चतुर्भुज श्री राम मंदिर के महामंडलेश्वर नरसिंह दास और महामंडलेश्वर नितिन दास ने की धर्म पर चर्चाराहुल सेन मांडव मो 9669141814मांडू न्यूज/मांडू के चतुर्भुज राम मंदिर में रविवार को महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर डॉ. नरसिंह दास महाराज और इंदौर के महामंडलेश्वर नितिन दास महाराज का मिलन हुआ। मंदिर में अतिथि देवो भव की परंपरा के अनुसार, महामंडलेश्वर नितिन दास महाराज ने पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉक्टर नरसिंह दास जी महाराज का शॉल और श्रीफल से स्वागत किया। वहीं, आचार्य पंडित महेंद्र शर्मा और महंत जीवन दास जी महाराज ने चतुर्भुज श्री भगवान राम की प्रतिमा के चिन्ह का फोटो महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज को भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर दोनों संतों के बीच धर्म, प्रेम और सनातन संस्कृति के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने समाज कल्याण, आध्यात्मिक जागरण और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने के लिए आगामी योजनाओं और रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया।यह मिलन आध्यात्मिक जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जा रहा है। संतों का एकजुट होना धर्म की शक्ति को बढ़ाता है और आध्यात्मिक संवाद, प्रेम तथा भक्ति को बढ़ावा देता है। विदाई के समय इंदौर के महामंडलेश्वर नितिन दास महाराज ने महंत नरसिंह दास से कहा, “आपके साथ हुई यह धार्मिक भेंट मुझे हमेशा याद रहेगी।”वही उसके पश्चात चतुर्भुज श्री राम दर्शन करने के बाद महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज ने प्राचीन नीलकंठ मंदिर पहुंचकर नीलकंठ महादेव का अभिषेक कर दर्शन क्या वहीं से वह रामपाल की धाम पहुंचकर प्रभु श्री राम के दर्शन किए वहीं उनके साथ भक्त भी चल रहे थे वहीं महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज ने पत्रकार राहुल सेन मांडव से चर्चा में बताया कि आज की युवा पीढ़ी धर्म के नाम से भटक रही है उन्हें भटक तो राहों से हटाने के लिए हम उन्हें जोड़ रहे हैं वही सनातन धर्म के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं वही आज हमारे साथ में कई युवा मांडू पहुंचे जिन्हें हमने मांडू के चतुर्भुज श्री राम के दर्शन करवाए और उन्हें चतुर्भुज राम के बारे में बताया साथ ही मांडू के अति प्राचीन नीलकंठ महादेव पहुंचकर नीलकारेश्वर महादेव की महिमा बताई नीलकंठ महादेव में हमने बताया कि यहां पर साक्षात भगवान महादेव पर प्राकृतिक रूप से जल से अभिषेक होता है यह हमारे सनातन धर्म की पहचान है वही अति प्राचीन रामपाल की धाम पहुंच कर वहां पर राम जी का इतिहास बताया और कहां कि यहां पर भगवान श्री राम और माता सीता पालकी में विराजमान हुए थे वही सीताफल भगवान श्री राम माता सीता को पहली बार यही खिलाया था इसलिए सीताफल का नाम भी यही से रखा गया वही इस युवा पीढ़ी को हम धार्मिक स्थलों पर ले जाकर धर्म का ज्ञान देते हैं View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन चीन दुनिया का सबसे बड़ा सरमायेदार! इंदौर में हिंदू युवती से ठगी, ब्लैकमेल और बार-बार बलात्कार का सनसनीखेज मामला सामने आया