तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला एवं भू अर्जन अधिकारी राजेश शुक्ला के द्वारा किया गया लगभग 900 करोड़ का आर्थिक भ्रष्टाचार- कुँवर सिंह रीवा । सिंगरौली जिले के ईएमआईएल माइनस एंड मिनिरल रिसोर्सेस लिमिटेड को सरई तहसील में आवंटित बंधा कोल ब्लॉक में तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला IAS एवं भू अर्जन अधिकारी राजेश शुक्ला संयुक्त कलेक्टर द्वारा लगभग 900 करोड़ की आर्थिक भ्रष्टाचार करने की जांच कराए जाने एवं कानूनी कार्यवाही हेतु पिछड़ावर्ग राष्ट्रीय समन्वयक व किसान नेता कुँवर सिंह पटेल ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर सिंगरौली के द्वारा 23 दिसंबर 2021 को पत्र क्रमांक 1267 /भू अर्जन/सी/ 2021 मेजर्स ई एम आई एल एंड मिनिरल रिसोर्सेस लिमिटेड को सरई तहसील में आवंटित बंधा कोल ब्लॉक का आवंटन कोयला मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली के आदेश में 03/03/2021 को किया गया उपरोक्त आवंटन भू अर्जन की प्रक्रिया भू अर्जन पुनर्वासन एवं पुनरव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के अनुसार किया गया है। कोल ब्लॉक परियोजनाओं हेतु सामाजिक प्रभाव आकलन एवं सामाजिक प्रभाव प्रबंधन योजना रिपोर्ट का मूल्यांकन विशेषज्ञ समूह द्वारा किया जाना था उपरोक्त आवंटन में बंधा कोल ब्लॉक से प्रभावित भूमिका ग्राम तेंदुहा, पीढरवाह,देवरी, बंधा एवं पचोर में स्थित है उपरोक्त कोल ब्लॉक में 776.01 हेक्टर निजी भूमि एवं 289.4 हेक्टेयर शासकीय भूमि अधिग्रहित किए जाने का आदेश पारित किया गया था प्रक्रिया को आगे बढ़ते हुए कलेक्टर सिंगरौली द्वारा धारा 11 का प्रकाशन वह धारा 12 का प्रकाशन 18 में 2022 से प्रारंभ किया गया, जिसके तहत परिसंपत्तियों का चिंतन एवं मापन तथा रेखांक तैयार करने की कार्यवाही करने का आदेश का जारी कर कर्मचारियों का दल गठित किया गया।कार्यवाही को आगे बढ़ते हुए धारा 20- 7 दिसंबर 2023 को आदेश जारी किया गया, धारा 20 के पक्ष और धारा 21 के नोटिस जारी करने के पूर्व कंपनी की आपत्ति की सुनवाई दिनांक 18/11/2024 और 18/12/2024 को की गई जो अधिनियम में अपबंधित प्रावधानों के विपरीत है आक्षेपों की सुनवाई धारा 15 के अधीन किया जाना चाहिए।जो भू-अर्जन अधिकारी राजेश शुक्ला व जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला आईएएस द्वारा विधि विरुद्ध आदेश जारी किया गया विसंगति का सबसे बड़ा उदाहरण 8/11/2024 को जारी पत्र में उल्लिखित मकान में विसंगति की संख्या 2787 है इसी प्रकार 18/12/ 2024 को जारी आदेश में मकान की संख्या 3491 है जिनमें विसंगति दर्ज की गई है। जबकि वहां रहने वाले गरीब अनुसूचित जनजाति के वन अनुसूचित जाति तथा सामाजिक पिछड़े व्यक्तियों जो अत्यंत गरीब की श्रेणी में आते हैं उनके मकान घरों झुग्गी झोपड़ियां को दरकिनार कर दिया है।इस प्रकार जब कई शिकायतें मेरे द्वारा मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन व प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन राजस्व विभाग को की गई, तो जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला प्रमुख सचिव से मार्गदर्शन हेतु पत्र लिखा गया जिसमें आपत्तियों की जांच संबंधी बातों का उल्लेख किया गया एवं यह बताया गया कि बंधा कोल ब्लॉक में आने वाले पांचो गांव में लगभग 1189 पूर्ण निर्मित मकान की संख्या है निर्माणाधीन मकान की संख्या 4718 इस प्रकार कुल मकान की संख्या 5907 बताई गई।जबकि इसके पूर्व में संयुक्त कलेक्टर जिला सिंगरौली के आदेश दिनांक 08/11/2024 को मूल्यांकन गणना पत्र के की जांच कर कर 2787 मकान में विसंगति पाई गई व निर्माणाधीन बताया गया। इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि ई एम आई एल/2024 दिनांक 28/06/2024 को मेजर्स ई एम आई एल के पत्र में लेख है इसी प्रकार 18/12/2024 को संयुक्त कलेक्टर जिला सिंगरौली के आदेश तथा मेजर्स ई एम आई एल के पत्र क्रमांक 1807/ 2024 में विसंगति पाए गए मकान की संख्या 3491 है। जिसका सत्यापन उपखंड अधिकारी व स्थल निरीक्षण दल गठित किया गया था तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला द्वारा उपरोक्त विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन राजस्व विभाग वल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल को 17 फरवरी 2025 को एक पत्र जारी करके मार्गदर्शन चाहा गया कि भू अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्वव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिनियम 2013 के तहत ग्राम बंधा तहसील बरगमा की भूमियों के अर्जन में कई प्रकार की बढ़ाएं उत्पन्न हो रही है। आश्चर्यजनक बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला द्वारा मार्गदर्शन हेतु प्रमुख सचिव राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया व प्रमुख सचिव राजस्व विभाग के द्वारा बिना किसी मार्गदर्शन प्राप्त हुए दिनांक 01/4/2025 को अवार्ड पारित करके धारा 26 में उल्लेखित प्रावधान कलेक्टर द्वारा भूमि के बाजार मूल्य का उदाहरण में मूल्य के निर्धारण हेतु प्रावधानित निर्देशों का समुचित पालन किए बिना बिक्री छट तैयार की गई और जो राज्य शासन द्वारा निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन में न्यूनतम होने के कारण व अधिकतम मूल्य दर को उच्च होने के कारण मान्य किया जाना चाहिए तथा मूल्य का निर्धारण किया जाना चाहिए उपरोक्त मूल्य निर्धारण का पालन पूर्ण रूप से नहीं किया गया तथा जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला द्वारा आनंन-फांनन में बिना प्रमुख सचिव राजस्व विभाग के लिखित आदेश या बिना सहमति अवार्ड पारित किया गया उपरोक्त जल्दबाजी भ्रष्टाचार को बढ़ाने के लिए की गई है इस परियोजना में कुल 1300 करोड़ रुपए का मुआवजा आवंटन का प्रावधान होना चाहिए था लेकिन तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला द्वारा लगभग 400 करोड रुपए के मुआवजे के आवंटन का कार्य किया गया और कम से कम 10,000 से ऊपर लोगों के मकान बाग बगीचों हरे भरे पेड़ पौधों के सही अंकन को दरकिनार करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त होकर अवार्ड पारित किया गया। जबकि आदिवासी आरक्षित क्षेत्र में पेशा कानून को भी पूरी तरह से दरकिनार करते हुए उल्लंघन किया है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की जगह भय सभा आयोजित की गई है इस प्रकार वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 3 एवं 4 के अंतर्गत किसी भी वन भूमि के गैर वन उपयोग से पूर्व वन अधिकारों का निस्तारण अनिवार्य है जिसमें वन अधिकार ही नहीं बल्कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार और विशेष रूप से संवेदनशील जनजाति समूह के आवास अधिकारों को भी तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला के द्वारा समाप्त किया गया है जबकि इन गांव में जनजाति अधिकारों का पहला निस्तारण किया जाना आवश्यक था उपरोक्त कृत्य वन अधिकार कानून की घोर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। जबकि मध्य प्रदेश सरकार की अपनी जानकारी के अनुसार सिंगरौली जिले में अब तक ना कोई सामुदायिक अधिकार और ना ही कोई आवास अधिकार मान्यता प्राप्त हुए वहां के सभी आदिवासी तेंदू और महुआ जैसे बनो उपज पर ही अपनी आजीविका चलाते हैं तथा उनकी संस्कृति को भी समाप्त करने का कार्य किया है उपरोक्त विस्तृत परियोजना से विस्थापित परिवारों की अधिकांश संख्या आदिवासी परिवारों की रही है जो जंगलों से प्राप्त संसाधनों पर निर्भर है तथा मुआवजे की राशि में भारी विसंगति देखने को मिली है व भेदभाव करके मुआवजा तैयार किया गया है उपरोक्त त्रासदी सामाजिक और आर्थिक विसंगति को पैदा करती है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया गया कि बंधा कोल परियोजना हजारों हितग्राहियों की दावा आपत्तियां कच्चे व पक्के मकान बाग बगीचे ट्यूबवेल हैंड पंप बाउंड्री वॉल झोपड़ी ब टीन शेड का गलत मूल्यांकन अवॉर्ड पारित किया गया है उपरोक्त अवार्ड पारित करने में लगभग 1300 करोड़ की राशि आवंटित किया जानी थी लेकिन कंपनी से सलिप्त होकर तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला व संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला ने भयंकर भ्रष्टाचार करके हितग्राहियों के गलत मूल्यांकन करके लगभग 400 करोड रुपए का मुआवजा का अवार्ड पारित किया है जिसमें लगभग 900 करोड रुपए का आर्थिक भ्रष्टाचार किया गया है जिसकी जांच कराई जाकर कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला व उनकी टीम के ऊपर किए गए 900 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार की जांच कर कानूनी कार्यवाही किया जाए। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) 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