भोपाल– मुस्ताअली बोहरा ।। यूपी का संभल अब संभल रहा है। यहां मस्जिद के सर्वे को लेकर हुए बवाल और हिंसक उपद्रव ने ये सवाल पैदा कर दिया कि जो कुछ हुआ क्या वो एकपक्षीय आदेश की क्रिया के परिणामस्वरूप प्रतिक्रिया थी। हालांकि, जो कुछ हुआ उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता लेकिन जो हुआ वो क्यूं हुआ उसकी जड़ जाना जरूरी है। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य शहर संभल में एक टीले पर बनी शाही जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है। इस मस्जिद के सर्वे और हुए बवाल को लेकर देश भर में तरह तरह की बातें चल रहीं हैं। लेकिन, हकीकत तो ये भी है कि मस्जिद का दोबारा सर्वे कराया जा रहा है। जहां तक अदालत के आदेश का सवाल है तो विवाद भी यहीं शुरू हुआ। क्योंकि, अदालत में जिस दिन वाद दायर किया गया उसी के कुछ घंटों बाद ही सर्वे का आदेश दे दिया गया और फिर सर्वे के लिए तुरंत टीम भी पहुंच गई। जब इस वाद की सुनवाई हो रही थी तो इस दौरान मुस्लिम पक्ष का वकील भी मौजूद नहीं था। इन्हीं सब चीजों को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया। ये मस्जिद फिलहाल भारत के पुरातत्व सर्वे की निगरानी में है और एक संरक्षित इमारत है। ये इमारत साल 1920 में भारतीय पुरातत्व सर्वे के तहत संरक्षित इमारत घोषित हुई थी। ये राष्ट्रीय महत्व की इमारत भी है। ये पहली बार नहीं है कि इस जामा मस्जिद को लेकर विवाद हुआ। सन 1976 में मस्जिद के इमाम की हत्या कर दी गई थी इसके बाद भी उपद्रव हुआ था। हिंदु पक्ष का दावा है कि यहां मंदिर था जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ये पहली बार है जब मस्जिद को लेकर अदालत में कोई वाद दायर हुआ है। बीते मंगलवार को ये वाद दायर हुआ था और बिना विपक्ष को सुने ही सर्वे का आदेश दे दिया गया। हैरानी की बात ये भी है कि दोपहर को वाद दायर हुआ और इसी दिन अदालत के आदेश के बाद शाम को सर्वे टीम भी पहुंच गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अलावा दूसरे पक्ष के वकील भी मौजूद नहीं थे। वहीं, मस्जिद समिति का कहना है कि उन्हें वाद दायर होने की कोई जानकारी नहीं मिली थी और अदालत के आदेश के बाद ही जिला पुलिस और प्रशासन की तरफ से सर्वे को लेकर जानकारी दी गई। मुस्लिम पक्ष से जुड़े अधिवक्ता मसूद अहमद का कहना है कि ये वाद दायर कर इस इबादतगाह को विवादित करने का प्रयास किया गया है जबकि रिपोर्ट देने के लिए 29 नवंबर तक का समय है। इससे जाहिर होता है कि सुनियोजित तरीके से विवाद पैदा किया जा रहा है। इससे पहले अदालत में पहले से कोई विवाद नहीं है। सिविल जज ने भी अपने आदेश में कहा है कि अदालत में इसे लेकर कोई कैविएट लंबित नहीं है। हिंदूवादी संगठनों ने हाल के सालों में इस मस्जिद के कल्कि मंदिर होने के दावे पहले भी किए हैं लेकिन इस बार इसे अदालत में ले आया गया है।
संभल की इस शाही जामा मस्जिद के हिंदू मंदिर होने का दावा कर अदालत में वाद दायर किया गया है, जिसके बाद इस धर्मस्थल को लेकर कानूनी विवाद पैदा हो गया है। ये वाद मंगलवार को ही दायर हुआ और इसी दिन शाम को एडवोकेट कमिश्नर ने पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में मस्जिद का सर्वे किया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में हुए इस सर्वे का वीडियो भी बनाया गया है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कई याचिकाकर्ताओं की तरफ से संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में मंगलवार को ही वाद दायर किया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अलावा दूसरे पक्ष के वकील मौजूद नहीं थे। शायद इसी वजह से मामला उलझ गया जिसने बाद में उग्र रूप ले लिया।
हिंदू पक्ष का दावा है कि जहां ये विशाल मस्जिद बनी हैं वहां कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इन दावों को बेबुनियाद बताया है। मस्जिद समिति से जुड़े लोगों का भी कहना है कि वाद दायर होने की जानकारी हमें नहीं दी गई। शाम को संभल पुलिस की तरफ से बताया गया कि हमें मस्जिद परिसर पहुंचना है क्योंकि वहां अदालत के आदेश पर सर्वे होना है। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि मस्जिद होने को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं है, हिंदू संगठन जरूर कभी-कभी इसे लेकर विवाद पैदा करते रहे हैं।                   वहीं, याचिकाकर्ता महंत ऋषिराज गिरी का कहना है कि जिस जगह पर ये मस्जिद है वहां हरिहर मंदिर था, इसकी बनावट भी मंदिर जैसी ही है, हम अपने धर्मस्थल को वापस हासिल करना चाहते हैं और इसके लिए ही कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। मस्जिद में सर्वे कार्रवाई की जानकारी होने के बाद स्थानीय सांसद जिया उर रहमान बर्क के अलावा कई और मुस्लिम नेता मस्जिद पहुंच गए थे। अदालत में इस मामले में अगली सुनवाई अब 29 नवंबर को होगी। 
  संभल की ऐतिहासिक जामा मस्जिद किस काल में बनी है, इसे लेकर विवाद है। हिंदू पक्ष ने अदालत में दावा किया है कि इसे मुगल शासक बाबर के आदेश पर एक हिंदू मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बाबर ने इस मस्जिद की मरम्मत करवाई थी। बाबर ने लोधी शासकों को हराने के बाद 1526 में संभल का दौरा किया था। लेकिन बाबर ने जामा मस्जिद का निर्माण नहीं करवाया था। मुमकिन है कि मस्जिद का निर्माण तुगलक काल में हुआ हो। हिंदू पक्ष की तरफ से दायर याचिका में भारत सरकार के गृह मंत्रालय, सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत के पुरातत्व सर्वे, पुरातत्व सर्वे के मेरठ जोन के अधीक्षक, संभल के जिलाधिकारी और मस्जिद की प्रबंधन समिति को वादी बनाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि जो इमारत जामा मस्जिद है वही सदियों पुराना हरिहर मंदिर है जो भगवान कल्कि को समर्पित है। याचिका में ये भी कहा गया है कि ये विश्वास है कि भगवान कल्कि भविष्य में संभल में ही अवतार लेंगे।
  संभल में बवाल के बाद पुलिस ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल समेत करीब ढाई हजार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि हमारे सांसद तो घटना के वक्त बेंगलुरू में थे लेकिन उनका नाम भी शामिल कर लिया गया। अखिलेश ने ये भी कहा कि आखिर दोबारा सर्वे कराए जाने का क्या मकसद है। मालूम हो कि बर्क और सुहेल पर बलवा कराने की साजिश का आरोप है। वहीं तीन महिलाओं समेत 27 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सीओ अनुज चौधरी, एसपी के पीआरओ संदीप कुमार, दरोगा दीपक राठी और शाह फैसल की तहरीर पर संभल कोतवाली में पांच और नखासा थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए। यहां ये बताना लाजमी होगा कि संभल बवाल में नईम, बिलाल और कैफ की मौत हो गई थी। इसके अलावा रोमान की भी मृत्यु हो गई थी। बहरहाल, फिलहाल संभल संभल गया है और उम्मीद यही की जानी चाहिए कि जो कुछ भी हो न्याय के दायरे में हो। 

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