भोपाल — मुस्ताअली बोहरागोधरा कांड को एक बार फिर पर्दे पर उतारा गया है। द साबरमती रिपोर्ट नाम से आई इस फिल्म की तारीफ खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित और भी भाजपाई दिग्गज कर चुके हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सूबे में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया है। ऐसा नहीं है कि गोधरा कांड पर ये पहली फिल्म है। इससे पहले 2018 में गोधरा, जुलाई 2024 में दुर्घटना या साजिश: गोधरा चेप्टर 1 रिलीज हो चुकी है। इसके अलावा चेतन भगत के उपन्यास, 3 मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ पर आधारित काई पो चे फिल्म 2013 में रिलीज हुई थी जिसमें गोधरा कांड के बाद तीन दोस्तों में साम्प्रदायिक मतभेद पैदा हो जाते हैं। वर्ष 2008 में नंदिता दास की मल्टीस्टारर निर्देशन वाली फिल्म आई थी फिराक। ये गोधरा दंगों के बाद की स्थिति और आम लोगों के जीवन पर इसके प्रभावों पर आधारित एक दमदार फिल्म थी। राहुल ढोलकिया द्वारा निर्देशित पहली फिल्म थी परजानिया। 2007 में आई यह फिल्म एक पारसी लड़के परजान पिथावाला की सच्ची कहानी पर आधारित थी, जो 2002 के गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड के बाद लापता हो गया था। यह उस परिवार के संघर्षों को दर्शाता है, जो अपने लड़के की तलाश कर रहा है। 2005 में एक फिल्म आई थी चांद बुझ गया। चांद बुझ गया हिंदू-मुस्लिम प्रेम कहानी पर आधारित थी जिसकी पृष्ठभूमि गोधरा ट्रेन अग्निकांड था। फिल्म द साबरमती रिपोर्ट 27 फरवरी 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड पर आधारित है। गोधरा स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस की बोगी नंबर एस 6 में आग लगा दी गई थी। इस घटना में अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू कारसेवक जिंदा जल गए थे। मरने वालों में 27 महिलाएं और 10 बच्चे भी शामिल थे। उसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए थे। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे।27 फरवरी 2002 की सुबह मुजफ्फरनगर से निकली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा पहुंचीं थी। ट्रेन करीब चार घंटे की देरी से चल रही थी। अहमदाबाद जा रही ट्रेन में तकरीबन 2 हजार कारसेवक अयोध्या से सवार हुए थे। ये सभी विश्व हिंदू परिषद के बुलावे पर पूर्णाहुति महायज्ञ में भाग लेने अयोध्या गए थे। यह महायज्ञ राम मंदिर आंदोलन का एक हिस्सा था। साबरमती एक्सप्रेस अभी गोधरा स्टेशन पर पहुंची ही थी कि भीड़ ने धावा बोल दिया। एस 6 कोच में बाहर से आग लगा दी गई। कोच में सवार 59 यात्री जलकर मर गए। उनमें 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल थे। ट्रेन में सवार 48 अन्य यात्री जख्मी हो गए थे। गोधरा में ट्रेन जलाए जाने का परिणाम पूरे गुजरात में दंगों की शक्ल में सामने आया। केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में राज्यसभा को बताया था कि सन 2002 के गुजरात में हुए दंगों में 254 हिंदुओं और 790 मुसलमानों की जान गई थी। कुल 223 लोग लापता बताए गए थे, हजारों लोग बेघर भी हो गए थे। इसके अलावा सैकड़ों करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। द साबरमती रिपोर्ट फिल्म के रिलीज होने के साथ इससे जुड़े और भी कई घटनाक्रम ताज़ा हो गए है। इन्हीं में से एक थी अमेरिका की वो रिपोर्ट जिसके सामने आने के बाद राजनीति भूचाल आ गया था। अमेरिका के एक सरकारी आयोग ने अमेरिकी सरकार से कहा था कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के वीजा पर बैन कायम रखे। आयोग के जिस पैनल ने अमेरिकी सरकार से यह अनुशंसा की थी उसका कहना था कि 2002 में गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भी भूमिका थी। यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने यह अनुशंसा अपनी वार्षिक रिपोर्ट में की थी।गोधरा कांड और गुजरात दंगों के मामले में जांच भी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के वकील ने नरेन्द्र मोदी पर लगे आरोपों पर कहा था कि मोदी ने कभी नहीं कहा कि जाइए और लोगों की हत्या कीजिए। एसआईटी ने जकिया जाफरी की शिकायत की जांच करने के बाद 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी। एसआईटी के वकील आरएस जमुआर ने कहा था कि सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य ने मुख्यमंत्री को निशाना बनाकर झूठी शिकायत दर्ज करवाई। मुख्यमंत्री ने कभी भी जाकर लोगों की हत्या करने की बात नहीं कही। मालूम हो कि गोधरा कांड के एक दिन बाद 28 फरवरी को अहमदाबाद की गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी में बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में उसी सोसाइटी में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी भी शामिल थे। इन दंगों से राज्य में हालात इस कदर बिगड़ गए कि स्थिति काबू में करने के लिए तीसरे दिन सेना उतारनी पड़ी।गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जाकिया ने आरोप लगाते हुए अपने पति की हत्या के लिए नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया था। जकिया जाफरी ने कहा था कि जब उनके पति ने मोदी को फोन किया तो जवाब मिला था जाफरी अब तुम अकेले हो, खुद को बचा सको तो बचा लो। नरसंहार के खिलाफ गठबंधन नामक संगठन की ओर से हैदर खान ने भी आरोप लगाते हुए कहा था कि तत्कालीन विधायक माया कोडनानी और पूर्व मंत्री अमित शाह को दोषी ठहराए गए हैं। इससे सिद्ध हो गया कि दंगों में मोदी प्रशासन का हाथ था। मार्च 2002 में गोधरा कांड की जांच के लिए नानावटी-शाह आयोग बनाया गया था। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज केजी शाह और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जीटी नानावटी इसके सदस्य थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट का पहला हिस्सा सितंबर 2008 को पेश करते हुए गोधरा कांड को सोची-समझी साजिश बताया गया। साथ ही नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रियों और सीनियर अफसरों को क्लीन चिट दी गई थी। सन 2009 में जस्टिस केजी शाह का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद गुजरात हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अक्षय मेहता इसके सदस्य बने और तब आयोग का नाम नानावटी-मेहता आयोग हो गया। आयोग ने दिसंबर 2019 में अपनी रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा पेश किया। दूसरे हिस्से में भी ज्यादातर वही बातें थीं जो पहले हिस्से में कही गईं थीं। गोधरा कांड के बाद चले मुकदमों में करीब 9 साल बाद 31 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 2011 में कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को भी उम्रकैद में बदल दिया था। साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों के समय नरोडा पाटिया हत्याकांड का जिक्र भी लाजमी हो जाता है। अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में 61 आरोपियों में से 32 को दोषी करार देते हुए 29 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस हत्याकांड में 97 लोग मारे गए थे। इस दंगों में राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को भी दोषी ठहराया गया था। इस मामले में तीन सौ से ज्यादा लोगों ने गवाही दी है। माया कोडनानी को अदालत ने जेल भेद दिया था।खैर, चाहे साबरमती एक्सप्रेस मामला हो या फिर उसकी परिणती के स्वरूप हुए गुजरात में साम्प्रदायिक दंगे, ये सब आज भी आम आदमी को भीतर तक सालते हैं। हर वो शख्स जो इंसानियत का हिमायती है उसका दिल इन सब चीजों से दुखता है लेकिन राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले ऐसे ही मसलों को हवा देते हैं। बहरहाल, कश्मीर पर भी फिल्म बन गई और गोधरा पर भी, क्या अब मणिपुर पर भी फिल्म बनेगी……..? 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