इंदौर – हर्ष सांवले।। आइए आज हम आपका इंदौर पुलिस के एक ऐसे दबंग अधिकारी से परिचय कराने जा रहे है जिनके खुद के अपने नियम हैं, अपना कानून हैं, मामला भले ही उनके क्षेत्राधिकार का ना हो लेकिन साहब सुनवाई करने में जरा भी देरी नहीं करते श्रीमान जी की नज़र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए नियमों का कोई महत्व नहीं और हो भी कैसे साहब टीआई जो ठहरे और अगर कोई सिविल मामला साहब की नज़र में आ जाए तो श्रीमान जी कानून और नियमों को ताक पे रख जज की भूमिका निभाते हुए थाने से ही दो पक्षों के बीच के पैसे के लेन देन को चुटकी बजाते सुलझा देते है ना तो साहब के द्वारा मामले में जांच की जाती है और ना ही बयान लिए जाते है और ना ही साहब लिखा पढ़ी में विश्वास रखते है। तो आगे बढ़ते हैं और आपका परिचय कराते है पुलिस अधिकारी श्री अजय राजौरिया से जो वर्तमान में इंदौर के पंढरीनाथ थाने पर थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ हैं कुछ दिन पूर्व ही साहब की पोस्टिंग नवीन थाने पर हुई हैं लेकिन साहब का रौब ऐसा की जो बोल दिया सो पत्थर की लकीर है क्या सही है और क्या गलत इससे इन्हें कोई लेना देना नहीं। क्या है मामला ?बीती 8 मई की रात को लगभग 9:15 बजे के आसपास अचानक पंढरीनाथ थाने पर पदस्थ आरक्षक जीतू एवं प्रधान आरक्षक गोकुल मालवीय पत्रकार एवं स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के सदस्य दुर्गेश धुलधोये के हरसिद्धि स्थित निवास पर पहुंचते हैं और उन्हें फोन कर घर के नीचे बुलाते है धुलधोये जैसे ही अपने घर से उतरकर पुलिसकर्मियों से नीचे बुलाने का कारण पूछते है तो कहा जाता है कि आपको टीआई साहब ने कार सहित थाना पंढरीनाथ बुलाया है कोई मामला है धुलधोये बिना देर किए अपनी कार बलेनो क्रमांक MP 09 DU 4732 की चाबी जैसे ही जेब से निकाली तो प्रधान आरक्षक गोकुल मालवीय ने गाड़ी की चाबी छीन ली और गाड़ी खुद चलाकर थाना परिसर में खड़ी कर दी और चाबी खुद रख ली पत्रकार द्वारा जब गाड़ी थाने लाने का कारण पूछा गया तो उन्हें नहीं बताया गया और कहां गया कि टीआई साहब से बात करे वो आ रहे है कुछ ही देर में टीआई साहब थाने पहुंचते है और पत्रकार दुर्गेश धुलधोये को कैबिन मैं बुलाकर कहते है कि इस वाहन के संबंध में हमें एक महिला से शिकायती आवेदन पत्र प्राप्त हुआ है कि आपके द्वारा गाड़ी की किश्त नहीं भरी जा रही है इसलिए गाड़ी थाने लाई गई है पत्रकार दुर्गेश धुलधोये ने तुरंत टीआई साहब के समक्ष दो पक्षों के बीच किया गया वैध नोटराइज्ड वाहन विक्रय अनुबंध लेख की कॉपी, वाहन का डुप्लीकेट आरसी कार्ड, प्रस्तुत किया और बताया कि शिकायतकर्ता और उनके बीच पैसे के लेन देंन के संबंध में वाहन विक्रय अनुबंध लेख खरगोन में हुआ है ना कि इंदौर में और यह सिविल मामला हैं जिस पर न्यायालय फैसला करेगा इस पर टीआई साहब भड़क उठे और कह दिया कि हम किसी अनुबंध लेख को नहीं मानते कल शाम आप बैंक का स्टेटमेंट, ओरिजिनल वाहन विक्रय अनुबंध लेख, गाड़ी का ओरिजिनल आरसी कार्ड, और एक अतिरिक्त चाबी मुझे जमा करे होगी उसके बाद ही शिकायतकर्ता को थाने बुलाकर दोनों पक्ष के बयान करवाए जाएंगे फिर देखा जाएगा कि किसे वाहन का आधिपत्य देना है जब तक वाहन थाने पर ही जब्त रहेगा इस पर धुलधोये द्वारा थाने पर खड़े वाहन के जब्ती संबंधी दस्तावेज मांगे गए तो साफतौर पर उन्हें मना दस्तावेज देने से मना कर दिया जिसके बाद पत्रकार दुर्गेश धुलधोये अपने थाने पर खड़े जब्त वाहन का फोटो खींचने लगे तो थाना स्टाफ द्वारा उनका मोबाइल छीन कर फोटो डिलीट करवाए गए जिसके बाद पुलिस के इस रवैया से हताश होकर वे देर रात अपने घर के लिए निकल गए धुलधोये के अनुसार अगले दिन 9 मई की रात को तकरीबन 9 बजे के आसपास टीआई साहब द्वारा मंगाए गए ओरिजिनल दस्तावेज लेकर जब थाने पहुंचे तो थाने पर उनका वाहन नहीं था जिसके संबन्ध में उनके द्वारा प्रधान आरक्षक गोकुल मालवीय से पूछा गया तो बताया गया कि टीआई साहब ने वाहन दूसरे पक्ष को सौंप दिया है अब आप न्यायालय जाए यह सुनते ही पत्रकार दुर्गेश धुलधोये ने सवाल जवाब किए और कहां की बिना उनकी सहमति और बयान के कैसे अन्य पक्ष को वाहन सौंप दिया गया जिस पर मालवीय जी बौखला गए और कहां की ज्यादा समझदार मत बन तू पत्रकार है कही से भी आवेदन लेकर फर्जी मुकदमे में जेल पहुंचा देंगे सारे सवाल जवाब भूल जायेगा जिस से डरकर धुलधोये अपने घर चले गए और अगले ही दिन न्यायालीन प्रक्रिया शुरू कर दी। View this post on Instagram तो देखा आप लोगों ने कैसे थाना प्रभारी साहब और उनके थाने पर पदस्थ कर्मचारियों ने मिलकर अपने अधिकारों एवं न्याय प्रक्रिया से परे जाकर एक सिविल मामले को फौजदारी का रंग देते हुए खुद ही फैसला सुना दिया।अगर पुलिस अधिकारी अपने पद और अधिकारों को भूल ऐसे ही जज मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाकर न्यायालीन मामलों में सुनवाई करने लग गए तो फिर भविष्य में जज साहब की तो आवश्यकता ही नहीं होगी पुलिस द्वारा ही सारे क्रिमिनल और सिविल मामलों का थाने से ही निराकरण कर दिया जाएगा ।न्यूज नेशनल वर्ल्ड द्वारा उक्त मामले में प्रधान आरक्षक गोकुल मालवीय से जानकारी लेना चाही तो वे भी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए और कहने लगे कि पूरा मामला टीआई साहब के संज्ञान मैं हैं आप उनसे बात कर लीजिए जिसके बाद टीआई साहब से भी उनके सरकारी एवं निजी मोबाइल नंबर पर मामले की जानकारी हेतु संपर्क किया गया लेकिन श्रीमान के दोनों नंबर बंद आए। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दुष्कर्म के मामले में रीवा सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज,आरोपी हुआ गिरफ्तार भार्गवी वाइन्स शराब दुकान जवा के ठेकेदार की दबंगई लगातार जारी
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