इंदौर। प्रदीप चौधरी जिस जमीन पर पिंटू छाबड़ा ने सी-21 बिजनेस पार्क बनाया, वह पांच कृषि भूमि का टुकड़ा है सी-21 बिजनेस पार्क, इंदौर के रेडिसन चौराहे पर स्थित एक प्रमुख व्यावसायिक परिसर, विवादों के घेरे में है। यह परिसर पांच कृषि भूमि के टुकड़ों पर बनाया गया है, जिसकी रजिस्ट्री बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर, गुड़गांव, हरियाणा के जीएम आलोक भंडारी के नाम हुई। रजिस्ट्री चुघ परिवार द्वारा की गई, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह कृषि भूमि है, जो तृष्णा गृह निर्माण संस्था से खरीदी गई थी। सभी रजिस्ट्रियां वर्ष 2007 में हुईं, और इनमें मोहनलाल चुघ, चुघ हाउसिंग डेवलपर्स, नीतेश कुमार (पिता मोहनलाल चुघ), शिवम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स (चुघ की कंपनी), और रीना देवी (पति मोहनलाल चुघ) के नाम शामिल हैं। ये सभी जमीनें आलोक भंडारी को बेची गईं, और सभी सेल डीड पर राजेश (पिता चंपालाल सिद्ध) के हस्ताक्षर हैं। 26 लाख 74 हजार में खरीदी, 11 करोड़ में बेची चुघ परिवार ने तृष्णा गृह निर्माण संस्था की इस जमीन को मात्र 26 लाख 74 हजार रुपये में खरीदा और इसे लगभग 11 करोड़ रुपये में बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेच दिया। यह भारी मुनाफा गृह निर्माण संस्था की जमीन के बिना लाभ-हानि के बिक्री के नियमों का उल्लंघन करता है। इसके बावजूद, कोई भी जांच एजेंसी या विभाग ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की। हाल ही में, चुघ परिवार पर एक अन्य कॉलोनी से संबंधित मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने केस दर्ज किया है, जो उनके कथित फर्जीवाड़े की गंभीरता को दर्शाता है। राजस्व विभाग ने कैसे किया डायवर्शन? चुघ ब्रदर्स ने न केवल रजिस्ट्री में फर्जी एनओसी (No Objection Certificate) का इस्तेमाल किया, बल्कि उसी के आधार पर जमीन का डायवर्शन भी करा लिया। यह सवाल उठता है कि उस समय के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने फर्जी एनओसी पर डायवर्शन कैसे स्वीकृत किया, जबकि इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) और एसडीओ के बीच इस जमीन को लेकर पत्राचार चल रहा था। गृह मंत्रालय के निर्देश पर अब जांच शुरू हो चुकी है, और कलेक्टर को यह जांच करनी चाहिए कि फर्जी एनओसी के आधार पर डायवर्शन कैसे संभव हुआ। फर्जीवाड़ा करने वाले को रीजनल पार्क का टेंडर विवादास्पद रूप से, जिस कंपनी ने इस कथित फर्जीवाड़े के साथ सी-21 बिजनेस पार्क बनाया, उसी को नगर निगम ने रीजनल पार्क का टेंडर देने का फैसला किया है। यह टेंडर 27 साल के लिए प्रस्तावित है, जबकि इस कंपनी के फर्जीवाड़े की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है। यह सवाल उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद नगर निगम ने सी-21 बिजनेस पार्क पर कार्रवाई क्यों नहीं की और उसी कंपनी को इतना बड़ा प्रोजेक्ट क्यों सौंपा जा रहा है। सी-21 बिजनेस पार्क से जुड़ा यह मामला इंदौर के रियल एस्टेट सेक्टर में गहरे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करता है। चुघ परिवार और बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच सौदे, फर्जी एनओसी, और गैरकानूनी डायवर्शन जैसे मुद्दों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश पर चल रही जांच और EOW की कार्रवाई से इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है। जनता और प्रशासन की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी और क्या रीजनल पार्क जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को ऐसी कंपनियों से बचाया जा सकेगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन नई दिल्ली में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे अमन, मिला विशेष आमंत्रण स्वाधीनता दिवस: ना मजदूर-किसान पीछे रहे और ना दलित, मुसलमान