कौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता?रात को जाग कर भी वह नहीं सोता।वह तो अतुल सुभाष था, ना वो रोता,वह आखिर कब तक प्रताड़ना सहता!अपना दर्द वह किस-किस को कहता।कौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता?रात को जाग कर भी वह नहीं सोता।इस कलयुग में क्या-क्या सेटल होता,क्या? पुलिस, क्या? जज सबको देता!इन लोगों के लिए सिर्फ एटीएम बनताpकौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता?रात को जाग कर भी वह नहीं सोता।क्या? अर्धांगिनी का मन भी ऐसा होता,जो पवित्र रिश्ते को भी आग लगा देता!माता-पिता को भी बिलखता छोड़ देता।कौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता?रात को जाग कर भी वह नहीं सोता।वह शिखर ही था जो मजबूर कर गया,अपने कलेजे के टुकड़े को दूर कर गया!सोचो, अतुल जिंदगी को निष्ठुर कर गया।संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन साइबर अपराधों, सुरक्षित यातायात व नशे के विरुद्ध जागरूकता के लिए इंदौर पुलिस का अभिनव प्रयास। इन्दौर शहर और बढ़ते अवैध कारोबार