मुचलके के बाद सभी हुए रिहा।

फर्जी नामांतरण पर फरियादी द्वारा नही की गई अपील।

बिना अनुमति लगाया गया था टेंट- तहसीलदार सिरमौर

सिरमौर/ रीवा जिला अंतर्गत सिरमौर नगर मे भू- माफिया द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आदिवासी धनपत कोल की जमीन को फर्जी रजिस्ट्री करा ली गयी थी। जिसे लेकर
पीड़ित आदिवासी धनपत कोल ने सिरमौर के राजस्व विभाग, कलेक्टर, कमिश्नर रीवा को कार्यवाही हेतु आवेदन दिया गया था लेकिन पीड़ित को न्याय नहीं मिला।


तब उक्त मामले को लेकर बिरसा मुंडा विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुकांत कुशवाहा ने गंभीरता से लेते हुए पीड़ित धनपत कोल के साथ 24 फरवरी से सिरमौर एसडीएम कार्यालय के सामने भूंख हड़ताल पर बैठ गए थे जिस पर अपर कलेक्टर रीवा ने 15 दिवस के अंदर कार्यवाही का आश्वासन दिये थे इसके बाद भी अनशनकारियो ने अपनी 3 मांगों को लेकर आज 6वे दिन भी भूख  हड़ताल पर बैठे थे तभी जिला पुलिस ने सुवह करीब 11 बजे सभी अनशनकारियों को अपने कस्टडी में लेकर सामुदायिक भवन रीवा में रखा गया। बाद में सभी को मुचलके में छोड़ दिया गया।


इस संबंध में बिरसा मुंडा विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुकांत कुशवाहा ने बताया कि मेरे द्वारा तीन मुख्य मांगो को लेकर भूख हड़ताल किया जा रहा था जिनमे पहला पीड़ित धनपत कोल को भू-स्वामित्व दिया जाए और दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
दूसरा मप्र. शासन की आराजी क्र.-259/2 एवं 261/1 का आदिवासी परिवार को पट्टा दिया जाए।


तीसरा तत्काल सिरमौर/सेमरिया अनुविभागीय अधिकारी का स्थानांतरण किया जाय लेकिन शांति पूर्ण ढंग से भूख हड़ताल कर हम लोगो को अचानक जिला पुलिस बल के द्वारा अपने कस्टडी लिया गया। यदि 15 दिन बाद कोई कार्यवाही नही हुई तो कलेक्ट्रेट के सैम के अनशन प्रदर्शन किया जाएगा।


वही सिरमौर तहसीलदार बिन्दू तिवारी ने बताया कि 3 मांगो को लेकर अनशन किया जा रहा था जिसकी जांच की जा रही है साथ ही इनके द्वारा बिना अनुमति के टेंट लगाकर भूख हड़ताल किया जा रहा था और अनशनकारियों का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा था जिसे देखते हुए कस्टडी में लिया गया है

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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