प्रदीप चौधरी / अंकुल प्रताप सिंह, बघेल:. खाकी पर काले धब्बे: मध्य प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार की बढ़ती लहर, जनता का विश्वास संकट में.! भोपाल, “वर्दी पर दाग न लगने दें, जनता का विश्वास जीतें…” – यह स्लोगन मध्य प्रदेश पुलिस का आदर्श वाक्य है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, फर्जी केस और गुंडागर्दी के आरोपों ने खाकी की गरिमा को चुनौती दे दी है। सोशल मीडिया पर “एमपी में पुलिस से बचिए” जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जो विभाग की छवि को धूमिल कर रहे हैं। क्या कानून के रखवाले खुद कानून के उल्लंघनकर्ता बन गए हैं? हाल के आंकड़े और घटनाएं इस सवाल को और गहरा बना रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों (2023-2025) में मध्य प्रदेश पुलिस के 329 कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 259 चालान पेश, 61 जांच जारी और 9 अज्ञात मामले शामिल हैं। ये आंकड़े विधानसभा में कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल पर सरकार द्वारा पेश किए गए थे। भोपाल में सबसे ज्यादा 48 मामले दर्ज हुए, उसके बाद ग्वालियर (27), सिवनी (18), इंदौर शहरी (17), गुना (17) और बालाघाट (13)। अन्य जिले भी इस कड़ी में पीछे नहीं हैं। ये आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि पुलिस की आंतरिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं। भ्रष्टाचार के बड़े घोटाले जो सुर्खियां बने: – मंदसौर फर्जी एनडीपीएस केस: मल्हारगढ़ थाने को हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने देश के टॉप-10 मॉडल थानों में शामिल किया था। लेकिन उसी थाने के 6 पुलिसकर्मियों पर 18 वर्षीय छात्र को बस से उतारकर पीटने और 2.7 किलो अफीम का फर्जी केस फंसाने का आरोप लगा। छात्र को 2 महीने जेल काटनी पड़ी। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आरोपी निलंबित हुए। सीसीटीवी फुटेज में सादे कपड़ों में गुंडागर्दी साफ दिख रही है। यह घटना पुलिस की नैतिक विफलता का प्रतीक बन गई। – क्रोरपति कांस्टेबल सौरभ शर्मा कांड: पूर्व ट्रांसपोर्ट कांस्टेबल सौरभ शर्मा पर ₹500-700 करोड़ की अवैध संपत्ति का आरोप। लोकायुक्त छापेमारी में ₹2.87 करोड़ नकद, 234 किलो चांदी, दुबई में ₹150 करोड़ की विला, मछली फार्म और जमीनें बरामद हुईं। शर्मा 2015 में सहानुभूति आधार पर नियुक्त हुए थे, लेकिन 2023 में वीआरएस ले लिया। जांच में डायरी मिली, जो ट्रांसपोर्ट विभाग में भ्रष्टाचार का नेटवर्क उजागर कर रही है। कांग्रेस ने हाईकोर्ट जज से जांच की मांग की है। – कांस्टेबल भर्ती घोटाला: 2023 भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गैंग का खेल। बिहार से आए एक सॉल्वर ने 6 उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दी। आधार कार्ड में बायोमेट्रिक बदलकर फर्जीवाड़ा। अब तक 22 FIR, 12 गिरफतारियां। यह व्यापम घोटाले की याद दिला रहा है। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता के टैक्स से चलने वाली पुलिस मासूमों के अधिकारों का हनन कर रही है। सत्ता की गुलामी से बेहतर है जनसेवा। कई अधिकारी तो मिसाल हैं – जैसे भोपाल में सामुदायिक सेवा से जनता से घरेलू रिश्ते बनाने वाले, लेकिन चंद बदमाशों की वजह से सबकी छवि खराब हो रही है। टॉप शहरों में मामले (2023-2025): | शहर/जिला | मामले ||—————|——–|| भोपाल | 48 || ग्वालियर | 27 || सिवनी | 18 || इंदौर (शहरी)| 17 || गुना | 17 || बालाघाट | 13 | बदलाव की जरूरत:इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 में मध्य प्रदेश पुलिस व्यवस्था में सुधार सबसे कम (9 पॉइंट) पाया गया। डिजिटल युग में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और भेदभाव-रहित कार्रवाई जरूरी है। गृह जनपद पोस्टिंग, सख्त निगरानी और तेज जांच से भ्रष्टाचार रोका जा सकता है। पुलिस रक्षक है, भक्षक नहीं। “देशभक्ति, जनसेवा” का स्लोगन अमल में लाएं, तो जनता का विश्वास लौटेगा। अन्यथा, “एमपी में पुलिस से बचिए” जैसे स्लोगन हकीकत बन जाएंगे। विभाग को आत्ममंथन कर सुधार की दिशा में कदम उठाने होंगे। ऑपरेशन मुस्कान से चमकी खाकी: इंदौर, देवास-उज्जैन पुलिस के दो सालों के सराहनीय कार्य, लेकिन संतुष्टि अभी बाकी अंकुल प्रताप सिंह, बघेल।। मध्य प्रदेश पुलिस का “देशभक्ति-जनसेवा” का स्लोगन अब जमीन पर उतर रहा है। भ्रष्टाचार के दाग के बीच भी इंदौर, देवास और उज्जैन के पुलिसकर्मी जनता का दिल जीतने में जुटे हैं। खासकर “ऑपरेशन मुस्कान” ने गुमशुदा बच्चों की तलाश में नई उम्मीद जगाई है। पिछले दो वर्षों (2023-2025) में इन जिलों की पुलिस ने अपराध नियंत्रण से लेकर सामुदायिक सेवा तक कई मिसालें कायम कीं, लेकिन जनता की अपेक्षाएं अभी पूरी नहीं हुईं। संतुष्टि का सफर जारी है – पुलिस को रक्षक बनना होगा, भक्षक नहीं। ऑपरेशन मुस्कान: गुमशुदा बच्चों का संरक्षक अभियानगृह मंत्रालय की इस पहल ने मध्य प्रदेश में हजारों बच्चों को अपनों से जोड़ा। उज्जैन पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में ही आधा दर्जन से अधिक गुमशुदा बच्चों को बरामद किया। फरवरी 2025 में तराना थाने ने 2 जून 2024 से लापता बालिका को धारा जिले से सुरक्षित लौटाया और आरोपी सुनिल को गिरफ्तार किया। इसी तरह, खाचरौद नाका से 1 अप्रैल 2024 के मामले में लापता लड़की को बरामद कर आरोपी नरेंद्र सोनी को पकड़ा। चिमनगंज मंडी, बड़नगर, खरकुआ, कायथा और माकड़ॉन थानों ने भी सफलता हासिल की। यह अभियान न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि मानव तस्करी के नेटवर्क पर भी प्रहार करता है। 2015 से चली आ रही इस मुहिम ने 2023-2025 में राज्य स्तर पर 19,000 से अधिक बच्चों को मुक्ति दिलाई, जिसमें इंदौर और उज्जैन का योगदान उल्लेखनीय रहा। इंदौर पुलिस: अपराध पर 30% लगाम, AI एआई से सशक्तिकरणमध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिस ने तकनीक का सहारा लेकर रात के अपराधों पर काबू पाया। 2023 के अगस्त से नवंबर तक जोन-2 में 319 रात्रिकालीन अपराध दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 223 रह गई – यानी 30% की गिरावट। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने संवेदनशील इलाकों में पुलिस उपस्थिति सुनिश्चित की। दिसंबर 2023 में पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर ने “सृजन-नई दिशा नया गगन” कार्यक्रम शुरू किया, जो महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने, उनकी सुरक्षा और सशक्तिकरण पर केंद्रित है। रक्षित केंद्र पर आयोजित इस सामुदायिक पुलिसिंग पहल ने जनता से सीधा संवाद स्थापित किया। इसके अलावा, 2021 से लागू कमिश्नरेट सिस्टम ने कानून व्यवस्था को मजबूत किया, और 2025 में यांगचेन डोलकर भूटिया को ग्रामीण इंदौर का एसपी बनाकर नई ऊर्जा का संचार हुआ। देवास पुलिस: स्थानीय स्तर पर मजबूत कदमदेवास जिले की पुलिस ने पिछले दो वर्षों में अपराध दर में कमी लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। 2024 के अक्टूबर में एसपी संपत उपाध्याय के स्थानांतरण से पहले, देवास पुलिस ने ट्रैफिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। ऑपरेशन मुस्कान के तहत कई गुमशुदा बच्चों की तलाश में सफलता मिली, हालांकि विशिष्ट आंकड़े सीमित हैं। जिले में सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए स्कूलों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, जिससे जनता का विश्वास बढ़ा। 2025 में नए एसपी पूनित गहलोत की नियुक्ति के बाद अपराध जांच में तेजी आई। देवास ने उज्जैन डिवीजन के तहत कुम्भ मेला 2028 की तैयारी में भी योगदान दिया, जहां यूपी मॉडल अपनाकर सुरक्षा मानक ऊंचे करने की योजना है। उज्जैन पुलिस: धार्मिक नगरी में शांति का पहरामहाकाल की नगरी उज्जैन में पुलिस ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। 2023-2025 में 31 थानों के जरिए कानून व्यवस्था मजबूत रखी गई। ऑपरेशन मुस्कान में बड़ी सफलता मिली, जहां फरवरी 2025 तक कई लापता बच्चों को राजस्थान बॉर्डर तक खोजा गया। एसपी प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में महिला थाना और ट्रैफिक थाने सक्रिय रहे। 2024 में उज्जैन डिवीजन के आईजी उमेश जोगा ने साइबर क्राइम जागरूकता अभियान चलाया। कुम्भ 2028 की तैयारी में यूपी पुलिस मॉडल अपनाते हुए ड्रोन और एआई निगरानी की योजना बनी, जो 2025 से लागू हो रही है। हालांकि, मार्च 2025 में कुछ विवादास्पद घटनाओं ने चुनौतियां बढ़ाईं, लेकिन समग्र रूप से सेवा भावना उभरी। दो वर्षों के प्रमुख कार्यों का सारांश: जिला प्रमुख पहल/उपलब्धि (2023-2025) प्रभाव इंदौर एआई से 30% अपराध कमी; “सृजन” कार्यक्रम महिलाओं की सुरक्षा मजबूत देवास ऑपरेशन मुस्कान; सामुदायिक जागरूकता स्थानीय विश्वास वृद्धि उज्जैन 6+ बच्चों की बरामदी; कुम्भ सुरक्षा योजना तीर्थयात्रियों का संरक्षण ये प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन जनता की संतुष्टि अभी अधर में लटकी है। भ्रष्टाचार के पुराने दाग धोने और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है। डिजिटल युग में निष्पक्ष जांच और जनसेवा से ही विश्वास लौटेगा। पुलिस अगर इन स्लोगनों पर अमल करेगी, तो “एमपी में पुलिस से बचिए” की जगह “एमपी पुलिस – हमारा गौरव” गूंजेगा। विभाग को आत्ममंथन कर आगे बढ़ना होगा। खाकी का नया अध्याय: इंदौर कमिश्नर संतोष कुमार सिंह की जनसेवा और कड़ाई से मजबूत हुई पुलिसिंग इंदौर, प्रदीप चौधरी।। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम ने कानून व्यवस्था को नई दिशा दी है। पिछले साल अक्टूबर में नियुक्ति के बाद से आईपीएस संतोष कुमार सिंह ने “देशभक्ति-जनसेवा” के स्लोगन को अमल में उतारते हुए जनता से सीधा संवाद स्थापित किया है। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में मशहूर सिंह ने नशे और गुंडागर्दी पर कड़ा प्रहार किया, साथ ही उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुलिसकर्मियों को सम्मानित कर प्रेरणा दी। इन प्रयासों से न सिर्फ अपराध पर लगाम लगी, बल्कि जनता का विश्वास भी बढ़ा। लेकिन चुनौतियां बाकी हैं – पारदर्शिता और निरंतरता से ही संतुष्टि मिलेगी। जनता से संवाद: सामुदायिक पुलिसिंग की नई ऊंचाईकमिश्नर सिंह ने जनता को पुलिस का साझेदार बनाने पर जोर दिया। नवंबर 2025 में उन्होंने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जहां कहा, “ईमानदारी से ड्यूटी निभाने से समाज में सम्मान मिलता है।” त्योहारी सीजन में वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए, ताकि ट्रैफिक प्रबंधन सुगम हो। साथ ही, पड़ोस समितियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने का आह्वान किया, जहां नागरिकों की शिकायतें सुनी जाती हैं। यह कदम सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत कर रहा है, जिससे अपराध की सूचना पहले ही मिल जाती है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सिंह की पहल सराहनीय रही। अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश का पहला एआई चैटबॉट ‘सेफ क्लिक्स’ लॉन्च किया, जो नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए 24×7 उपलब्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उद्घाटित इस टूल ने पुलिस और जनता के बीच डिजिटल पुल का काम किया। सिंह ने कहा, “यह चैटबॉट हर नागरिक के लिए साइबर सुरक्षा को आसान बनाएगा।” उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान: प्रेरणा का साप्ताहिक कार्यक्रमसिंह ने पुलिसकर्मियों के मनोबल को ऊंचा रखने के लिए साप्ताहिक पुरस्कार योजना शुरू की। नवंबर 2024 से चली आ रही इस पहल में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रमाण पत्र और 1,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है। नवंबर 2025 में 15 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया – बाणगंगा और छत्रीपुरा थाने के कर्मियों को 18 लाख रुपये के सोने की चोरी के आरोपी पकड़ने और क्राइम ब्रांच को 82.26 ग्राम एमडी दवाओं के साथ दो तस्कर गिरफ्तार करने के लिए। जुलाई 2025 में 19 कर्मियों को सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए पुरस्कृत किया गया। दिसंबर 2024 में 10 पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम, नशा तस्करी, आत्महत्या रोकने और तकनीकी जांच में योगदान के लिए सम्मान मिला। इन पहलों से पुलिस में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। कड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार पर शिकंजा, विश्वास की बहालीसिंह ने विभागीय अनुशासन पर भी सख्ती बरती। नशे और गुंडागर्दी पर फोकस करते हुए कई गिरोहों को खत्म किया। मई 2025 में शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जुलाई तक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए, जिसके उल्लंघन पर धारा 223 के तहत सजा का प्रावधान किया। हालांकि विशिष्ट डिमोशन या बर्खास्तगी के मामले सार्वजनिक रूप से कम ही सामने आए, लेकिन सिंह की एनकाउंटर विशेषज्ञता और अनुभव (पहले डीआईजी इंदौर और आईजी उज्जैन के रूप में) ने अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। इन कदमों से जनता में यह संदेश गया कि खाकी अब रक्षक है, भक्षक नहीं। प्रमुख कार्यों का सारांश (2024-2025): कार्य क्षेत्र प्रमुख पहल/उपलब्धि प्रभाव सामुदायिक संवाद पड़ोस समितियों की बैठकें; ट्रैफिक प्रशिक्षण जनभागीदारी बढ़ी साइबर सुरक्षा ‘सेफ क्लिक्स’ एआई चैटबॉट लॉन्च डिजिटल जागरूकता पुरस्कार योजना साप्ताहिक सम्मान; 50+ कर्मियों को पुरस्कार मनोबल ऊंचा अपराध नियंत्रण नशा तस्करी पर प्रहार; प्रतिबंध आदेश अपराध दर घटी कमिश्नर सिंह के नेतृत्व में इंदौर पुलिस ने नई ऊर्जा पाई है। जनता का विश्वास जीतने के ये प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के दाग धोने और निष्पक्ष जांच से ही पूर्ण संतुष्टि मिलेगी। अगर ये स्लोगन अमल में रहें, तो इंदौर बनेगा सुरक्षित शहर का मॉडल। विभाग को आगे बढ़ते रहना होगा, ताकि “पुलिस से बचिए” की जगह “पुलिस पर भरोसा” गूंजे। View this post on Instagram Share 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