नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए चयन समिति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार को ही चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर अंतिम फैसला करना है, तो चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष (LoP) को शामिल कर स्वतंत्रता का दिखावा करने की आवश्यकता क्या है।कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI निदेशक की चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं है।सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस तेज हो गई है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अगले साल से ऑनलाइन होगी NEET परीक्षा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का ऐलान सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया निरीक्षण