गणतंत्र दिवस पर विशेष — मुस्ताअली बोहराअधिवक्ता एवं लेखकभोपाललहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर,भारत का ही नाम होगा सबकी ज़ुबान पर।ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर, कोई जो उठाएगा आंख हिन्दुस्तान पर। भारतीय सेना और उसके जांबाज़ सैनिकों की बदौलत ही तो दुनिया भर में आज भारत का डंका बज रहा है। कभी जिन देशों को महाशक्ति के रूप में देखा जाता था वो देश भी आज भारत की सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकि और सैन्य ताकत के आगे नतमस्तक हैं। भारत की सैन्य शक्ति दुनिया में चैथे नंबर पर है। भारत के पास 14.50 लाख के करीब सक्रिय सैनिक, 11.50 लाख के आसपास रिजर्व सैनिक, 25 लाख से ज्यादा अर्धसैनिक बल है। ब्रम्होस मिसाइल, परमाणु पनडुब्बियां, आईएनएस विक्रमादित्य, आईएनएस विक्रांत, टी 90 टैंक, भीष्म टैंक, अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, होवित्जर तोपें, पिनाका राॅकेट, लड़ाकू विमान, आधुनिक एयरक्राफ्ट, विमान वाहक पोत, बख्तरबंद वाहन हैं। कुल मिलाकर जल-थल-नभ सभी जगह भारत की सैन्य ताकत बेमिसाल है। वित्त वर्ष 2026 के लिए 79 बिलियन से ज्याद का रक्षा बजट है। भारतीय सेना के जांबाज जवान ना सिर्फ देश को बाहरी सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि देश के भीतर भी जरूरत पड़ने पर अपने साहस और पराक्रम का परिचय देते हैं। भारतीय सेना केवल सैनिकों का समूह नहीं है वरन यह भारत के शौर्य, पराक्रम, साहस, बलिदान और गौरव का प्रतीक है। यह वह जवान है जो देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, आपदाओं में राहत पहुंचाते हैं और देश के बाहर विदेशी सरजमीन पर भी शांति कायम करने में अपना योगदान देते हैं। सेना के जवान अपना घर-परिवार छोड़कर देश की सेवा में जुटे रहते हैं। वे धर्म-जाति की परवाह किए बिना सबकी रक्षा करते हैं। हमारे सैनिक ही सच्चे नायक हैं। भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय जल सेना भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाती हैं। भारतीय सेना में पुरुष और महिला सैनिकों को समान महत्व और अवसर दिए जाते हैं। पिछले करीब एक दशक में भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। भारतीय सेना में करीब दस हजार महिलाएं कार्यरत हैं। उन्हें सेना के कई विभागों में स्थायी कमीशन दिया जा रहा है। भारतीय सेना में महिलाओं ने अपना शौर्य और काबलियत साबित की है, इसकी मिसाल आॅपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया देख ही चुकी है। भारतीय सेना को अतिआधुनिक हथियार उपलब्ध कराने के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन करीब डेढ़ दर्जन पीएसयू कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान वैमानिकी लिमिटेड, भारत वैद्युतिकी लिमिटेड, भारत भूचालक लिमिटेड, भारत गतिकी लिमिटेड, मझगांव डाॅक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, जीआएसई सहित अन्य पीएसयू के जरिए उन्नत स्वदेशी हथियारों का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका, फ्रांस, रूस, इजराइल सहित कुछेक अन्य देशों से भी सैन्य उपकरणों की खरीद की जाती है। आजादी के बाद से अब तक भारतीय सेना ने पाँच बड़े युद्ध लड़े हैं, जिनमें से चार पाकिस्तान के साथ और एक चीन के साथ था। इन चारों युद्धों में भारत ने पाकिस्तान को करारी हार दी। भारतीय सशस्त्र बल कई प्रमुख सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा है। भारतीय सेना केवल भारत की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा ही नहीं करती या सिर्फ जंग ही नहीं लड़ती बल्कि शांति स्थापना और मानवीय सहायता में भी अहम अपनी भूमिका निभाती है। इन युद्धों के अलावा भारतीय सेना ने देश-विदेश में मानवीय राहत कार्यों और शांति स्थापना के लिए कई अभियान चलाए हैं। इनमें से कुछ शांति अभियान लेबनान, अंगोला, कंबोडिया, वियतनाम और कई अन्य देशों में चलाए गए थे। सन 1947, 1965 और सन 1971 का भारत-पाक युद्ध, पुर्तगाल-भारत युद्ध, भारत-चीन युद्ध, सन 1967 नाथू ला और चो ला संघर्ष, सन 1987 का भारत-चीन संघर्ष, कारगिल युद्ध, और सियाचिन विवाद में भारतीय सेना अपना जौहर दिखा चुकी है। हाल ही में सिंदूर ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य ताकत पूरी दुनिया ने देखी। इसके अलावा भारतीय सेना ने कई आपरेशंस में भी शिरकत की। इसमें दो ऑपरेशन ऐसे भी हैं जब भारत ने हैदराबाद और गोवा को भारत राष्ट्र में विलय करा लिया।सन 1947 में आजादी के लगभग तुरंत बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पैदा हो गया। इसी युद्ध के बाद कश्मीर का भारत में विलय हो गया। श्रीनगर भेजी गई भारतीय सेना में तब जनरल थिमैया भी शामिल थे। 1947-48 के युद्ध को कश्मीर युद्ध के रूप में जाना जाता है। स्वतंत्रता के तुरंत बाद, पाकिस्तान समर्थित कबायलियों द्वारा कश्मीर पर आक्रमण कर दिया गया था, भारतीय सेना की ये पहली बड़ी जंग थी, जिसमें उसने अपनी संप्रभुता की रक्षा की। सन 1965 में भारत-पाकिस्तान का दूसरी बार आमना सामना हुआ। पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ के प्रयास का भारतीय सेना ने जवाब दिया। इस युद्ध में टैंकों की लड़ाई और वायु सेना ने अपनी अहमियत दुनिया को बता दी थी। यह युद्ध पाकिस्तान के ऑपरेशन जिब्रॉल्टर के साथ शुरू हुआ। पाकिस्तान की योजना जम्मू कश्मीर में सेना भेजकर वहां भारतीय शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू करने की थी। इसके जवाब में भारत ने भी पश्चिमी पाकिस्तान पर सैन्य हमले शुरू कर दिए। सत्रह दिनों तक चले इस युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए। आखिरकार सोवियत संघ और संयुक्त राज्य द्वारा राजनयिक हस्तक्षेप करने के बाद युद्धविराम घोषित किया गया। वर्ष 1966 में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किये। सन 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) यह भारतीय सेना के सबसे अहम युद्धों में से एक था। 13 दिनों के भीतर, भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश अस्तित्व में आया। यह इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था, जिसमें लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में यह एक रणनीतिक जीत थी। सन 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच ये तीसरा युद्ध हुआ था। ये युद्ध दो मोर्चों पर लड़ा गया। भारतीय सेनाएं पूर्वी पाकिस्तान में पहुंची, जहां उन्होंने पाकिस्तान के इस हिस्से में उनकी सेनाओं को हराकर बांग्लादेश के नाम से नये देश को जन्म दिया। दूसरा मोर्चा लोंगेवाला और इसके आसपास की सीमा पर खुला। कम सैनिकों के बाद भी भारतीय सेना जीत हासिल करने में कामयाब रही। सन 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच तीसरी बार जंग हुई जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान ने कारगिल की ऊंची चोटियों पर अवैध कब्जा कर लिया था, इसके फौरन बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत जवाबी कार्रवाई की। कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडे, ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव जैसे वीरों ने सर्वोच्च बलिदान देकर इन चोटियों को वापस हासिल किया और पाकिस्तान पर विजय हासिल की। सन 1962 का भारत-चीन युद्ध भारत के लिए चुनौतीपूर्ण था। भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद बहादुरी दिखाई। रेजांग ला में मेजर शैतान सिंह और उनके जवानों का बलिदान आज भी याद किया जाता है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने थाग ला रिज पर भारतीय सेनाओं के ठिकानों पर हमला बोल दिया। 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों ने दोनों मोर्चों उत्तर-पश्चिम और सीमा के उत्तर-पूर्वी भागों में भारत पर हमला किया। अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के कुछेक हिस्सों पर कब्जा कर लिया। बाद में चीन ने एकतरफा युद्धविराम घोषित कर अरुणाचल प्रदेश से अपनी सेना वापस बुला ली। इसी तरह यहां ऑपरेशन पोलो का जिक्र करना लाजमी होगा। भारत के विभाजन के बाद राजसी राज्य हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए आपरेशन पोलो को अंजाम दिया गया। 12 सितम्बर 1948 को भारतीय सेना की टुकड़ियां हैदराबाद पहुंची। पांच दिन के बाद हैदराबाद की सेनाओं ने हथियार डाल दिया। हैदराबाद को भारत गणराज्य का भाग घोषित कर दिया गया। ऐसी ही एक जंग थी ऑपरेशन विजय। ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा औपनिवेशिक अधिकार खत्म करने के बाद भी गोवा, दमन और दीव में पुर्तगालियों का शासन जारी था। 12 दिसम्बर 1961 को ऑपरेशन विजय शुरू हुआ। भारतीय सेना के एक दल को पुर्तगालियों पर हमले के आदेश दिए गए। दो दिन से ज्यादा चले युद्ध के बाद गोवा और दमन और दीव को आजाद कराकर उसका भारत में विलय करा दिया। जंग और भारतीय सेना के पराक्रम की बात हो और आॅपरेशन सिंदूर की बात ना हो ऐसा भला कैसे हो सकता है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों को आतंकियों ने गोली मार दी। इस तरह के हमले से जाहिर हो गया था कि पाकिस्तान ना सिर्फ आतंकवाद को पोषित कर रहा है बल्कि अब सामाजिक उन्माद बिगड़ना चाहता और भारतीय समाज में नफरत फैलाना चाहता था। इस हमले की जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकियों के कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया ऑपरेशन सिंदूर। ऑपरेशन सिन्दूर भारतीय सशस्त्र सेनाओं द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में किए गए सैन्य हवाई अभियान का कोडनेम था। इसका मकसद पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढाँचे को निशाना बनाना था। भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त रणनीति ने 6 मई 2025 की रात को पाकिस्तान के भीतर 9 प्रमुख आतंकवादी ठिकानों पर जोरदार हमला किया। यह हमले न केवल लाइन ऑफ कंट्रोल के पास स्थित आतंकी लॉन्च पैड्स पर किए गए, बल्कि पाकिस्तान के भीतरी हिस्सों में भी उन ठिकानों को टारगेट किया गया जो लंबे समय से आतंक की फैक्टरी बने हुए थे। ऑपरेशन सिंदूर के तहत बहावलपुर-जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय, मुरीदके लश्कर-ए-तैयबा का आधार स्थल, जो 2008 मुंबई हमले से जुड़ा रहा है। गुलपुर-नियंत्रण रेखा के पास स्थित वह अड्डा, जहां से 2023-24 के हमलों की योजना बनी। सावाई-जहां से तीर्थयात्रियों पर हमलों की साजिश रची गई। बिलाल-जैश का प्रमुख लॉन्चपैड। कोटली-हिजबुल मुजाहिदीन की उपस्थिति वाला अड्डा। बरनाला, सरजाला और महसुन्ता-आतंकी ट्रेनिंग और लॉन्चिंग सेंटर। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए इन ठिकानों को ध्वस्त किया गया। भारत ने पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकाने या आम नागरिकों के रहवासी क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया। खास बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ और सभी सैनिक सुरक्षित वापस लौटे।भारतीय सेना की असली ताकत उसके जवान और अधिकारी हैं। ये पराक्रम, देशभक्ति, समर्पण, बलिदान की ऐसी मिसाल हैं जो हर वक्त देश के भीतर और बाहर मुस्तैदी से डटे रहते हैं। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ अपनी नेतृत्व क्षमता, हास्यबोध और सैनिकों के प्रति गहरे सम्मान के लिए जाने जाते हैं। 1971 के युद्ध में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद को मरणोपरांत देश के शीर्ष सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया था। परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र जैसे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले अनगिनत सैनिक और अफसर जैसे परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा (पहले परमवीर चक्र विजेता), सूबेदार जोगिंदर सिंह, मेजर शैतान सिंह, लांस नायक अल्बर्ट एक्का, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडे, ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव और राइफलमैन संजय कुमार आदि भारतीय क्षितिज के ऐसे दैदिप्यमान सितारे हैं जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।——– अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत दुनिया का सबसे ताकतवर देश है। भारत के पास विशाल सेना है, जो आर्मी, नेवी और एयर फोर्स तीन भागों में बंटी है। ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2025 में अमेरिका नंबर वन पर है। अमेरिका के बाद रूस दूसरे और चीन तीसरे नंबर पर है। भारतीय सेना की आर्मी, एयरफोर्स और नेवी तीनों अत्याधुनिक और घातक हथियारों से लैस हैं। फाइटर प्लेन, मिसाइल, वॉर शिप, विदेशों से आयात हथियार और स्वदेशी विकसित हथियार, लेजर डिफेंस सिस्टम तो हैं ही साथ ही भारत परमाणु हथियार संपन्न देश भी है। अमेरिका के पास 2127500 सैनिक, 13043 से ज्यादा विमान और साढ़े चार हजार से ज्यादा टैंक हैं। अमेरिका के फाइटर प्लेन और मिसाइल टेक्नोलॉजी काफी उन्नत है। अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर रूस है। उसके पास 3570000 सैन्यकर्मी, 4292 एयरक्राफ्ट और 5750 टैंक हैं। चीन तीसरे नंबर पर और भारत को चौथे स्थान पर रखा गया है।——— भारतीय सेना की ताकत भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। भारतीय सेना में रेजिमेंटल प्रणाली है, जिसमें भर्ती होने वाला सैनिक आमतौर पर अपना पूरा करियर रेजिमेंट में ही बिताता है। ये रेजिमेंट है जैसे गोरखा रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, पैराशूट रेजिमेंट और ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स आदि। भौगोलिक स्थिति और परिचालन के आधार पर, इन्हें सात कमांडों में विभाजित किया गया है, ये हैं सेना प्रशिक्षण कमांड, केंद्रीय कमांड, पूर्वी कमांड, उत्तरी कमांड, दक्षिणी कमांड, दक्षिण पश्चिमी कमांड और पश्चिमी कमांड। भारतीय सेना के पास करीब 14.50 लाख सक्रिय जवान, 11.55 लाख रिजर्व सैनिक, 25 लाख से ज्यादा अर्धसैनिक बल के जवान, 4730 टैंक, करीब डेढ़ लाख आर्मर्ड व्हीकल हैं। सेना के पास 100 स्वचालित तोपें और 4260 तावी तोपें भी हैं। इसके अतिरिक्त, 374 रॉकेट लॉन्चर हैं। 100 सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी और 3975 खींच कर ले जाने वाली आर्टिलरी है। इसके अलावा मल्टी बैरल रॉकेट आर्टिलरी की संख्या 264 है। भारतीय एयरफोर्स के पास 3 लाख 10 हजार वायु सैनिक और राफेल-सुखोई जैसे 513 फाइटर जेट समेत कुल 2229 विमान हैं जिनमें 600 लड़ाकू विमान, 899 हेलीकाॅप्टर, 831 सपोर्ट एयरक्राफ्ट और 270 ट्रांसपोर्ट विमान हैं। कुल विमानों में 130 हमला करने वाले, 351 ट्रेनर और छह टैंकर फ्लीट के विमान हैं। भारत के प्रमुख लड़ाकू विमानों में राफेल, एसयू-30 एमकेआई, मिराज, मिग-29 तेजस है। मिसाइल प्रणाली की बात करें तो रुद्रम, अस्त्र, निर्भय, ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम है। भारतीय सेना के तीनों अंगों के पास कुल हेलीकॉप्टरों की संख्या 899 है जिनमें 80 अटैक हेलीकॉप्टर हैं। भारतीय नेवी के पास 142251 नौ सैनिक, कुल 293 पोत हैं जिनमें दो विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य, 13 डिस्ट्रॉयर, 14 फ्रिगेट्स, 18 सबमरीन और 18 कॉर्वेट्स युद्धपोत हैं। इसके अलावा भारत के पास 150 युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। 50 से अधिक जहाज निर्माणाधीन हैं इसके अलावा टोही और पनडुब्बी रोधी विमान, जैसे पी-8आई, एम60आर हेलीकॉप्टर भी हैं। लॉजिस्टिक्स के तौर पर भारतीय सेना के पास 311 एयरपोर्ट्स, 56 बंदरगाह और 63 लाख किलोमीटर की सड़क और 65 हजार किलोमीटर की रेलवे कवरेज है। भारतीय सेना के पास सभी प्रकार के युद्धक टैंक, परमाणु मिसाइलें, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें, सेना विमानन कोर के हेलीकॉप्टर और अन्य कई हथियार हैं।यहां बता दें कि भारत की जमीनी सीमा पाकिस्तान, चाइना, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार समेत कुल 7 देशों के साथ लगती है। भारत की कुल जमीनी सीमा 15106.7 किलोमीटर लंबी है और तट रेखा 7516.6 किलोमीटर है, जिसमें द्वीप क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत का सबसे लंबा बॉर्डर (जमीनी बॉर्डर) बांग्लादेश के साथ लगता है। इसकी लंबाई लगभग 4,096 किलोमीटर है। भारत के कुल पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से बांग्लादेश की सीमाएं लगतीं हैं। इसमें पश्चिम बंगाल के साथ बांग्लादेश सबसे लंबी सीमा साझा करता है। मालूम हो कि भारत-बांग्लादेश की सीमा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी जमीनी सीमा है। इसी तरह भारत की जलीय सीमा श्रीलंका, मालदीव, थाईलैंड, इंडोनेशिया के साथ लगती हैं। भारत और पाकिस्तान की सीमा लगभग 3323 किलोमीटर लंबी है। हिन्दुस्तान के जम्मू कश्मीर, राजस्थान, पंजाब और गुजरात से पाकिस्तान की सीमा लगती है। भारत की नेपाल, भूटान और म्यांमार के साथ भी बॉर्डर लगती है। भारत-म्यांमार सीमा की कुल लंबाई 1643 किलोमीटर है। भारत नेपाल के साथ ओपन बॉर्डर शेयर करता है, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से लगता है। वहीं, भूटान के साथ लगा बॉर्डर सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश से लगता है।बहरहाल, भारत हमेशा शांति, संयम और सौहार्द को तवज्जो देता आया है। भारत पंचशील के सिद्धांतों यानि एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान,आक्रामक कार्रवाई से बचना,एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना,समानता और पारस्परिक लाभ की नीति तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करता है। भारत की हमेशा से ही ये कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दयपूर्ण रिश्ते हो, जिन देशों के साथ व्यापारिक-सैन्य-राजनीतिक-सांस्कृतिक संधि है उनके साथ ये संधि बरकरार रहे। बावजूद इसके यदि कोई देश भारत की ओर आंख उठाकर देखने की हिमाकत करता है तो फिर उसे मुंह तोड़ जवाब देने में भी पीछे नहीं रहता। आखिर में बस, भारतीय सेना के सभी जवानों को उनकी बहादुरी, समर्पण और देशभक्ति के लिए सलाम, जो हमारी और देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे देते हैं, …. जयहिंद। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में हेलमेट नियम: सुरक्षा या बोझ? बिना हेलमेट दुर्घटनाओं का बढ़ता आंकड़ा, अपराध की आशंका और मध्यम वर्ग पर जुर्माने का असर ज्ञान की गर्दन और हिंदुत्व की तलवार