सीटू यूनियन के बैनर तले लड़ा गया 12 साल पुराना मुकदमा, तीन माह में भुगतान के निर्देशजयपुर, 4 जून। मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) जयपुर में कार्यरत सैकड़ों सफाई कर्मचारियों को बड़ी कानूनी जीत मिली है। केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी) जयपुर ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में एमएनआईटी प्रबंधन को वर्ष 2013 से कार्यरत सभी ठेका सफाई कर्मचारियों का स्थाईकरण करने तथा उन्हें देय समस्त भुगतान तीन माह के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।यह मामला वर्ष 2013 में सीटू (CITU) के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड भंवर सिंह शेखावत के नेतृत्व में श्रम विभाग के समक्ष उठाया गया था। बाद में प्रकरण को केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी) जयपुर को संदर्भित किया गया। करीब 12 वर्षों तक चले इस मुकदमे में सीटू के जिला अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कामरेड सुरेश कश्यप ने श्रमिकों की ओर से पैरवी करते हुए कई महत्वपूर्ण न्यायिक नजीरें प्रस्तुत कीं।न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2013 से एमएनआईटी में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत सभी श्रमिकों को स्थाई किया जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों की सेवा अवधि 10 वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें स्थाई कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते एवं अन्य सभी लाभ वर्ष 2013 से प्रदान किए जाएं। न्यायालय ने अपने आदेश में प्रबंधन के रवैये को “अनफेयर लेबर प्रैक्टिस” करार दिया और कहा कि इस प्रकार के आचरण के लिए श्रम कानूनों में दंड का भी प्रावधान है।फैसले की घोषणा होते ही कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। न्यायालय परिसर के बाहर मिठाइयां बांटी गईं और सीटू के समर्थन में नारे लगाए गए। बाद में कर्मचारी सीटू के राज्य कार्यालय पहुंचे और जीत का जश्न मनाया।इस फैसले पर सीटू के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड भंवर सिंह शेखावत, जिला अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कामरेड सुरेश कश्यप, एमएनआईटी अध्यक्ष अर्जुन लाल, महामंत्री प्रेमचंद गोडिवाल, रोडवेज सीटू नेता किशन सिंह राठौड़, निर्माण यूनियन के जिला महामंत्री विजय सिंह तंवर, महिला नेता मंजू देवी, कॉमरेड विजय बहादुर गौड़, हरेन्द्र सिंह, कुलदीप लखन, कमलेश आमेटा, जितेन्द्र सिंह सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की।सीटू जिला अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कामरेड सुरेश कश्यप ने कहा कि यह फैसला श्रमिक अधिकारों और न्याय की जीत है तथा ठेका मजदूरों के शोषण के खिलाफ एक मील का पत्थर साबित होगा। वहीं सीटू प्रदेश अध्यक्ष कामरेड भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि यह निर्णय देशभर में विभिन्न संस्थानों में कार्यरत ठेका कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा और उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का मार्ग दिखाएगा।कर्मचारियों ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए सीटू संगठन का आभार व्यक्त किया और कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद उन्हें न्याय मिला है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन क्या हमारी विधिक सहायता व्यवस्था अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त कर रही है? मशहूर फिल्म निर्माता और पूर्व सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन