सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि वह अपने मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमे को लेकर जल्द फैसला ले. मामला सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह की विवादित टिप्पणी से जुड़ा है. सोमवार (19 जनवरी, 2026) को हुई सुनवाई में एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि उसने राज्य सरकार से मुकदमे के लिए अनुमति मांगी है, लेकिन अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है.चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई कि पिछले साल अगस्त से लेकर अब तक राज्य सरकार ने एसआईटी के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया है. कोर्ट ने सरकार से जल्द निर्णय लेने को कहा. एसआईटी की तरफ से उसके सदस्य आईपीएस कल्याण चक्रवर्ती कोर्ट में पेश हुए थे.पिछले साल पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के प्रवक्ता की भूमिका कर्नल सोफिया ने निभाई थी. कर्नल सोफिया के बारे में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने विवादित बयान दिया था. आरोप है कि शाह ने एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश ने आतंकियों से बदला लेने के लिए ‘आतंकियों की बहन’ को उन्हें खत्म करने को भेजा । विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया था. हाई कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. विजय शाह राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर रोक से मना किया, लेकिन इसका जिम्मा 3 आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी को सौंप दिया. कोर्ट के आदेश पर आईपीएस प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह की 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन हुआ. कोर्ट ने एसआईटी को 13 अगस्त तक जांच पूरी करने को कहा था.सोमवार, 19 जनवरी को हुई सुनवाई में एसआईटी ने बताया कि उसने 19 अगस्त को सरकार से मुकदमे की अनुमति मांगी थी. बीएनएस की धारा 196 (सांप्रदायिक या दूसरे आधारों पर समाज मे वैमनस्य फैलाना) के मामलों में यह अनुमति आवश्यक है. लेकिन अभी तक उसे सरकार से कोई सूचना नहीं मिली है. बेंच ने इस पर असंतोष जताया. कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में विजय शाह के दूसरे आपत्तिजनक बयानों का भी उल्लेख किया गया है. ऐसे मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर भी एसआईटी एक अलग रिपोर्ट दाखिल करे. सुनवाई में शाह की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह पेश हुए. उन्होंने कहा कि शाह ने माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं. इस पर बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड पर कोई औपचारिक माफी उपलब्ध नहीं है. चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है. इससे पहले भी कोर्ट शाह की सार्वजनिक माफी को कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बताते हुए खारिज कर चुका है. पिछले साल जुलाई में हुई सुनवाई में कोर्ट ने मंत्री की तरफ से मांग गई ऑनलाइन माफी पर भी कड़ी नाराजगी जताई थी. View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन नितिन नवीन निर्विरोध चुने गए बीजेपी के अध्यक्ष 45 की उम्र में सबसे बड़ी पार्टी की कमान गुढ़ तहसील में ईओडब्लू की ट्रैप कार्यवाही में 10 हजार की रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर रंगे हाथ गिरफ्तार, प्रभारी तहसीलदार अरुण यादव से की गयी पूछताछ