इंदौर, 18 जुलाई 2025: मध्य प्रदेश की स्वच्छता नगरी इंदौर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में अवैध और अमानक वाहनों द्वारा स्कूली बच्चों को ले जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। हाल ही में एक इको वैन में 25 बच्चों को ठूंसकर ले जाते हुए देखा गया, जो न केवल क्षमता से अधिक है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और परिवहन नियमों का खुला उल्लंघन है। बॉम्बे इंटरनेशनल स्कूल खजराना इंदौर. गाड़ी में बैठने कि जितनी सीट नहीं, उससे ज्यादा बच्चे स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को डराकर-धमकाकर इन वाहनों में बैठाया जाता है। कई बार गाड़ियों में जगह नहीं होने के बावजूद चंद पैसों के लालच में बच्चों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा—स्कूल प्रबंधन, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO), या प्रशासन?पिछले हादसों से नहीं लिया सबकइंदौर में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसे कोई नई बात नहीं हैं। 2018 में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतने का दावा किया था, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं दिखता। हाल ही में RTO द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कई प्राइवेट वाहनों का उपयोग बिना परमिट के कमर्शियल कार्यों के लिए हो रहा है। इन वाहनों में न तो जीपीएस सिस्टम है, न ही अग्निशामक यंत्र, और न ही आपातकालीन निकास जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण। इसके बावजूद, ऐसी गाड़ियां बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ रही हैं।RTO की कार्रवाई: नाकम और छुटपुट जुलाई 2025 में RTO ने महू क्षेत्र में स्कूली और सार्वजनिक वाहनों की जांच की, जिसमें 6 स्कूली वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र निरस्त किया गया और एक ट्रैवलर को बिना दस्तावेज के जब्त किया गया। साथ ही, 25,000 रुपये से अधिक का जुर्माना भी वसूला गया। हालांकि, यह कार्रवाई समस्या के दायरे के सामने नाकम साबित हो रही है। सूत्रों के अनुसार, पूरे जिले में केवल दो ARTO और एक निरीक्षक की टीम होने के कारण नियमित जांच में कमी रहती है।संगठनों की चुप्पी, साठगांठ का शक.!शहर के कुछ सामाजिक संगठन और ऑटो यूनियन, जो पहले अवैध वाहनों के खिलाफ आवाज उठाते थे, अब चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों का आरोप है कि ये संगठन केवल ओला-उबर जैसे प्लेटफार्मों पर ध्यान देते हैं, जबकि स्कूलों में चल रहे अवैध वाहनों पर उनकी नजर नहीं पड़ती। कुछ का मानना है कि इसके पीछे साठगांठ का खेल हो सकता है, जिसके कारण बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।क्या है समाधान?अभिभावकों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सख्त और निरंतर कार्रवाई की जरूरत है। RTO और यातायात पुलिस को नियमित रूप से स्कूली वाहनों की जांच करनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और ठेके पर ली गई गाड़ियों के दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके अलावा, अभिभावकों को जागरूक करने और अवैध वाहनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।आवाज उठाने की जरूरतइंदौर के बच्चों की सुरक्षा अब प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, और समाज की साझा जिम्मेदारी है। अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी से कोई नहीं बच पाएगा। स्थानीय प्रशासन और RTO को अपनी नींद तोड़कर बच्चों की जान की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। अभिभावकों से भी अपील है कि वे इस मुद्दे पर आवाज उठाएं और अपने बच्चों को असुरक्षित वाहनों में न भेजें। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जनकाहाई ग्राम पंचायत अंतर्गत कोटिहा टोला में मौत के साए में 24 घंटे, 10 लोगो ने पानी के बीच छत पर गुजारे रात्रिदिन जवा तहसील का जनकहाई गांव बना टापू, बाढ़ से घरों में कैद हुए ग्रामीण।