Ar K ✍️। किसी का घर बर्बाद करना हो तो उस घर के लड़के को शराबी या जुआरी बना दो…आज खेल के नाम पर आनलाइन जुआ खिलवाया जा रहा है, सरकारी शराब के ठेके कस्बों और गांवों में भी उपलब्ध है और ज्यादातर लड़कियां तो टैलेंट के नाम पर इंस्टाग्राम पर मुजरा या अंगप्रदर्शन ही कर रही हैं..!!न्यूज़ चैनलों पर डिबेट होनी चाहिए शिक्षा, चिकित्सा, महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा पर…मगर चर्चा होती है धर्म, जाति, हिंदू और मुस्लिम पर..!!दरअसल राजनेता को अपनी सभाओं, रैलियों और सुनियोजित दंगों के लिए खलिहर बेरोजगार युवाओं की आवश्यकता होती है..!! View this post on Instagram स्वदेशी अपनाओ का राग अलापने वाले नेता अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं और भटके हुए नौजवान पार्टी के झंडे, बैनर और पोस्टर उठाते हैं..!!समाज में सांप्रदायिकता और जातिवाद का ज़हर घोल कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले तो ऐश करते हैं..और युवा….?? अब हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले नाबालिग बच्चे नेता जी के साथ घूमने वाले लोगो के पीछे हैं और अंधकार में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।रेस्टोरेंट का नास्ता, स्कॉर्पियो/फार्च्यूनर की सीट और जगह जगह दुग्गी क्रिकेट का उद्दघाटन इन बच्चों को सपनो की रंगीन दुनिया मे पहुँचा दे रहा।ऊपर से चार ज़गह बैनर लगने और पेपर में छप जाने का सुख तो जैसे इनके लिए प्रसिद्धि का अंतिम पायदान है। नेता जी के पीछे घूमने वाले लोग वो हैं जिनकी जिंदगी ऐसी स्थिति में आ चुकी है कि चाह कर भी वे न नेता से आगे निकल सकते हैं न ही कोई धंधा पानी रोजगार करके दो पैसा अपने एवं परिवार के लिए कमा सकते है।लेकिन इन लोगो ने इन बच्चों की जो जिंदगी बिगाड़ी है वो कभी नही सुधर सकती।जिस उम्र में इनको अपने कैरियर भविष्य पर ध्यान देना चाहिये मगर इन्हें तो समाजसेवा का परवाना चढ़ा है वो भी पिताजी के पैसे से… अभिभावकों से निवेदन है कि इन बच्चों को समझाइये कि पढ़ लिखकर कुछ आय का अच्छा स्रोत बना लें फ़िर करेंगे तथाकथित समाजसेवा और नेतागिरी। अगर अभिभावक आज नही रोक पाये इस ट्रेंड को तो कल को आपका खेत, मकान बेचकर, लोन कराकर यही लड़के जिंदगी जियेंगे, क्योंकि ये सब नेता तो किसी जन्म में न बन पाएंगे।कारण ये है कि ऊपर वाले नेताजी के लाइन में ये सबसे नीचे की कड़ियाँ हैं जिनका एकमात्र काम उपयोग होना है !……… …… ……… …… ……… …… ….. ….. …..समझाइये इन्हें कि ये समय फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायो, इकोनोमिक्स, हिस्ट्री, ज्योग्राफी, मैथ्स, हिंदी, इंग्लिश के शब्दों, थिअरिज,प्रैक्टिकल्स को अपने कानों में बैठाकर दिमाग मे घुसाने का है न कि अपने कानों को..भैया भैया भैया सुनने का अभ्यस्त बनाने का है।भविष्य में यही लोग बोझ बनते हैं देश, समाज, परिवार पर।……… …… ……… …… ……… …… ….. ….. …..नोट: पोस्ट केवल सामाजिक चिंतन कर युवाओं को जागरूक करने का एक माध्यम है।किसी को व्यक्तिगत छीटाकशी व नीचा दिखाने का उद्देश्य नहीं है।जय हिंद 🇮🇳🙏🙏🙏Ar K ✍️ मानवसेना @highlight #बेटेहैंकोईखिलौनानही Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मुख्यमंत्री के हाथों किया गया जिला सत्र न्यायालय भवन एवं नवीन विश्राम गृह का लोकार्पण सिंहस्थ पूर्व मिलेगी रतलाम-झाबुआ 10 मीटर चौडे रोड की सुविधा