प्रदीप चौधरी।। मंगलवार दोपहर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मार्ग पर अर्धकुंवारी के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के निकट हुए भयानक भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। इस त्रासदी से 3500 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 23 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। भारी बारिश के कारण हुए इस हादसे ने वैष्णो देवी यात्रा को पूरी तरह ठप कर दिया है। बाढ़ और जलभराव ने बढ़ाई मुश्किलें जम्मू जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ और जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। चेनाब, तवी, उझ, रावी, बसंतर, और सहार खड़ जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। जम्मू-पठानकोट और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हैं, जबकि कई अंतर-जिला सड़कें भी भूस्खलन और बाढ़ के कारण अवरुद्ध हो गई हैं। जम्मू में तवी नदी पर बना चौथा पुल ढह गया, जिससे यातायात और आपात सेवाओं पर भारी असर पड़ा है। राहत और बचाव कार्य जोरों पर जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय स्वयंसेवक, और भारतीय सेना राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटी हुई है। सेना ने कटरा और आसपास के क्षेत्रों में तीन राहत टुकड़ियां तैनात की हैं, जो फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। जम्मू में करीब 3500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, और मुट्ठी व सतवारी में सामुदायिक रसोई भोजन उपलब्ध करा रही हैं। मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। वैष्णो देवी यात्रा और सेवाएं ठप भूस्खलन के बाद वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर मलबा जमा होने से यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। हिमकोटि और पुराने दोनों मार्ग बंद हैं, और ई-कार व हेलीकॉप्टर सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। कई श्रद्धालु कटरा में फंसे हुए हैं। रेलवे ने 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को आंशिक रूप से रोका गया है, क्योंकि भूस्खलन से रेल पटरियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मौसम विभाग की चेतावनी मौसम विभाग ने जम्मू, रियासी, डोडा, कठुआ, सांबा, उधमपुर, रामबन, और राजौरी सहित कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। बुधवार, 27 अगस्त 2025 को भारी बारिश, गरज-चमक, और बादल फटने की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। प्रशासन और सरकार का रुख मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आपात बैठक बुलाकर प्रभावित जिलों के उपायुक्तों को राहत सामग्री और कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात कर स्थिति का जायजा लिया और केंद्र से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। जम्मू डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। अन्य प्रभावित क्षेत्र डोडा जिले में बादल फटने जैसी स्थिति में चार लोगों की मौत हुई है, और कई घर व पुल बह गए हैं। कठुआ में रावी नदी का जलस्तर एक लाख क्यूसेक को पार कर गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी कई क्षेत्रों में ठप हैं, जिससे आपात सेवाओं में बाधा आ रही है। सभी स्कूल-कॉलेज 27 अगस्त तक बंद हैं, और 10वीं-11वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। चुनौतियां और आगे की राह लगातार बारिश और भूस्खलन ने राहत कार्यों में मुश्किलें बढ़ाई हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करना और राजमार्गों से मलबा हटाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश से पहाड़ी ढलानें कमजोर हो गई हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इस आपदा ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, और प्रशासन लोगों की सुरक्षा और राहत के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मनगवां पुलिस ने तीन मामलो में चोरी गई मोटरसाईकिल सहित 2 आरोपियों को किया गिरफ्तार। किश्तों में संविधान बदलने का खेल