भोपाल— मुस्ताअली बोहर, अधिवक्ता एवं लेखक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में तीखी बहस हो गई। जिस तरह से जेलेंस्की ने ट्रंप की आखों से आखे मिलाकर बात की उसके लिए उनकी सराहना तो बनती है। दुनिया के एक बड़े ताकतवर देश रूस से युद्ध लड़ते हुए ही दुनिया की एक और महाशक्ति से पंगा लेना हर किसी के बूते की बात नहीं है। मुमकिन है रूस से युद्ध के मोर्चे पर लड़ते हुए ट्रंप से पंगा लेना यूक्रेन को भारी पड़ जाए। वैसे भी इस बहस के बाद ट्रंप ने यूक्रेन को दी जानी वाली अरबों डाॅलर की मदद बंद करने की बात कह दी थी। बावजूद इसके जेलेंस्की ने ट्रंप की हां में हां मिलाने के बजाए आत्मसम्मान के साथ ट्रंप को उनकी ही भाषा में जवाब दिया। जब नमस्ते ट्रंप करके अमेरिका को खुश करने की कोशिश की जाती रही हो वहीं ट्रंप को उनके ही घर में आईना दिखाने का कारनामा जेलेंस्की ने कर दिया। ट्रंप के साथ हुई तीखी बहस के बाद अब यूक्रेन को दुनिया के अन्य देशों का भी समर्थन मिल रहा है। दोनों के बीच हुई इस तकरार ने अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। ट्रंप और जेलंेस्की की बीच हुई तीखी बहस ने सारी दुनिया को झकझोर दिया है। यूरोप के कई देश जेलेंस्की के पक्ष में आ गए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस को हमलावर और यूक्रेन को पीड़ित देश बताया है। मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन की मदद करना और रूस पर प्रतिबंध लगाने का हमारा फैसला सहीं था। जर्मनी के संभावित चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि हम यूक्रेन के साथ खड़े हैं। हमें कभी हमलावर और पीड़ित को लेकर भ्रमित नहीं होना चाहिए। पोलैंड के प्रधानमत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि यूक्रेनी मित्र आप अकेले नहीं हैं। एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिशल ने कहा कि उनका देश जेलेंस्की और यूक्रेन के साथ एकजुट है। स्लोवेनिया, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, रोमानिया, क्रोएशिया, फिनलैंड, एस्टोनिया, लक्जमबर्ग, पुर्तगाल, मोल्दोवा, स्वीडन, लिथुआनिया, लातविया, चेक गणराज्य, स्पेन, नाॅर्वे, नीदरलैंड और बेल्जियम सहित अन्य देशों ने भी यूक्रेन और जेलेंस्की के प्रति एकजुटता दिखाई है। इतना ही नहीं इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने यूरोपीय संघ और अमेरिका की बीच शिखर सम्मेलन का आव्हान करने की बात कही है। कुल मिलाकर, यूक्रेन जैसे छोटे देश ने अमेरिका को उसकी हैसियत उसी के घर पर दिखा दी।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच बातचीत तीखी बहस के साथ खत्म हुई। जेलेंस्की अमेरिका में ओवल दफ्तर में खनिज समझौते के लिए पहुंचे थे लेकिन रूस-यूक्रेन जंग के सवाल ट्रंप और उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच काफी गहमागहमी हो गई। ट्रंप ने जेलेंस्की पर करोड़ों लोगों की जान से खेलने का आरोप लगाया और कहा कि वो शांति नहीं चाहते। जेलेंस्की तीसरे विश्वयुद्ध का जोखिम ले रहे हैं। ट्रंप का साफ कहना था कि किसी भी संभावित संघर्ष विराम के लिए यूक्रेन को थोड़ा झुकना होगा क्योंकि वो रूस के साथ जंग नहीं जीत सकते। दोनों के बीच जुबानी जंग इतनी बढ़ी कि एक वक्त जेलेंस्की को बोला पड़ना कि जोर से मत बोलिए। इस घटनाक्रम से रूस में तो खुशी का माहौल है। पूर्व रूसी राष्ट्रपति, रूस की सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख और पुतिन के सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि ओवल ऑफिस में जेलेंस्की के साथ सही सुलूक हुआ। रूसी नेताओं का कहना है कि जेलेंस्की के अड़ियल रवैये ने रूस-यूक्रेन के बीच समझौता कराने का ट्रंप का बड़ा सपना तोड़ दिया। इस तकरार ने रूस को एक और अतिरिक्त मौका मुहैया करा दिया है।
यहां ये भी जानना जरूरी है कि आखिर इस तकरार के मूल में क्या है। दरअसल, अमेरिका और यूक्रेन के बीच एक खनिज सौदे पर बातचीत चल रही थी, लेकिन यह सौदा हो नहीं पाया। इस सौदे से पहले वाले सौदे में यह बात सामने आई थी कि अमेरिका, यूक्रेन के खनिजों से 500 अरब डॉलर कमाएगा। लेकिन आखिरी ड्राफ्ट में यूक्रेन के लिए बेहतर शर्तें थीं। इस सौदे का मूल सिद्धांत यह था कि यूक्रेन की खनिज संपदा के बदले अमेरिका उसे मदद और निवेश देगा। यह विचार पिछले साल अक्टूबर में जेलेंस्की की विजय योजना में सामने आया था जो समझौता होने वाला था, वह एक संयुक्त पुनर्निर्माण निवेश कोष बनाने के लिए था। इस कोष पर अमेरिका का नियंत्रण होता और यह अमेरिकी कानूनों के तहत काम करता। यूक्रेन खनिज, तेल, गैस, बंदरगाह और टर्मिनल जैसे अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई का 50 प्रतिशत इस कोष में डालता। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कोष में मौजूदा खनन और प्राकृतिक संसाधन व्यवसाय शामिल नहीं होते यानी यूक्रेन की प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली वर्तमान कमाई इस कोष में नहीं जाती। इसके अलावा, इस कोष का उद्देश्य यूक्रेन में ही पुनर्निवेश करना था। यह पुनर्निवेश कम से कम सालाना होता ताकि यूक्रेन की सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा मिले। विस्तृत नियम और शर्तें बाद में बातचीत करके तय की जानी थीं। कहा जाता है कि यूक्रेन के पास सौ से ज्यादा प्रमुख खनिजों के भंडार हैं, जिनमें टाइटेनियम, लिथियम, दुर्लभ खनिज और 19 मिलियन टन ग्रेफाइट शामिल हैं। हालांकि, कीव मानता है कि 350 अरब डॉलर के संसाधन अब रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में हैं। यूक्रेनी थिंक टैंक का अनुमान है कि देश के लगभग चालीस प्रतिशत धातु संसाधन अब रूस के नियंत्रण में हैं। इसके अलावा, यूक्रेन में अभी कोई भी व्यावसायिक रूप से चलने वाली दुर्लभ खनिज की खान नहीं है। इसलिए, इन खनिजों का सही मूल्य जानने के लिए बहुत अधिक खोजबीन की जरूरत है। संसाधनों के मौजूदा नक्शे 30-60 साल पुराने हैं। ये पुरानी भूवैज्ञानिक रिपोर्ट हैं जिन्हें आधुनिक तरीकों से सत्यापित करने की आवश्यकता है। बताया ये भी जाता है कि खनिजों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थित है, यूक्रेन के बड़े हिस्से अब बारूदी सुरंगों से भरे हुए हैं। व्यावसायिक कार्यों को शुरू करने के लिए पहले इन्हें सुरक्षित रूप से हटाने की आवश्यकता है। ट्रंप, जेलेंस्की के साथ दुर्लभ खनिजों को लेकर समझौता करना चाहते थे और जेलेंस्की अमेरिकी मदद और समझौते के लिए ही अमेरिका गए थे। लेकिन ये बातचीत किसी और दिशा में जा मुड़ी और एक नए मसले को जन्म दे दिया।  
  दुनिया भर में अब इस बहस को लेकर चर्चा हो रही है। ट्रंप के रैवेये से नाराज देशों के नेताओं का कहना है कि अब साफ बोलने के समय आ गया है। इस युद्ध में अमेरिकी नेतृत्व ने पाला बदल लिया है लेकिन अमेरिकी लोगों ने पाला नहीं बदला है। जेलेंस्की के पक्ष में सहानुभूति दिखाई दे रही है। कहा जा रहा है कि वो कोई तानाशाह नहीं थे न कोई बदनाम राजनेता थे, वो यूक्रेन के राष्ट्रपति हैं जो 21वीं सदी में सबसे भयावह आक्रमण से पीड़ित देश के नेता हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चाहते थे कि जेलेंसकी उनके सामने झुकें। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कई बार गलत तथ्य और आंकड़े पेश किए और जेलेंस्की ने उन्हें दुरूस्त किया। कुल मिलाकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर यूक्रेन के दुलर्भ खनिज खजाने पर गड़ी है। रूस से साथ चल रहे युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप अपना हित साधना चाहते हैं लेकिन पिछले कुछ वक्त से जिस तरह अमेरिका की सुर बदले और वो रूस का समर्थन करते नजर आया उसे जेलेंस्की ने भांप लिया है। यही वजह है कि जेलेंस्की तमाम दबाव के बावजूद झुके नहीं। बहरहाल, ट्रंप को उनके ही घर में आंखे दिखाने और उनके सामने ना झुकने के कारण जेलेंस्की पूरी दुनिया में अमरिकी पीड़ित देशों के नेता के रूप में उभरे हैं। जेलेंस्की ने अमरिकी विरोधियों को एक मंच पर आने के लिए मजबूर कर दिया है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि ये तकरार किस रूप में खत्म होती है।

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