इंदौर । । मध्यप्रदेश के मठ-मंदिरो का सन 1947 के शासकीय रिकॉर्ड के आधारपर वर्गीकरण होना चाहिए।जिससे निजी सम्पतियाँ शासकीय वह किसी अन्य तरह के अतिक्रमण से मुक्त हो सके।यह कहना है मठ-मंदिर पुजारी संगठन का ,उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के अधिकारियों पर मंदिरों के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इस संबंध में संगठन के महंत श्री तरुण जी ने बताया कि शासन द्वारा मंदिर और मंदिर संपत्ति/भूमि को सरकारी नियंत्रण में लेने से धार्मिक संप्रदाय के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।संगठन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इंदौर में इस मामले से सम्बंधित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश शासन धर्मस्व विभाग, राजस्व विभाग, आयुक्त इंदौर, कलेक्टर इंदौर को नोटिस जारी करने की मांग की है।संगठन के अध्यक्ष ऋषभ बैरागी ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी मंदिरों की भूमि पर अवैध कब्जा कर रहे हैं और मंदिरों की संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं।संगठन ने माननीय उच्च न्यायालय से प्रार्थना की है कि धार्मिक संप्रदाय के पुजारियों को अनुच्छेद 26 में प्राप्त मौलिक अधिकार लागू किया जाए और मंदिरों को वर्गीकृत कर अतिक्रमण कब्ज़ा भूमियों से हटाकर मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त किया जाए। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रहमत, बरकत और फज़ीलत का महीना है रमज़ान बगलामुखी माताजी नलखेडा में आयोजित मां शबरी जन्मोत्सव में झाबुआ के बलवीरसिंह डामर ने की शिरकत, भव्य आयोजन में हुआ सम्मान समारोह