भोपाल, प्रदीप चौधरी : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गिन्नौरी इलाके में स्थित शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज) की जर्जर इमारत का एक हिस्सा आज दोबारा ढह गया। घटना दोपहर करीब 12:15 बजे हुई, जब प्रशासनिक भवन के पीछे की दीवार और छत का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। गनीमत रही कि हादसे के समय वहां कोई छात्र या स्टाफ मौजूद नहीं था, जिससे किसी की जान पर बन आई। यह कॉलेज की 175 साल पुरानी इमारत का दूसरा ऐसा हादसा है, जिसने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राचार्य 10 मिनट पहले ही सुरक्षित निकलेकॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सेवानी ने बताया कि वे घटना से महज 10 मिनट पहले ही मीटिंग के लिए बाहर निकल चुके थे। “ईश्वर का शुक्र है कि कोई हादसा नहीं हुआ, लेकिन यह हमारी इमारतों की जर्जर स्थिति का स्पष्ट संकेत है। हमने उच्च शिक्षा विभाग को कई बार पत्र लिखे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” प्राचार्य ने 23 जून 2025 को कलेक्टर और विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि ए-ब्लॉक (प्राचार्य कक्ष और प्रशासनिक कार्यालय) का भवन ढह सकता है। इसके बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ। पूर्व प्राचार्य पुष्पलता चौकसे ने भी खुलासा किया कि उन्होंने सात से आठ बार उच्च शिक्षा विभाग को जर्जर भवन की सूचना दी थी। सात माह पहले भाषा विभाग की कक्षाएं (हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत) ऊपरी मंजिल से नए भवन में शिफ्ट कराई गई थीं, ताकि खतरा कम हो। लेकिन आज फिर वही हिस्सा गिर गया। छात्र संगठनों का आक्रोश, मांगों का दौरघटना के बाद एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे छात्र संगठनों ने कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। संगठनों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये मरम्मत के लिए आवंटित होने के बावजूद काम नहीं हुआ। “जर्जर इमारतें छात्रों की जान का दुश्मन बन चुकी हैं। तत्काल मरम्मत और सुरक्षा उपायों की मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करेंगे,” एक छात्र नेता ने कहा। हादसे के बाद प्रभावित हिस्से की ऊपरी मंजिल की कक्षाएं बंद कर दी गईं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई। कॉलेज की स्थिति: एक्सीलेंस का दर्जा, लेकिन सुविधाओं की कमीहमीदिया कॉलेज को पिछले साल प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज का दर्जा मिला, लेकिन जिले के 55 कॉलेजों में से यहां सर्वसुविधायुक्त बनाने का काम अधूरा है। साइंस संकाय शुरू होने से छात्र संख्या बढ़ी, लेकिन भवन क्षमता नहीं। छोटे तालाब किनारे बनी पुरानी इमारत लंबे समय से खतरे की घंटी बजा रही थी। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जल्द मरम्मत योजना बनाने का आश्वासन दिया है। यह घटना भोपाल के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों पर पुनर्विचार की मांग को तेज कर रही है। कॉलेज प्रबंधन ने उच्च अधिकारियों से तत्काल फंड जारी करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसा हादसा न हो। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन राजनैतिक व्यंग्य-समागम छिंदवाड़ा: अनियमितताओं के चलते परासिया के अपना मेडिकल स्टोर्स का लाइसेंस निरस्त, दवाओं का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित