रीवा । रीवा जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में बीते 21 मार्च 2022 को मारपीट की घटना की खबर पत्रकारों द्वारा समाचार पत्र में प्रकाशित की गई थी जिस बात की रंजिश को रखते हुए महिला द्वारा पत्रकारों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में फर्जी एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी रीवा न्यायलय के द्वारा पत्रकार अमर मिश्रा, उमेश सिंह और प्रद्युम्न शुक्ला को 12 जुलाई 2025 को दोषमुक्त किये गए। सिविल लाइन थाना रीवा में 7 फरवरी 2022 की एक मनगढ़ंत घटना को आधार बनाकर जिले के तीन निर्भीक पत्रकार अमर मिश्रा, प्रदुम्न शुक्ला और उमेश सिंह के खिलाफ दर्ज किए गए फर्जी गैंगरेप और पॉक्सो (POCSO) मामले में रीवा न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्याय के इस युद्ध में सत्य की विजय हुई और तीनों पत्रकार सभी आरोपों से पूर्णतः दोषमुक्त करार दिए गए। यह फैसला न केवल इन पत्रकारों के लिए बड़ी राहत है बल्कि पुलिस-प्रशासन की मनमानी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई पर भी एक करारा तमाचा है। यह मामला उस समय रीवा जिले में चर्चा का विषय बन गया था जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन और सिविल लाइन थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा के कार्यकाल में यह चौंकाने वाला अपराध क्र. 258/22 धारा 376 (2) (n) 450,506 भा. दा. वि.के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप ऐसे गंभीर थे जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को तबाह करने के लिए काफी थे। पुलिस प्रशासन द्वारा पॉक्सो जैसे संवेदनशील कानून का दुरुपयोग कर इन पत्रकारों को फंसाने का यह प्रयास पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। न्यायपालिका पर विश्वास और सत्य की विजयलेकिन इन पत्रकारों ने हार नहीं मानी। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास रखा और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान एक-एक करके पुलिस द्वारा गढ़े गए झूठ की परतें खुलने लगीं। सबूतों के अभाव और पुलिस की जांच में गंभीर खामियों ने यह साबित कर दिया कि यह मामला सुनियोजित तरीके से इन पत्रकारों को फंसाने के लिए तैयार किया गया था।आखिरकार माननीय न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर गहन विचार करने के बाद तीनों पत्रकारों को दोषमुक्त करार दिया फर्जी मामले में फंसे तीनों पत्रकारो की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेंद्र नाथ चतुर्वेदी आनंद सिंह, अर्पित पांडेय व उनकी जूनियर टीम ने पैरवी की थी इन्होंने तीनों पत्रकारों को विजय दिलाई और तीनों पत्रकार 12 जुलाई 2025 को दोष मुक्त साबित हुए। यह फैसला दिखाता है कि भले ही सत्ता कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, न्याय की डगर पर सत्य की ही जीत होती है। यह उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर निर्दोषों को फंसाने का प्रयास करते हैं। अमर मिश्रा( हरित प्रवाह समाचार पत्र सम्पादक), प्रदुम्न शुक्ला और उमेश सिंह ने इस कठिन दौर में जिस धैर्य और साहस का परिचय दिया, वह वास्तव में प्रेरणादायक है। रीवा के न्यायिक इतिहास में मील का पत्थर रीवा कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल इन तीन पत्रकारों की बेगुनाही का प्रमाण है, बल्कि यह रीवा जिले के न्यायिक इतिहास में एक मील का पत्थर भी है। यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि न्यायपालिका आज भी आम आदमी के लिए आशा की किरण है और मीडिया की स्वतंत्रता पर हुए इस हमले को उसने विफल कर दिया। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में पुलिस प्रशासन ऐसी दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से बचेगा और कानून का सम्मान करेगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जवा तहसीलदार के नेतृत्व में अतिक्रमण मुक्त हुआ ग्राम पंचायत कोनी का आम रास्ता प्रतिबंधित अवैध नशीली कफ सिरप के साथ एक आरोपी को सिरमौर पुलिस ने किया गिरफ्तार
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