खाली कुर्सी के लिए रुठ जाते नेता,ऐसे मांगते विभाग जैसे कोई क्रेता।एक-दूजे को फूटी आँखों ना सुहाते,मजबूरी में गलबहियाँ कर बैठ जाते!सत्ता में खुद को भागीदार बना पाते। खाली कुर्सी के लिए रुठ जाते नेता,ऐसे मांगते विभाग जैसे कोई क्रेता।कोई किसी के पक्ष में कोई ख़िलाफ,नहीं पता था बहुमत का भी है सैलाब!बैठा जो विपक्ष में करता रहा विलाप। खाली कुर्सी के लिए रुठ जाते नेता,ऐसे मांगते विभाग जैसे कोई क्रेता।देखो मनाया गया शिंदे को बार-बार,वे मुंबई से सतारा भले करते रहे वार!बड़े निर्णय से बचते रहे क्यों? सरकार। खाली कुर्सी के लिए रुठ जाते नेता,ऐसे मांगते विभाग जैसे कोई क्रेता।अजित दादा को सत्ता से बड़ा प्यार,भाजपा से नहीं इनकी कोई भी रार!कभी-न-कभी तो लगेगी ही नैया पार। खाली कुर्सी के लिए रुठ जाते नेता,ऐसे मांगते विभाग जैसे कोई क्रेता।दादा तो बरसों से कर रहे हैं इंतजार!मुख्यमंत्री बनने का है इनका विचार,पता नहीं इन्हें कब मिलेगा ये उपहार? संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन संभाग स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय त्यौथर का रहा सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन रीवा आरटीओ कर्मचारियो का बड़ा कारनामा- ट्रक ड्राइवर से लूटे 20 हजार रुपये, ड्राइवर के साथ किए मारपीट