– हिन्दुओं के चार प्रकार
भोपाल। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भोपाल में कहा कि लोगों के बीच संघ को लेकर बहुत सी गलतफहमी हैं। उन्होंने कहा कि मैं तथ्यों के साथ आपको बताना चाहता हूं कि संघ असल में है क्या। संघ किसी की प्रतिक्रिया में खड़ा कोई संगठन नहीं है, संघ का किसी से विरोध नहीं है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू की परिभाषा के साथ प्रकार भी बताए और संविधान की प्रस्तावना का हवाला भी दिया। ये सभी बातें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भोपाल में संघ के शाखा विस्तार कार्यक्रम के दौरान कहीं। वे दो दिन के भोपाल प्रवास पर हैं।  
मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू एक स्वभाव है, अखंड भारत में चार प्रकार के हिंदू हैं। एक तो वे हैं, जो गर्व से कहते हैं कि वे हिंदू हैं। दूसरे वो जो ये मानते हैं कि हिंदू हैं हिंदू रहेंगे, इसमें गर्व की क्या बात। तीसरे हिंदू वे हैं जो कहते हैं कि जोर से मत बोलो कि हिंदू हैं, घर के अंदर हम हिंदू हैं और चैथे वो जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं, वे भारत को उठने नहीं देना चाहते। तो आसान प्रश्न पहले हल करें और हिंदू कहने वालों को खड़ा करें। उन्होंने कहा कि हिंदू वो है जो सबको जोड़ता है, हिंदू कहने से हम किसी को छोड़ते नहीं है। हिंदू कहने से ही वसुधैव कुटुम्बकम का ध्यान आता है। उन्होंने ये भी कहा कि चार हिंदू एक तरफ तभी चलते हैं, जब पांचवा कंधे पर हो।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने भाषण में मुरली मनोहर जोशी का जिक्र किया। उन्होंने उनसे जुड़ा वाकया सुनाते हुए कहा कि जब वे चीन गए थे तो उन्हें चीन में रोक लिया गया। वहां यूनिवर्सिटीज का यूथ फेस्टिवल था। उन्होंने बताया कि मुरली मनोहर जोशी ने खुद उनसे ये वाकया साझा किया था और बताया था कि किस तरह से एक बड़े से स्टेडियम में अंधेरा हो गया और फिर सामने एक पर्दे पर दुनिया का नक्शा दिखाई दिया, जिसमें चीन के प्रतीक ड्रैगन पूरे नक्शे पर उड़ रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, उसमें ये बताया गया कि चीन का प्रभाव ऐसा था और अब फिर से एक बार फिर चीन को ऐसा खड़ा होना है। एक तरह से भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे कोई देश किस तरह से दोबारा अपने गौरवशाली अतीत को लेकर फिर खड़ा हो सकता है।
    मोहन भागवत ने कहा कि बीजेपी को देखकर संघ में ना आएं, गलती करेंगे, उनकी एक स्वतंत्र पहचान है। एक समय था जब संघ में प्रचारक साइकिल से प्रवास करते थे। भोजन कभी मिलता था कभी नहीं मिलता था। अब वैसा अभाव नहीं है, अब इतना बदलाव हुआ है कि लोग हमारी सुनने लगे हैं। उन्होंने कहा कि हम ये मानते हैं कि विरोध करने वाले भी हमारे हैं। सबकी लकड़ी लगेगी तब ही गोवर्धन पर्वत उठेगा।
 आरएसएस के प्रमुख सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया सत्य की नहीं, शक्ति की सुनती है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में यह बात कही। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वे मध्यभारत प्रांत के भोपाल विभाग केंद्र के दौरे पर आए है।  
कार्यक्रम के जिज्ञासा-समाधान सत्र में ग्वालियर के सतेंद्र दुबे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूर्ण होने पर देश के लिए संघ की भूमिका पर सवाल पूछा। इसपर आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि युवा पीढ़ी देश को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है। दुनिया भी भारत से सीखने की जरूरत महसूस कर रही है लेकिन विश्व सत्य की नहीं, शक्ति की सुनता है। इसलिए देश को शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक रूप से बलशाली बनना होगा। भारत फिर से विश्व को दिशा दे सके, इसके लिए संघ, समाज को संगठित कर ऐसी शक्ति खड़ी करने की भूमिका निभाएगा। मोहन भागवत ने कहा कि देश सरकार, नेता या नीतियों से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक प्रयास से बड़ा बनता है। शक्ति बल की होती है। शक्ति शील और युक्ति की भी होती है। तीनों मामलों में शक्ति की जरूरत होती है।

फिल्म कुली का किया जिक्र
युवा संवाद में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नौजवानों के सवालों के जवाब देते हुए कुली फिल्म का भी जिक्र किया। उन्होंने कुली फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा उस समय युवा लाल कुर्ता या शर्ट पहनते थे। ये बात उन्होंने फैशन के संदर्भ में कही। डॉ. मोहन भागवत ने कहा ष्हम ऐसे युवाओं का निर्माण कर रहे हैं, जो समाज में सार्थक फैशन को बढ़ाएं।
एआई की चुनौती पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा हमें एआई को कंट्रोल करना है, न कि कंट्रोल होना है। उसका उपयोग विकास में करना है। हमें ऐसे युवाओं का निर्माण करना है, जो एआई या अन्य तकनीक का उपयोग देशहित में करें।
—– 16 जिलों के युवाओं से भागवत ने किया संवाद
भोपाल में दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन भागवत ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में भाग लिया. इसमें मध्य प्रदेश के 16 जिलों के युवा आए। इन्हें संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कोई भी नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं, जब समाज गुण सम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है. वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। भागवत ने युवाओं से अपील की वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। व्यक्ति निर्माण जिस तरह से संघ में होता है, ऐसा दुनिया में कोई दूसरा नहीं करता। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने संघ की 100 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा संघ को 100 वर्ष में खूब प्रसिद्ध मिली लेकिन संघ का प्रचार विरोधियों ने नकारात्मक भाव में किया।
—- प्रबुद्धजनों सभा में कहा, चीनी चख के देखो
 मोहन भागवत ने कहा कि वर्दी और शारीरिक अभ्यास के बावजूद संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को देखकर संघ के बारे में निष्कर्ष निकालने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी। भागवत ने भोपाल में प्रबुद्धजनों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एकजुट करने और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करने का कार्य करता है, ताकि भारत दोबारा किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए। उन्होंने कहा, हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन समझता है तो यह भूल होगी। भागवत ने कहा, अगर आप बीजेपी को देखकर संघ को समझना चाहते हैं तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। यही गलती तब भी होगी, जब आप विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते। वे स्रोत तक नहीं पहुंचते, बल्कि विकिपीडिया देख लेते हैं। वहां सब कुछ सही नहीं होता। जो भरोसेमंद स्रोतों तक जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में सही जानकारी मिलेगी।
भागवत ने कहा कि इन्हीं भ्रांतियों के कारण संघ की भूमिका और उद्देश्य को साफ करना जरूरी हो गया है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर के उनके दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि आम धारणा है कि संघ का जन्म किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में हुआ, जबकि ऐसा नहीं है। भागवत ने कहा, संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं करता। उन्होंने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले लोग नहीं थे। संघ प्रमुख ने कहा कि बार-बार दूर-दराज से आए कुछ गिने-चुने लोग, जो भारतीयों से हर दृष्टि से कमजोर थे, उन्होंने हमें पराजित किया। संघ प्रमुख ने पिछले 100 वर्षों में संगठन द्वारा झेली गई आर्थिक कठिनाइयों को भी याद किया। भागवत ने लोगों से संघ को बेहतर ढंग से समझने के लिए किसी ‘शाखा’ में आने की अपील की। उन्होंने कहा, मैंने संघ के बारे में अपने विचार रखे हैं। समझना है तो भीतर आकर समझिए। अगर मेरी बातों पर भी पूरा विश्वास न हो तो कोई बात नहीं। सबसे अच्छा तरीका है कि अंदर आकर संघ को समझा जाए। अगर मैं दो घंटे यह समझाऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तो भी बात नहीं बनेगी। एक चम्मच चीनी चख लीजिये, खुद समझ में आ जाएगा।  

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