बालाघाट, 12 दिसंबर 2025 : मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में लंबे समय से चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार को राज्य के अंतिम दो सक्रिय सशस्त्र नक्सली डीवीसीएम दीपक उर्फ सुधाकर (56 वर्ष, निवासी पालाघोंदी, बालाघाट) और एसीएम रोहित उर्फ मंगलू (36 वर्ष, निवासी फतेनार, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़) ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इन दोनों पर संयुक्त रूप से 43 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दीपक उर्फ सुधाकर वर्ष 1986 में नक्सल दलम में भर्ती हुआ था और बालाघाट में उसके खिलाफ 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, रोहित उर्फ मंगलू पर 21 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इनके आत्मसमर्पण के साथ ही मध्यप्रदेश में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है। भारत सरकार ने नक्सलवाद उन्मूलन के लिए मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे मध्यप्रदेश ने समय से पूर्व हासिल कर लिया। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों में 1990 से नक्सलियों ने बंदूकों और हिंसा के जरिए ग्रामीणों को डराकर प्रभाव जमाना शुरू किया था। वर्ष 1990 में थाना बिरसा में नक्सलियों के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। तब से अब तक के अभियानों में 38 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 57 आम नागरिक लाल आतंक की बलि चढ़े। नक्सल विरोधी लड़ाई में सुरक्षा बलों ने 45 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया और 28 को गिरफ्तार किया। हॉकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा फोर्स और जिला पुलिस बल का इस सफलता में विशेष योगदान रहा। View this post on Instagram हाल के दिनों में सुरक्षा बलों की सघन सर्चिंग से नक्सली दबाव में आए। हाल ही में एमएमसी जोन के 10 हार्डकोर सशस्त्र नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, जिन पर विभिन्न राज्यों में कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम था। 19 नवंबर को बोरतालाब मुठभेड़ में घायल होने के बाद एसजेडसीएम विकास नगपुरे ने भी अपनी टीम के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसी तरह 6 दिसंबर को पायलीमेटा जंगल में मुठभेड़ के बाद सीसीएम रामदेर को अगले दिन सीमावर्ती जिले में सरेंडर करना पड़ा। वर्ष 2025 में बालाघाट जोन में अब तक सबसे अधिक 10 हार्डकोर नक्सली धराशायी किए गए। आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर जंगलों से भारी मात्रा में हथियार और सामग्री बरामद की गई, जिसमें 1 एसएलआर राइफल, 1 इंसास राइफल, 3 तीन-सौ-पंद्रह बोर राइफल, 1 नौ एमएम पिस्टल, विभिन्न एम्युनेशन, मैनपैक सेट, लैपटॉप, प्रिंटर, सोलर प्लेट आदि शामिल हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए 46 एकल सुविधा केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से 2046 वन अधिकार पट्टे अग्रेषित किए गए, 1232 जाति प्रमाण पत्र और 748 आधार कार्ड जारी/अपडेट किए गए। रोजगार मेलों के जरिए युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरियां दिलाई जा रही हैं। बालाघाट पुलिस ने इस उपलब्धि को सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों और शासन की सरेंडर नीति का परिणाम बताया। यह बलिदान और सफलता राज्य के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन 2027 की पहली डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर वर्दी पर दाग नहीं लगने दें: मध्य प्रदेश पुलिस की छवि सुधार की पुकार