भोपाल, प्रदीप चौधरी।: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में चल रही चर्चा के बीच मध्य प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के ‘वंदे मातरम् नहीं गाऊंगा’ बयान पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखा पलटवार किया है। शर्मा ने मसूद पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वोट की राजनीति के लिए मंदिर जाना और हिंदू रीति-रिवाज अपनाना तो मजहब नहीं रोकता, लेकिन राष्ट्रगीत गाने में आड़े आता है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आरिफ मसूद जैसे लोगों को कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि जब तुम्हारा मजहब वंदे मातरम् गाने के लिए मना करता है, तो वोट के खातिर चुनाव के समय जब तुम बिना नहाए मंदिर जाकर पूजा की थाली पकड़ लेते हो, लंबा त्रिपुंड लगवा लेते हो, तब तुम्हारा मजहब आड़े क्यों नहीं आता? तुम्हारे मजहब में मूर्ति पूजा करना मनाही है न, तो फिर वोट के खातिर चुनरी क्यों ओढ़ लेते हो? देवी जागरण में क्यों जाते हो?” शर्मा ने आगे कहा, “वोट के खातिर मंदिरों में घुस रहे हो और राष्ट्रगीत गाने के लिए, राष्ट्रगान गाने के लिए, भारत माता की जय बोलने के लिए तुम्हारा मजहब मना कर रहा है? धन्य हो रे ऐसे मजहब के मानने वालों! अरे तुम मजहब से ही बेईमानी करने वाले स्वार्थी लोग हो। इसी स्वार्थ के ही कारण तो हिंदुस्तान का विभाजन हुआ था।” उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, “पहले जिन्ना का स्वार्थ आगे आया और देश का विभाजन हुआ और आज तुम जैसे कांग्रेसी फिर वंदे मातरम् की 150वीं साल पर वंदे मातरम् गाने से मना कर रहे हो। इसका मतलब यह है कि ये सुधर नहीं सकते, यह आज भी जिन्ना की मानसिकता लेकर चल रहे हैं।” शर्मा ने अंत में कहा, “अब हिंदुस्तानियों को सोचना है कि जो तुम्हारा राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत ना गाये, जो भारत माता की जय ना बोल पाए, वह बात वह भारत माता के प्रति वफादार होगा या पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलने का काम करेगा?” गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में उन नेताओं की सूची पेश की थी, जिन्होंने वंदे मातरम् गाने से इनकार किया था। इस सूची में आरिफ मसूद का नाम भी शामिल था। इसके बाद मसूद ने दोहराया कि वे वंदे मातरम् नहीं गाएंगे और सरकार पर मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया। इस बयान से मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बीजेपी इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है, जबकि कांग्रेस ने इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला बताया है। विवाद बढ़ने पर प्रशासन सतर्क है ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन संत समाज ने हुमायूं कबीर के बयान की कड़ी निंदा की, बाबर के नाम पर स्मृति चिन्ह तोड़कर शौचालय बनाने की चेतावनी एमवाई हॉस्पिटल बना ‘बदनामी का अड्डा’, महिला गार्ड ने लगाया दो साल से प्रताड़ना का आरोप – वायरल वीडियो में अफसरों पर गंभीर इल्ज़ाम