इंदौर, प्रदीप चौधरी। 14 जनवरी 2026 (विशेष संवाददाता): एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक लापरवाही या घोटाले की एक हैरान करने वाली कहानी सामने आई है, जहां मृत या नौकरी छोड़ चुकी नर्सों को कागजों पर जिंदा दिखाकर प्रमोशन और ट्रांसफर के आदेश जारी कर दिए गए हैं। डीन के हस्ताक्षर वाले इन आदेशों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जरूरत है।सूत्रों के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने हाल ही में कई नर्सों के प्रमोशन और ट्रांसफर के आदेश जारी किए, लेकिन इनमें से कुछ नाम ऐसे हैं जो या तो मर चुकी हैं या वर्षों पहले नौकरी छोड़ चुकी हैं। पहला मामला वर्षा निगम अस्पताल की पूर्व नर्स का है, जिन्होंने 2005 में आत्महत्या कर ली थी। लेकिन 25 साल बाद, 2026 में उन्हें कागजों पर जिंदा दिखाकर प्रमोशन दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उनके बेटे रजत को 16 साल पहले ही अनुकंपा नियुक्ति पर नौकरी दी जा चुकी है, और वह वर्तमान में अस्पताल की नई ओपीडी में वार्ड बॉय के रूप में कार्यरत हैं। डीन की नजर में वह अभी भी जीवित हैं, जबकि परिवार और रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करते हैं कि उनकी मृत्यु हो चुकी है।दूसरा मामला लीला माड़ी का है, जिनकी मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कैंसर अस्पताल में नई पदस्थापना दे दी। सूत्रों का कहना है कि शायद डीन साहब के सपनों में वह अभी भी आती हैं, लेकिन हकीकत में यह एक बड़ी चूक या जानबूझकर की गई गड़बड़ी लगती है। तीसरा उदाहरण कल्पना नाशिरकर का है, जिन्हें टीबी अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन कल्पना की शादी हो चुकी है और वह महाराष्ट्र चली गई हैं। इसके अलावा, एक अन्य नर्स जो 8 साल पहले नौकरी छोड़ चुकी थीं, उन्हें मैट्रन बना दिया गया।ये सभी आदेश डीन के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं। सवाल उठता है कि क्या डीन बिना जांच-पड़ताल के कागजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं? यदि ये महिलाएं ‘जिंदा’ हैं, तो क्या उनकी सैलरी भी निकाली जा रही है? तीनों नर्सों के मामले में वित्तीय घोटाले की आशंका है, क्योंकि मृत या चली गईं कर्मचारियों के नाम पर फर्जी भुगतान हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे और भी कई घोटाले उजागर हो सकते हैं, जैसे फर्जी प्रमोशन, अनियमित ट्रांसफर और सैलरी घपला।कॉलेज के एक पूर्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित घोटाला लगता है। जांच होनी चाहिए कि कितने ऐसे ‘भूत’ कर्मचारी हैं जिनके नाम पर फंड निकाले जा रहे हैं।” वहीं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।यह मामला स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण है। सूत्रों का कहना है कि यदि जांच की जाए, तो और भी कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। नागरिक संगठनों ने मांग की है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। क्या यह सिर्फ चूक है या बड़ा रैकेट? जांच से ही सच्चाई सामने आएगी। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर में हॉस्पिटल माफिया का खुलासा: 12 बिना रजिस्ट्रेशन हॉस्पिटल संचालित, सीएमएचओ पर संरक्षण का आरोप इंदौर में सड़क हादसा: बाणेश्वरी ट्रेवल्स की बस ने बाइक सवार युवक को मारी टक्कर, गुस्साई भीड़ ने लगाई बस में आग