिले में हाईवे दुर्घटनाओं में 4,893 हादसे हुए, जिनमें 658 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से ज्यादातर दोपहिया वाहन शामिल थे, और 75% मौतें बिना हेलमेट के कारण हुईं। आईआईटी मद्रास की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में सालाना 14,000 मौतों में 53% दोपहिया चालकों की हैं, और 75% मामलों में हेलमेट की कमी जिम्मेदार है। राष्ट्रीय स्तर पर 2023 में 54,568 दोपहिया चालकों की मौत हुई, जिनमें 39,160 ड्राइवर और 15,408 पैसेंजर बिना हेलमेट के थे।

हेलमेट से अपराध की आशंका: नकाबपोशी का खतरा

हेलमेट की अनिवार्यता से सुरक्षा बढ़ रही है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ शहरी इलाकों में नकाबपोशी अपराध बढ़ने की चिंता जता रहे हैं। हेलमेट चेहरे को ढकने का काम करता है, जो अपराधियों के लिए ‘मास्क कार्ड’ जैसा साबित हो सकता है। 2015 में इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने पुरुष चालकों पर चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाया था, और 60 से ज्यादा चालान काटे गए थे। हालिया रिपोर्ट्स में हालांकि स्पष्ट वृद्धि नहीं दिखी, लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा है कि हेलमेट से चेन स्नैचिंग और अन्य अपराध आसान हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों पर नजर रखी जा रही है, लेकिन हेलमेट नियम अपराध रोकथाम से ज्यादा सुरक्षा पर फोकस्ड है।

मध्यम वर्ग पर जुर्माने का बोझ: 10-12 हजार कमाने वाले क्या करें?

इंदौर में बिना हेलमेट चालन पर 1,000 रुपये का जुर्माना है, जो मध्यम वर्ग के लिए बड़ा खर्च साबित हो रहा है। एक व्यक्ति जो मासिक 10-12 हजार रुपये कमाता है, उसके लिए यह राशि दैनिक जरूरतों पर असर डालती है। रेडिट और सोशल मीडिया पर लोग शिकायत कर रहे हैं कि ट्रैफिक कैमरे सड़कों की मरम्मत से ज्यादा तेज काम करते हैं, जबकि फुटपाथ, सिग्नल और गलत साइड ड्राइविंग पर ध्यान नहीं दिया जाता। एक यूजर ने लिखा, “मध्यम वर्ग को ही निशाना बनाया जाता है, जबकि पुलिस खुद हेलमेट नहीं पहनती।”

प्रशासन का रवैया चालान पर केंद्रित लगता है, खासकर मार्च के नजदीक आते ही। 2023-2024 में राज्य में 15 लाख हेलमेट-रहित चालकों से 44 करोड़ रुपये वसूले गए। इंदौर में एक दिन में 2,000 से ज्यादा चालान काटे गए, और ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम से लाइसेंस सस्पेंड होने का खतरा भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुर्माना जीवन रक्षा के लिए है, लेकिन जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं।

शहर का ट्रैफिक सिर्फ चलता है 20-30 के स्पीड से ज्यादा नहीं…

शहर के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार इतनी कम है कि कई लोग हेलमेट को अनावश्यक मानते हैं। हालिया रिपोर्ट्स और आम लोगों की शिकायतों के अनुसार, इंदौर के मुख्य चौराहों और बाजार क्षेत्रों में औसत स्पीड 15-20 किमी/घंटा से ज्यादा नहीं होती, जबकि दिन के समय जाम में तो 10-15 किमी/घंटा तक सिमट जाती है। एक वकील ने कहा, “शहर की सड़कों पर जहां औसत स्पीड 20 किमी/घंटा से कम है, वहां हेलमेट हाईवे के लिए ज्यादा जरूरी लगता है।” AI-पावर्ड ट्रैफिक सिस्टम और मेट्रो के शुरू होने से कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल ज्यादातर जगहों पर वाहन ‘चलते’ हैं, ‘दौड़ते’ नहीं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुझाव

ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “हेलमेट से सिर की चोट 69% और मौत का खतरा 42% कम होता है। हमारा उद्देश्य सजा नहीं, सुरक्षा है।” लेकिन आम लोग मांग कर रहे हैं कि जुर्माने के साथ-साथ सस्ते हेलमेट वितरण और सड़क सुधार पर फोकस किया जाए। क्या यह नियम जीवन बचाएंगे या सिर्फ राजस्व बढ़ाएंगे? यह समय बताएगा, लेकिन फिलहाल इंदौर की सड़कें बहस का केंद्र बनी हुई हैं।

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By NEWS NATIONAL WORLD

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