सिंगरौली/ एनसीएल के नेहरू शताब्दी चिकित्सालय जयंत के ऐसे चार चिकित्सक हैं जो चिकित्सालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के बाद सीधे बैढ़न नर्सिंग होम में आकर पूरे दिन प्रेक्टिस करते रहते हैं। इन चिकित्सको को रोकने-टोकने के लिए नेहरू चिकित्सालय के सीएमओ का साहस भी नही जुटा पा रहे हैं।

गौरतलब है कि ऊर्जाधानी का सबसे बड़ा हॉस्पटिल जयंत स्थित एनसीएल का नेहरू शताब्दी चिकित्सालय को दर्जा प्राप्त है। एनसीएल के द्वारा यहां करीब-करीब अधिकांश स्वास्थ्य संबंधी उपकरण तथा मशीनरी के साथ पर्याप्त मात्रा में स्वास्थ्य सेवक भी नियुक्त भी किये गये हैं। ताकि मरीजो को भी कही भटकना ना पड़े। किन्तु आरोप है कि नेहरू शताब्दी चिकित्सालय धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो रहा है। यहां उक्त चिकित्सालय में पदस्थ उक्त चिकित्सक केवल अपनी हाजिरी दर्ज कराने के बाद सीधे वाहन उठाये और बैढ़न चले आते हैं। ऐसे चिकित्सको की संख्या करीब चार है। नेहरू चिकित्सालय में इस बात की चर्चाएं हैं कि उक्त चारो चिकित्सक अपनी सेवाएं ज्यादातर बैढ़न स्थित एक नर्सिंग में दे रहे हैं। बताया जाता है कि जब से नेहरू चिकित्सालय में उक्त चार चिकित्सको की पदस्थापना हुई है और कुछ महीनो बाद बैढ़न में एक निजी नर्सिंग होम को खरीद कर उसमें उक्त चिकित्सक संयुक्त रूप से नर्सिंग होम संचालित किया हुआ है। जहां 24 घंटे में 15-16 घंटे समय यही दे रहे हैं। यही नही एक चिकित्सक हैं तो नेहरू चिकित्सालय के बदले बैढ़न में हमेशा मौजूद रहते हैं और अपने खुद के नर्सिंग होम का देखरेख भी कर रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि इसकी कई बार शिकायत एनसीएल सिंगरौली के सीएमडी के यहां भी की जा चुकी है। इसके बावजूद इनपर एनसीएल प्रबंधन किसी प्रकार का शिकंजा नही कस पा रहा है। जिसके चलते नेहरू चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले मरीजो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल नेहरू चिकित्सालय के उक्त चिकित्सक के ड्यूटी को लेकर इन दिनों जहां चर्चाओ का विषय बना हुआ है। वही प्रबंधन की उदासीनता पर भी तरह-तरह की उंगलियां उठने लगी है।
राजनैतिक दखल से हुआ था स्थानांतरण निरस्त
यहां बताते चले कि अपनी कार्यप्रणालियों से चर्चाओं में आये उक्त चिकित्सको का तबादला एनसीएल सिंगरौली के अन्य परियोजनाओं के चिकित्सालयों में कर दिया गया था। लेकिन चिकित्सको को परियोजनाओं के अस्पताल रास नही आ रहे थे वे राजनीति का सहारा लेकर करीब दो साल पूर्व तत्कालीन सीएमडी पर इतना दबाव दिलाया गया कि वे मजबूर होकर उक्त चर्चित चिकित्सको का तबादला निरस्त करना पड़ा और इसके पीछे एक ही कारण बताया जा रहा है कि वे चिकित्सक अपने नर्सिंग होम व क्लीनिक तथा पैथालॉजी में समय न दे पाते। शायद इसीलिए उन्हे धन कमाने के चक्कर में राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते अपने रणनीति में सफल हो गये और अब खुलेआम ज्यादातर समय अपने नर्सिंग होम एवं क्लीनिक में देते रहे। इन्हे रोकने-टोकने वाला कोई नही है। इसका भरपूर फायदा कथित चिकित्सक उठा रहे हैं।
ड्यूटी आने-जाने वाले का सीसीटीव्ही फुटेज होगा साक्ष्य
एनसीएल के नेहरू चिकित्सालय जयंत में प्रबंधन के द्वारा चप्पे-चप्पे सीसीटीव्ही लगाये गये हैं। यदि सीसीटीव्ही फुटेज को खंगालकर अध्ययन करे तो अस्पताल में ड्यूटी आने वाले चिकित्सको एवं अन्य स्टाफो का भेद खुल जाएगा। कौन कब आ रहा है और कौन कब कितने बजे चिकित्सालय से रवाना हो रहे हैं सीसीटीव्ही की एक साक्ष्य के रूप में प्रमाण है। यहां के कई प्रबुद्धजनों के साथ-साथ विपक्षी दलो के नेताओं का भी आरोप है कि यहां के कई चिकित्सक अपने निजी नर्सिंग होम एवं क्लीनिको में ज्यादातर समय दे रहे हंै और नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में सबसे ज्यादा परेशानी विस्थापित परिवारो के साथ-साथ दूर दराज से आने वाले मरीजो की ज्यादा हो रही है। आरोप यहां तक है कि दूर दराज आने वाले मरीजो को आर्थिक मार ज्यादा पड़ती है। इसके पीछे एक नही कई कारण गिनाये जाते हैं।

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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